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मजीठिया पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हिंदी अनुवाद पढ़ें (पार्ट वन)

अखबार प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रमजीवी पत्रकारों और गैर पत्रकार कर्मियों को मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशों के अनुसार वेतनमान न दिए जाने और माननीय सुप्रीम कोर्ट का आदेश न मानने पर सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई 83 अवमानना याचिकाओं और तीन रिट पेटिशनों का निपटारा करते हुए 19 जून, 2017 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्णय दिया है, उसे कुछ कर्मचारी साथी मालिकों के पक्ष में बताकर निराशा का माहौल पैदा करने में जुटे हुए हैं। हालांकि इस निर्णय में मालिकों के पक्ष में सिर्फ एक ही बात गई है, वो यह है कि कोर्ट ने इनके खिलाफ अवमानना को स्वीकार नहीं किया है और जिन अखबार मालिकों ने मजीठिया वेजबोर्ड अधूरा लागू किया है और जिनने नहीं लागू किया है उन्हें एक और मौका दिया गया है।

9. वेजबोर्ड की सिफारिशों के साथ-साथ इन सिफारिशों को स्वीकृति देने वाली दिनांक 11.11.2011 की अधिसूचना को चुनौती देने वाली उपरोक्त रिट याचिकाओं को इस न्यायालय ने अपने फैसले और दिनांक 07.02.2014 के आदेश के साथ अस्वीकृत कर दिया था। इस स्तर पर न्यायालय के उसके दिनांक 07.02.2014 के फैसले, जिसमें कि विवादास्पद रिट याचिकाओं को खारिज किया गया था, को निम्रलिखित निष्कर्षों पर सारगर्भित करना जरूरी होगा।

(i) कार्यवाही और विभिन्न लिखित माध्यमों पर सुविस्तृत रूप से जाने के बाद हम पूरी तरह संतुष्ट हैं कि मजीठिया वेजबोर्ड की कार्यवाही एक वैध दृष्टिकोण से संचालिक की गई है और वेजबोर्ड का कोई भी निर्णय एकतरफा या मनमाने ढंग से नहीं लिया गया है। अपेक्षाकृत विभिन्न आंकड़ों पर विचार करने के बाद वेजबोर्ड के सभी सदस्यों की उपस्थिति में सभी निर्णय एक सुसंगत तरीके से लिए गए थे और हमने विवादित वेजबोर्डों द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया में कोई अनियमितता नहीं पाई है।

(ii)  प्रासंगक दस्तावेजों को समझने के बाद, हम संतुष्ट हैं कि वेतन/मजदूरी संशोधन के उद्देश्यों के लिए सभी प्रासंगिक भौतिक/आर्थिक सूचनाओं की जानकारी एकत्रित करके वेजबोर्ड द्वारा व्यापक और विस्तृत अध्ययन किया गया है। नफे और नुकसान के विभिन्न तरीकों और आधुनिक युग में वेतन संशोधन के सिद्धांतों पर विचार-विमर्श करने के बाद सिफारिशों तक पहुंचा गया है। ऐसा नहीं माना जा सकता कि मजीठिया वेजबोर्ड द्वारा अनुशंसित वेतन/मजदूरी संरचना अनुचित है।

(iii)  हमने ध्यानपूर्वक सभी विवरणों की छानबीन की है। यह स्पष्ट है कि मजीठिया वेजबोर्ड द्वारा छठे केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को अंधाधुंध तरीके से आयातित/भरोसा नहीं किया गया है। छठे केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों में निहित वेरिएवल पे की अवधारणा को यह सुनिश्चित करने के लिए वेजबोर्ड की सिफारिशों में सम्मिलित किया गया है कि अखबार कर्मियों का वेतन/मजदूरी अन्य सरकारी क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के सामान हैं। मजीठिया वेजबोर्ड द्वारा इस तरह का समावेश समाचारपत्र प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों को न्यायसंगत व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए सावधानीपूर्वक विचार के बाद किया गया था, और यह ऐसा करने के उसके अधिकारों के तहत उचित था।

(iv) तदनुसार, हम मानते हैं कि वेजबोर्ड की सिफारिशें कानून में मान्य हैं, वास्तविक और स्वीकार्य विचारों पर आधारित है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप के लिए कोई वैध आधार नहीं है। नतीजतन सभी रिट याचिकाओं को खारिज किया जाता है। 

(v) हमारे निष्कर्ष और सभी रिट याचिकाओं की बर्खास्तगी को ध्यान में रखकर संशोधित/निर्धारित वेतन/मजदूरी 11.11.2011 से देय होगी, जब भारत सरकार ने मजीठिया वेजबोर्डों की सिफारिशों को अधिसूचित किया था। मार्च 2014 तक के सभी बकाया का भुगतान सभी पात्र व्यक्तियों को आज से एक वर्ष की अवधि के भीतर चार समान किश्तों में किया जाएगा और अप्रैल 2014 से संशोधित मजदूरी का भुगतान जारी रहेगा।  

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