जितेन्द्र नेगी बने राष्ट्रीय सहारा देहरादून के संपादक, रुबी अरुण ‘समय’ चैनल से मुक्त

राष्ट्रीय सहारा देहरादून में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र नेगी को प्रबंधन ने देहरादून का स्थानीय संपादक नियुक्त किया है. नेगी अभी तक सहारा में ब्यूरो चीफ की भूमिका में थे. नेगी इससे पहले अमर उजाला व दैनिक जागरण को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. करीब पांच माह पूर्व दिलीप चैबे की स्थानीय संपादक पद से विदाई के बाद से ही यह पद खाली चल रहा था. सहारा के सीईओ और एडिटर इन चीफ उपेंद्र राय आज देहरादून में थे और उन्होंने सहारा मीडिया उत्तराखंड के लोगों के साथ बैठक कर उचित दिशा निर्देश दिए.

उधर रुबी अरुण के बारे में सूचना है कि वे सहारा मीडिया के समय चैनल से मुक्त हो गई हैं. सहारा में पहले काम कर चुके होने के कारण के चलते कई वरिष्ठ लोग ज्वाइन करने के कुछ महीने बाद घर बैठने पर मजबूर हो गए, उसी क्रम में रुबी अरुण को भी चैनल से जाना पड़ा क्योंकि वह भी पहले सहारा मीडिया में काम कर चुकी हैं. सहारा में नियम है कि जो भी पहले काम कर चुका हो, उसे ज्वाइन कराने से पहले सुब्रत राय की मंजूरी ली जाए. कई लोगों की ताबड़तोड़ ज्वायनिंग कराए जाने के बाद उन्हें घर बिठाए जाने के प्रकरण पर उपेंद्र राय के कद पद को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं.

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Comments on “जितेन्द्र नेगी बने राष्ट्रीय सहारा देहरादून के संपादक, रुबी अरुण ‘समय’ चैनल से मुक्त

  • If the crediblity is lost everything lost. Sahara Media management has announced so many thing including salary in time .Thease all have given new streangth and enthusiasm to sahara workers.Management should think about the sentiment of workers..If you have difficulty in giving salary in time,atleast,you can issue promotion letter. Sahara Media workers know these are cashless paper but it has brought great enthusiam among workers. So it is better policy to deliver letter as soon as possible to enhance the moral of workers.

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  • उपेद्र जी की नई पारी से सहराकर्मियों का उत्साह बेहद बढ़ा है. बेहतर है कि सहारा प्रबंधन उनके सभी निर्णयों का स्वागत ही नहीं करे , बल्कि तुरंत कार्यान्वित करे. इसी में सहारा की भलाई है. उपेन्द्र जी हाल ही में सहाराश्री से मंजूरी लेकर १० वर्षों से कार्यरत सहराकर्मियों को , जिनका इस बीच कोयी प्रोनात्ति नहीं हुई है , उन्हें २ प्रोनात्ति देने की लिखित सर्कुलर जरी किया है. यह क्रन्तिकारी कदम है , किंतु इस सन्दर्भ में समयावधि बीत जाने के बाद भी पत्र जारी नहीं होने से सहराकर्मियों में क्षोभ पनप रहा है. आखिर इससे किसकी विश्वश्नियता प्रभावित होगी. उपेन्द्र जी जो भरोसा दिलाया है उसे तुरंत लागु करना चाहिय .क्या कोई सहारा के मीडियाकर्मी एक ही पद पर १०-१५ वर्षों तक बना रहेगा? क्या यह इंसाफ है. दुसरे अख़बारों के रिपोर्टर इस अवधि में संपादक तक बन गए.कृपया ध्यान दें.

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