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उत्तर प्रदेश

पर्ची बाबा के टोने-टोटकों में डूबा “हिंदुस्तान” अपने छायाकार की जेब कटने पर खामोश है!

बांदा (बुंदेलखंड)। बाघेश्वर धाम के कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हनुमंत कथा इन दिनों बांदा में चमत्कार, पर्ची और आस्था के दावों के साथ चल रही है। कथा स्थल पर लाखों की भीड़ उमड़ रही है, लेकिन इस भारी आयोजन के बीच स्थानीय लोगों और मीडियाकर्मियों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।

ताजा मामला स्थानीय दैनिक ‘हिंदुस्तान’ के छायाकार मनोज कुमार से जुड़ा है। ग्राम गुरेह निवासी मनोज कुमार का पर्स कथा स्थल के आसपास गुम हो गया, जिसमें जरूरी दस्तावेज और नकदी होने की बात कही जा रही है। पीड़ित अपनी शिकायत लेकर नगर कोतवाली के चक्कर काट रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस अखबार के लिए मनोज कुमार वर्षों से काम कर रहे हैं, वही ‘हिंदुस्तान’ अखबार अपने कैमरामैन की समस्या को लेकर खामोश नजर आ रहा है। इसके उलट, अखबार के पन्नों पर कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री की कथा, दिव्य दरबार और आयोजनों का भरपूर महिमामंडन किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कथा के नाम पर आयोजित इस विशाल कार्यक्रम में व्यवस्थाएं नाकाफी हैं। भीड़, अव्यवस्थित पार्किंग, सुरक्षा में ढिलाई और प्रशासनिक अनदेखी के चलते आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ मीडियाकर्मी भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

एक ओर कथा मंच से समाज को दिशा देने और समस्याओं के समाधान के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि पीड़ित न्याय के लिए भटकने को मजबूर हैं। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या आस्था और चमत्कारों की चमक में आम आदमी और कामकाजी पत्रकार की परेशानी बेमानी हो गई है?

यह प्रकरण न सिर्फ प्रशासन और आयोजकों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करता है, बल्कि मीडिया संस्थानों की अपनी जवाबदेही को भी कठघरे में खड़ा करता है।

मूल खबर…

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