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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला क्या नया हर्षद मेहता स्कैम है?

590 करोड़ रुपये की गड़बड़ी के बाद अब चंडीगढ़ में IDFC फर्स्ट बैंक पर 116.84 करोड़ के घोटाले का आरोप, यूँ खुला राज!

चंडीगढ़। सरकारी फंड से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। चंडीगढ़ पुलिस ने IDFC First Bank की चंडीगढ़ शाखा से जुड़े 116.84 करोड़ रुपये के कथित फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (FDR) मामले में एफआईआर दर्ज की है। यह मामला Municipal Corporation Chandigarh और Chandigarh Smart City Limited के खातों से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, नगर निगम चंडीगढ़ ने शिकायत दी थी कि जब स्मार्ट सिटी लिमिटेड के फंड को नगर निगम के खाते में ट्रांसफर किया जा रहा था, तब इसके लिए IDFC फर्स्ट बैंक में एक विशेष खाता खोला गया। इसी खाते के संबंध में बैंक मैनेजर द्वारा कई फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें जारी की गई थीं।

हालांकि बाद में जब इन एफडीआर की जांच की गई तो वे पूरी तरह फर्जी निकलीं। इन फर्जी एफडीआर की कुल रकम करीब 116.84 करोड़ रुपये बताई गई है।

कैसे सामने आया मामला?

बताया जा रहा है कि स्मार्ट सिटी कंपनी के बंद होने के बाद उसके सभी वित्तीय रिकॉर्ड नगर निगम को सौंपे गए थे। जब निगम ने बैंक स्टेटमेंट और निवेशों की समीक्षा की, तो कई एंट्री संदिग्ध पाई गईं।

बैंक से प्राप्त वास्तविक स्टेटमेंट और पहले दिए गए दस्तावेजों में भारी अंतर पाया गया। इसी दौरान यह भी पता चला कि जिन एफडीआर को रिकॉर्ड में सक्रिय संपत्ति दिखाया गया था, वे बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं थे।

इस मामले में एक आउटसोर्स अकाउंटेंट की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जो दस्तावेजों और खातों के प्रबंधन में शामिल था और जांच शुरू होने के बाद से कार्यालय नहीं आ रहा है।

किन धाराओं में दर्ज हुआ केस

चंडीगढ़ पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है, जिनमें शामिल हैं:

  • धारा 318(4): धोखाधड़ी कर संपत्ति या सुरक्षा हासिल करना
  • धारा 338: मूल्यवान दस्तावेजों की जालसाजी
  • धारा 336(3): धोखा देने के उद्देश्य से फर्जी दस्तावेज बनाना
  • धारा 340(2): फर्जी दस्तावेज को असली बताकर इस्तेमाल करना
  • धारा 61(2): आपराधिक साजिश
  • धारा 316(5): बैंक अधिकारी द्वारा आपराधिक विश्वासघात

इनमें से कुछ धाराओं में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।

बड़े घोटाले की आशंका

इस मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि हाल ही में इसी चंडीगढ़ शाखा से जुड़े हरियाणा सरकार के खातों में लगभग 590 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का मामला भी सामने आया था, जिसमें बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका जताई गई थी।

अब चंडीगढ़ नगर निगम के 116 करोड़ रुपये के फर्जी एफडी का मामला सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ एक शाखा तक सीमित गड़बड़ी है या फिर सरकारी खातों से जुड़े कहीं बड़े वित्तीय नेटवर्क की परतें खुलने वाली हैं।

फिलहाल पुलिस बैंक अधिकारियों, नगर निगम कर्मचारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है।

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