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आज के अखबार : इंडियन एक्सप्रेस की सबसे बड़ी खबर सरकार की चिन्ता है, गुलमर्ग में फंसे पर्यटकों की नहीं

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संजय कुमार सिंह

नीट और सीबीएसई के फॉलोअप के अलावा आज दो ऐसी खबरें हैं जो बताती है कि आप अचानक कहीं संकट में फंस जाएं या आपने कोई मुश्किल काम करना चुना है तो सरकार से मदद नहीं मिलेगी। सरकार डबल इंजन वाली हो या झारखंड की। इंडियन एक्सप्रेस की लीड नवोदय टाइम्स में भी टॉप पर है। शीर्षक है 3एफ पर ध्यान देने की जरूरत है। यहां एफ का मतलब फुएल यानी ईंधन, फर्टिलाइजर (उर्वरक) और फॉरेक्स यानी विदेशी मुद्रा है। मोटे तौर पर खबर यह है कि प्रधानमंत्री की बचत और मितव्ययिता की अपील जरूरी है। सरकार के पास कोई विकल्प नहीं है। यह अलग बात है कि नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं थे तो सरकार की ऐसी मजबूरियों की आलोचना करते थे। इसका कारण भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण बताते थे। अब जेएनयू में पढ़ी उनकी वित्त मंत्री ने कहा है, …. आदतन आलोचना करने वाले लोंगों ने एक नकारात्मक और निराशावादी विमर्श गढ़ा है। उन्होंने कहा है कि ऐसी टिप्पणियां तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। भारत भय फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता। हमें अपने शब्दों और कार्यों से लोगों को विश्वास दिलाना होगा। कहने की जरूरत नहीं है कि नरेन्द्र मोदी सत्ता में नहीं थे तो भय फैलाने के कैसे और कौन से काम किए हैं या करते रहे हैं। अभी भी हिन्दू खतरे में है – भय फैलाना ही है। और सत्ता में रहकर मेलोडी खिलाने का आधार भी। हालांकि, यह अलग मुद्दा है।

आज की जो दो खास खबरें हैं उनमें एक गुलमर्ग में केबल कार की खराबी, 300 पर्यटकों का फंस जाना और निकालने में छह घंटे लगना है। कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर्यटन आधारित है। आतंकवाद के कारण यह बुरी तरह प्रभावित है और केबल कार में तकनीकी खराबी से लोग परेशान होने लगें तो कश्मीर कोई क्यों जाएगा? और अगर पर्यटक कश्मीर नहीं जाएंगे तो वहां की अर्थव्यवस्था कैसे चलेगी, 370 हटाने का फायदा क्या हुआ। खबरों से नहीं लगता है कि केबल कार खराब होने जैसी स्थिति से निपटने की कोई पूर्व योजना या व्यवस्था है। खबरों के अनुसार, सेना, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम ने बचाव कार्य चलाया। दूसरी घटना रांची की है। खबरों के अनुसार, इस साल जनवरी में अपने उपकरण साथ लेकर चलने के कारण ट्रेन से उतारे जाने के बाद, भारत के अग्रणी पोल वॉल्टर देव मीना और कुलदीप कुमार को रविवार को संयुक्त रूप से राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने के कुछ ही घंटों बाद रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम के बाहर एक इलेक्ट्रिक रिक्शा पर अपने पोल लेकर जाने के लिए संघर्ष करते देखा गया। निश्चित रूप से यह एक अनोखा दृश्य था। अर्नब सील की खबर के अनुसार, आयोजनकर्ताओं से कोई मदद न मिलने के कारण, देव, उनके भाई राज और कुलदीप की तिकड़ी ने संशय में पड़े ड्राइवर को यह विश्वास दिलाया कि उनके ‘पोल’ प्लास्टिक के पाइप हैं। असल में ये 10 पोल या खंभे लगभग 15 लाख रुपये के हैं। ये भारत में बने हुए नहीं हैं और एक अमेरिकी कंपनी से मंगवाए गए हैं। इनकी डिलीवरी में 30-35 दिन लग गए थे। सोमवार को, देव और कुमार ने अपने होटल से हवाई अड्डे तक पोल ले जाने के लिए एक ऑटो रिक्शे की छत पर जगह ढूंढ ली। कहने की जरूरत नहीं है कि एक खिलाड़ी को खेल आयोजन में भाग लेने के लिए अपना जरूरी सामान लेकर पहुंचने की व्यवस्था आयोजकों को करना चाहिए। पर मेडल लेकर सड़क पर खड़े खिलाड़ी देखे गए हैं। जो भी हो, अपेक्षा सरकार से ही रहती है और आज दोनों तरह के मामले हैं।

