इंदौर/नई दिल्ली: दिल्ली में 10 नवंबर 2025 की शाम लाल किले के पास हुए कार बम धमाके ने आतंकवाद की एक भयावह साजिश का पर्दाफाश तो किया ही, साथ ही फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी को भी गंभीर सवालों के घेरे में ला खड़ा किया। धौज गांव में बने इस मेडिकल कॉलेज में देशभर से छात्र पढ़ने आते हैं, लेकिन विस्फोट के बाद सामने आई जानकारियों ने इसकी साख को गहरा झटका दिया है। किसी को अंदाज़ा भी नहीं था कि जहां सैकड़ों छात्र डॉक्टर बनने की तैयारी करते हैं, वहीं आतंकियों की बैठकों का अड्डा भी बन रहा था।
जवाद अहमद सिद्दीकी फिर विवादों में
अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी का नाम इस धमाके के बाद फिर चर्चा में है। मध्य प्रदेश के महू (डॉ. भीमराव आंबेडकर नगर) में 15 नवंबर 1964 को जन्मे सिद्दीकी ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। करियर की शुरुआत अध्यापन से हुई, लेकिन जल्द ही वे बिजनेस की तरफ मुड़ गए।
1993 में वे जामिया मिलिया इस्लामिया के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में लेक्चरर बने। इसी दौरान उन्होंने अपने भाई सउद अहमद के साथ अल-फलाह इन्वेस्टमेंट कंपनी की नींव रखी। यहीं से अल-फलाह समूह की विस्तार यात्रा शुरू हुई।
9 कंपनियों का विशाल नेटवर्क
सिद्दीकी के नेतृत्व में अल-फलाह ग्रुप ने शिक्षा, सॉफ्टवेयर, ऊर्जा और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में कुल 9 कंपनियां खड़ी कीं। इनमें से अधिकतर कंपनियां जामिया नगर स्थित अल-फलाह हाउस से संचालित होती थीं—
- अल-फलाह इन्वेस्टमेंट (1992)
- अल-फलाह मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन (1997 से, अब 78 एकड़ का कैंपस)
- अल-फलाह डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड
- अल-फलाह इंडस्ट्रियल रिसर्च फाउंडेशन
- अल-फलाह एजुकेशन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड
- एमजेएच डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड
- अल-फलाह सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड
- अल-फलाह एनर्जीज प्राइवेट लिमिटेड
- तारबिया एजुकेशन फाउंडेशन
2019 के बाद इनका अधिकांश संचालन बंद हो गया। मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन वर्तमान में एनएएसी की जांच के दायरे में है।
7.5 करोड़ की ठगी का मामला
2000 में सिद्दीकी का नाम एक बड़े धोखाधड़ी केस में सामने आया था। न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में दर्ज FIR के मुताबिक, सिद्दीकी और उनके सहयोगियों ने निवेशकों से करीब 7.5 करोड़ रुपये की ठगी की। आरोप था कि उन्होंने फर्जी स्कीमें चलाकर लोगों से निवेश करवाया, फिर दस्तावेजों में हेराफेरी करके उन पैसों को शेयरों में बदल दिया और रकम अपने खातों में ट्रांसफर कर ली।
- 2001: पुलिस ने गिरफ्तारी की
- 2003: हाईकोर्ट ने फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर जमानत याचिका खारिज की
- 2004: निवेशकों को पैसा लौटाने की शर्त पर जमानत
- 2005: पटियाला हाउस कोर्ट से बरी
- लाल किले धमाके की कड़ी
10 नवंबर 2025 की शाम लाल किले के पास खड़ी हुंडई i20 में हुए धमाके में 13 लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए। इस साजिश में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के दो कर्मचारी—डॉ. शाहीन सईद और डॉ. मुजम्मिल शकील—मुख्य संदिग्ध बताए जा रहे हैं।

मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है, और इसके दायरे में सिद्दीकी के पुराने व्यवसाय, कंपनियां और आर्थिक नेटवर्क भी आ गए हैं।
धमाके ने न सिर्फ देश की सुरक्षा व्यवस्था को झकझोरा है, बल्कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उसके संस्थापक की पिछली परतों को भी एक बार फिर उधेड़कर सामने ला दिया है।
पुष्प रंजन-
अल फलाह यूनिवर्सिटी के मालिक जवाद अहमद सिद्दीकी की कहानियाँ दे दनादन छपने लगी हैं. यारों ने खोद डाला है. जामिया से जेल तक का सफरनामा। लेकिन, बुनियादी सवाल से हम अब भी दूर हैं.
अरबों रुपयों की प्रॉपर्टी इस शख़्स ने 10 -15 साल में खड़े कैसे कर लिये? अकेला शख्स बन गया फाइनेंस-बिल्डर- शिक्षा माफिया. लेकिन, इस सब के लिए इसे प्रोटेक्शन कहाँ से मिल रहा था? इस सवाल पर सत्ता के गलियारों में भी चुप्पी है.
फर्ज़ीवाड़े के लिए कुख्यात, और जेल जा चुके एक शख्स की यूनिवर्सिटी में सूबे के गवर्नर बतौर चीफ गेस्ट आते हैं. सेना के सीनियर अफसरों की आवजाही होती है. नेता-मंत्री-नौकरशाह का नेक्सस कैसे एक्टिव था यहाँ?
मैंने दो दिन पहले भी अनुरोध किया था, सही से खंगालिये इस अल फलाह यूनिवर्सिटी को. इसके गर्भनाल सत्ता के गलियारे से जुड़े मिलेंगे.



