“मुझे दाढ़ी वाले लोगों से डर लगता है।” Jagdeep Dhankhar को भले ही उपराष्ट्रपति पद अचानक छोड़ना पड़ा हो, लेकिन उनका हास्यबोध बहुत बाद तक भी बरकरार रहा, जो सत्ता को चुभने लगा था…
मुंबई। शिवसेना (UBT) नेता Sanjay Raut की नई किताब “Unlikely Paradise” में देश की राजनीति को लेकर कई बड़े दावे किए गए हैं। इनमें सबसे चर्चित आरोप यह है कि पूर्व उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दबाव में 2025 में इस्तीफा देना पड़ा।
किताब के मुताबिक, धनखड़ अपने “स्वतंत्र राजनीतिक रुख” के कारण सरकार के निशाने पर थे और इसी वजह से उन पर एजेंसी के जरिए दबाव बनाया गया। इसमें दावा किया गया है कि ED ने उनके और उनकी पत्नी के खिलाफ जयपुर स्थित संपत्ति से जुड़े मामले में फाइल तैयार की थी, जिसमें घर बेचकर पैसे विदेश भेजने के आरोप शामिल थे।
राउत के अनुसार, जैसे ही धनखड़ के स्वतंत्र रुख की चर्चा शुरू हुई, ED ने सक्रियता बढ़ाई और कथित तौर पर उन पर इस्तीफे के लिए दबाव बनाया गया। किताब में यह भी कहा गया है कि शुरुआत में धनखड़ ने दबाव नहीं माना, जिसके बाद जांच और तेज कर दी गई।
अशोक लवासा और अमित शाह से जुड़े दावे
किताब में पूर्व चुनाव आयुक्त Ashok Lavasa का जिक्र करते हुए दावा किया गया है कि उनके परिवार पर ED की कार्रवाई के बाद उन्हें भी पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इसके अलावा, किताब में यह भी उल्लेख है कि 2002 दंगों के मामलों में प्रधानमंत्री Narendra Modi (तत्कालीन गुजरात मुख्यमंत्री) की गिरफ्तारी को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन तत्कालीन केंद्रीय मंत्री Sharad Pawar ने इसका विरोध किया था।
किताब में यह दावा भी किया गया है कि उस समय Amit Shah ने बाल ठाकरे से संपर्क कर न्यायिक प्रक्रिया में मदद मांगी थी।
विवाद और प्रतिक्रिया
हालांकि, ये सभी दावे किताब में किए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस तरह के दावे सामने आने के बाद आने वाले समय में इस मुद्दे पर सियासी घमासान तेज हो सकता है।
फिलहाल, यह मामला किताब में किए गए गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में है, जिसकी सच्चाई जांच और प्रतिक्रियाओं के बाद ही स्पष्ट होगी।

चुरुमरी नामक एक्स हैंड का ट्वीट-
प्रश्न: Jagdeep Dhankhar ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा क्यों दिया?
उत्तर: क्योंकि, जब उन्होंने Narendra Modi सरकार के खिलाफ “राजनीतिक कदम” उठाने शुरू किए, तो ED ने उनके सामने जयपुर स्थित घर की बिक्री से मिले पैसे को विदेश भेजने से जुड़ी एक फाइल रख दी—ऐसा दावा The Times of India की रिपोर्ट (प्रियांका काकोडकर) में किया गया है।
ED का प्रयोग हुआ विपक्ष पर और रिज़ल्ट निकला सत्ता पक्ष की तरफ़ से। इस एक संस्था के भय से देश की राजनीति तय हो रही है। बीजेपी के भीतर की राजनीति और विपक्ष की राजनीति। जबकि इस संस्था का भ्रष्टाचार दूर करने से लेकर किसी भी एक काम में कोई रोल नहीं है। -रवीश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार


