नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय जैसे अति-संवेदनशील सरकारी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली स्थित डीएम कार्यालय परिसर से जनसत्ता के वरिष्ठ पत्रकार की बाइक दिनदहाड़े चोरी हो जाना प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बन गया है।
मामला 21 जनवरी का है। जनसत्ता अख़बार में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार भूपेन्द्र पांडेय दोपहर करीब ढाई बजे अपने काम के सिलसिले में डीएम कार्यालय पहुंचे थे। मेन एंट्री गेट से प्रवेश करने के बाद उन्होंने अपनी बाइक चुनाव के दौरान सिंगल विंडो सिस्टम के लिए बनाए गए ऑफिस के पास पार्किंग में खड़ी की और भीतर चले गए। कुछ समय बाद लौटने पर बाइक मौके से गायब मिली।
सीसीटीवी में कैद हुई चोरी, फिर भी चोर बेखौफ
बाइक न मिलने पर परिसर में तलाश की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद पीसीआर कॉल कर नंद नगरी थाना पुलिस को सूचना दी गई। डीएम की अनुमति के बाद पुलिस ने कार्यालय परिसर के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में एक अज्ञात शख्स हेलमेट पहने हुए परिसर में आता है और पार्किंग में खड़ी बाइक को बेहद आसानी से लेकर बाहर निकल जाता है।
हैरानी की बात यह है कि बाइक बाहर ले जाते समय मुख्य गेट पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने न तो उससे कोई पूछताछ की और न ही रोका। इससे यह स्पष्ट हो गया कि डीएम कार्यालय परिसर में प्रवेश और निकासी पर कोई प्रभावी निगरानी नहीं है।
“यहां तो अंदर ही बाइक चोरी होती है”
सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेज (ICDS) के अधिकारियों तक की बाइक इसी परिसर से चोरी हो चुकी है। बाहर नहीं, बल्कि परिसर के अंदर ही आए दिन बाइक चोरी की घटनाएं होती रहती हैं।
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि पिछले दिनों भी कई बाइक चोरी हो चुकी हैं, लेकिन न तो प्रशासन ने इस पर ध्यान दिया और न ही सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त किया गया। डीएम कार्यालय के बाहर बाउंड्री के पास रोड साइड से भी वाहन चोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
डीएम ऑफिस से एसी तक चोरी, फिर भी सबक नहीं
चौंकाने वाली बात यह है कि खुद डीएम अजय कुमार के कार्यालय से कुछ समय पहले एसी समेत अन्य सामान चोरी हो चुका है। इसके बाद कार्यालय के उस हिस्से को जाली से कवर जरूर कर दिया गया, लेकिन बढ़ती चोरी की घटनाओं को रोकने या सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
मेन गेट पर नहीं हैं सीसीटीवी कैमरे
डीएम कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगे हैं। ऐसे में परिसर में आने-जाने वालों की पहचान और गतिविधियों पर नजर रखना लगभग नामुमकिन है। सुरक्षा कर्मियों से जब इस संबंध में सवाल किया गया तो उनका जवाब था—“यहां तो आए दिन चोरी होती रहती है।”
पुलिस ने कई बार किया आगाह, फिर भी अनदेखी
इस पूरे मामले पर नंद नगरी थाने के थाना अध्यक्ष आनंद यादव का कहना है कि इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। पुलिस अपनी ओर से वारदातों को रोकने का प्रयास कर रही है और डीएम कार्यालय प्रशासन को कई बार अंदर और बाहर वाहनों की चोरी रोकने के लिए आगाह भी किया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया।
बड़ा सवाल
जब जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय जैसा अति-सुरक्षित माना जाने वाला परिसर ही चोरों के लिए सेफ जोन बन गया है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का भरोसा किस आधार पर किया जाए? यह घटना दिल्ली सरकार और जिला प्रशासन के सुरक्षा दावों की जमीनी हकीकत उजागर करती है।



