अनिल भास्कर-
किशोर कुणाल नहीं रहे। इस खबर ने मन तो व्यथित किया ही, स्मृतियों का रोशनदान भी खोल दिया। हम सब, विशेष तौर पर 80 के दशक में पटना में कॉलेज लाइफ जीने वालों, के लिए कुणाल किसी नायक से कम नहीं थे।
वह यंग एंग्रीमैन अमिताभ बच्चन के एक्शन का दौर था। मेरी तरह लगभग हर युवा इस एक्शन का दीवाना। लेकिन हमारी असल जिंदगी के नायक किशोर कुणाल थे। जांबाज़ आईपीएस। जितने दिलेर उतने ही दबंग। हम उन्हें जंजीर के अमिताभ का किरदार रियल लाइफ में जीने वाले पुलिस अफसर के रूप में देखते थे। अपराध और अपराधियों के सफाये के लिए दृढ़, ख्यात।
चिल्लरों से लेकर संगठित गिरोहों के सूरमाओं तक, सबका पजामा गीला होता था उनके नाम से। हां, पब्लिक फैन थी उनकी। दिल देने की हद तक मुरीद। खासकर आम आदमी, जिनके अमिताभ बच्चन किशोर कुणाल ही थे।
सूबे की सियासी चूलें हिलाने वाले बॉबी हत्याकांड याद है आपको? कब्र से बॉबी की लाश निकालकर कांड के पोस्टमॉर्टम से प्रदेश सरकार का सिंहासन डिगाने से लेकर पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर का शिखर आसमां तक ऊँचा उठाने तक के किस्से तो मीडिया के रास्ते पूरे प्रदेश-देश में चर्चित हुए। लेकिन दर्जनों किस्से सिर्फ शहर की हवा में तैरकर रह गए। तब सोशल मीडिया था नहीं। मुख्यधारा की मीडिया की भी अपनी सीमा थी। बेहद संकरी।
हां, तब किस्सागोई अपने सबसे रोमांचक दौर में थी और राजधानी के गली-मोहल्लों में तैरने वाले किस्सों के कुणाल प्रमुख पात्र। ज्यादातर उनकी दिलेर और अनूठी पुलिसिंग से जुड़े। दो रोचक किस्से साझा करना चाहता हूं। इसकी सच्चाई की कोई गारंटी नहीं, पर तब पटना में खासे चर्चित और मजेदार।
पहला किस्सा- एक शराबी देर शाम नशे में झूमता बड़बड़ाता कांकड़बाग की मुख्य सड़क पर चला जा रहा था। एसपी किशोर कुणाल रात्रि गश्त पर थे। शराबी को सड़क पर लहराते देखा तो जीप रुकवाई। उतरकर उसके पास गए। नाम पता पूछा।
फिर सख्ती से हिदायत दी- आज के बाद शराब पीकर सड़क पर मत डोलना। पीनी है तो घर बैठकर पीयो। शराबी धुत्त। बोला- साहब घर पर घरवाली पीने कहां देती है? डंडा लेकर दौड़ाती है।
कुणाल बोले- तो पीना छोड़ दो। पीना कैसे छोड़ दूं साहब, शराबी ने जवाब दिया। कुणाल बोले- अगर पीना नहीं छोड़ सकते तो पटना छोड़ दो।
दूसरा किस्सा- कंकड़बाग की उसी सड़क पर एक युवक तेज रफ़्तार साइकिल पर उड़ा जा रहा था। एक हाथ साइकिल के हैंडल पर, दूसरे में सिगरेट।
गश्त कर रहे कुणाल की नज़र पड़ी तो इशारे से रुकवाया। पूछा- एक हाथ में हैंडल दूसरे में सिगरेट! क्यों हीरो, बड़े उस्ताद हो! साइकिल दोनों हाथ से पकड़कर चलाया करो। सिगरेट पीनी है तो साइकिल रोककर पीया करो।
युवक बोला- साहब साइकिल चलावे में एकदम ट्रेंड हैं। एक हाथ से चलावे में कौनो प्रॉब्लम नहीं होता है साहब।
बस फिर क्या। कुणाल ने सिपाहियों से कहा- साइकिल और सवार दोनों को जीप में डालो। पुलिस टीम दोनों को लेकर पास के एक मोटर गैराज में पहुंची।
कुणाल ने मैकेनिक से कहा- इस हीरो की साइकिल का हैंडल एक तरफ काट दो। यह एक्सपर्ट है। एक हाथ से ही साइकिल चला सकता है। तो फिर हैंडल भी एक ही तरफ जरुरी है न। हीरो पस्त।