पेट्रोल की कीमत बढ़ना, 10 दिन में चौथी बार – निश्चित रूप से बड़ी खबर है और कई अखबारों में लीड है। अमर उजाला ने तो शीर्षक में ही लिखा है, वित्त मंत्री ने दिए संकेत – और बढ़ेंगी कीमतें। आप जानते हैं कि सरकार थोड़ा-थोड़ा करके बढ़ा रही है और यह वृद्धि बंगाल चुनाव के बाद कुछ दिन रुककर शुरू की गई। असल में राहुल गांधी ने पहले ही कह दिया था कि कीमत बढ़ेगी। उन्हें गलत साबित करने के लिए वृद्धि की घोषणा देर से की गई और अब उस देरी की भरपाई की जा रही है। खबर यह है कि 15 मई से कल 25 मई तक के 10 दिनों में 7.50 रुपए तक की वृद्धि हुई है। इसमें वित्त मंत्री का बचाव और फिल्म अभिनेता धर्मेन्द्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण दिया जाना, उसे भाजपा सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी द्वारा प्राप्त किया जाना भी खबर है। हेडलाइन मैनेजमेंट के लिहाज से यह अच्छी सामग्री भी है। काश! इसकी जगह रांची वाली खबर छपती। जनहित की खबरों के मामले में जब यह रुख है तो आज एक बडी़ खबर यह भी है कि पश्चिम बंगाल सरकार के आदेश के दो दिन बाद बंगाल में एक डिटेंशन सेंटर खुल गया है और दूसरा खुलने वाला है। हालांकि, पश्चिम बंगाल में शुवेन्दु मंत्रिमंडल को लेकर सस्पेंस बढ़ता जा रहा है। इस आशय की खबर दि एशियन एज में चार कॉलम में है। खबर के अनुसार, पोर्टफोलियो को लेकर भाजपा में सघन जोर आजमाइश है और समझा जा रहा है कि अंतिम फैसला आरएसएस करेगा। यह तृणमूल से भाजपा में आयातित, भ्रष्टाचार के आरोपी, शुवेन्दु अधिकारी पर कैसे कितना लागू होगा – देखने लायक होगा। होल्डिंग सेंटर और उसमें रहने वाले नौ लोग – द टेलीग्राफ में यह खबर लीड है। चार मंजिल की इमारत की तस्वीर के साथ यह सूचना दिलचस्प है कि इसमें नौ लोग रह भी रहे हैं। द टेलीग्राफ ने सीमा सुरक्षा बल के एक पूर्व डीजी के हवाले से लिखा है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पता लगाने और वापस भेजने की सरकार की यह नीति आम नागरिकों को परेशान नहीं करे। खबर में यह भी बताया गया है कि राज्यों को अपनी सीमा में रह रहे संदिग्ध अवैध प्रवासियों का मामला 30 दिन में निपटाया जाना है। आप जानते हैं कि एसआईआर और लॉजिकल डिसक्रिपेंसी के मामले में क्या हुआ उसमें नागरिक परेशान तो हुए ही हैं पर सरकार को इसकी परवाह होती तो यह सब कहां होता। हालांकि यह भी अलग मामला है। दिल्ली के अखबारों में यह खबर इंडियन एक्सप्रेस में भी है।  

द हिन्दू की आज की लीड भी बाकी अखबारों से अलग है और पेट्रोल की कीमत 100 पार करने से अलग है। लीड का शीर्षक है, नीट के प्रश्नपत्र बार-बार लीक होने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को दोषी ठहराया और कहा कि कोई सबक नहीं सीखा। हिन्दी अखबारों में आज देशबन्धु के पहले पन्ने पर एक खास खबर का शीर्षक है – राहुल गांधी ने कहा, जेन-जी तोड़ेंगे प्रधानमंत्री मोदी का अहंकार। गुलमर्ग की खबर जितनी गंभीर है उस लिहाज से द टेलीग्राफ में पहले पन्ने पर छपी है। यह खबर और भी अखबारों में पहले पन्ने पर है लेकिन टेलीग्राफ की तस्वीरें इसे सजीव बनाती हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर सिंगल कॉलम में सिंगल कॉलम की ही फोटो के साथ है और सबको सुरक्षित बचा लिए जाने के बाद की सूचना जैसी लगती है। द हिन्दुस्तान टाइम्स में भी वित्त मंत्री की विद्वता बताने वाली खबर है। इसका शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा – वित्त मंत्री ने कहा, उपभोक्ताओं की रक्षा के लिए केंद्र सरकार ने एक लाख करोड़ का झटका झेला है। वित्त मंत्री के अनुसार, उत्पाद शुल्क में कमी के कारण सरकारी खजाने को एक लाख करोड़ रुपए की चोट लगने का अनुमान है। कहने की जरूरत नहीं है कि जीएसटी से सरकार जो वसूली करती है वह राशि लगातार बढ़ रही है और इतना बढ़ती रही है कि सरकार ही हर महीने जरूर बताती है। यही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत कम थी तो भारत में उपभोक्ताओं को राहत नहीं दी गई। यह अब पुरानी खबर है।   

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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