जयपुर। पत्रकारों के हितों और उनकी समस्याओं को लेकर भारतीय प्रेस पत्रकार संघ के अध्यक्ष अभय जोशी ने राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से मुलाकात कर पत्रकार समाज से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की और ज्ञापन सौंपा।
मुलाकात के दौरान पत्रकारों की सुविधाओं और सम्मान से जुड़े कई विषय प्रमुखता से उठाए गए। विशेष रूप से यह मांग रखी गई कि जयपुर स्थित संविधान क्लब की सदस्यता प्रदेश के पत्रकारों के लिए भी खोली जाए तथा सभी वरिष्ठ और युवा पत्रकारों को मात्र एक रुपये के प्रतीकात्मक शुल्क पर आजीवन सदस्यता दी जाए, ताकि पत्रकार अपने एवं अपने परिवारजनों के सामाजिक व पारिवारिक कार्यक्रम यथा शादी, जन्मदिन या अन्य कोई भी सामाजिक कार्यक्रम वहां आयोजित कर सकें और आपसी संवाद का एक सशक्त मंच तैयार हो सके।
इस पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि संविधान क्लब की सदस्यता से जुड़े नियम पूर्व की अशोक गहलोत सरकार के समय बनाए गए थे और वर्तमान में उन नियमों में हमारी तरफ से कोई नया प्रावधान नहीं जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि उन नियमों में पत्रकारों को सदस्यता देने का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है।
देवनानी ने कहा कि अब भारतीय प्रेस पत्रकार संघ द्वारा यह मांग उनके समक्ष रखी गई है, इसलिए वे संविधान क्लब की अगली बैठक में कमेटी के सामने इस प्रस्ताव को रखेंगे , ताकि इस विषय पर विचार किया जा सके।
इस दौरान एक संवेदनशील मुद्दे को भी प्रमुखता से रखा गया। प्रेस फोटोग्राफर श्री दिनेश सैनी के निधन के बाद उनके परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। इस संबंध में उनकी धर्मपत्नी को राजस्थान विधानसभा या किसी सरकारी उपक्रम में मानवीय आधार पर रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की गई। इसके साथ ही विधानसभा में जब भी निकट भविष्य में नयी नौकरियां निकाली जाये तो उसमें जिन पत्रकारों का असमय निधन हो गया है उनकी धर्मपत्नी को विधवा कोटे में नौकरी देने में प्राथमिकता दी जाये.
इस पर विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि इस विषय में आगे विचार करने के लिए दिनेश सैनी की धर्मपत्नी का बायोडाटा उपलब्ध कराने को कहा गया है, वे मुख्यमंत्री को भेजेंगे ताकि संबंधित स्तर पर आवश्यक कार्यवाही की संभावना देखी जा सके।
इसके अलावा विधानसभा सत्र के दौरान पत्रकारों के पास बनाने की प्रक्रिया को सरल करने तथा छोटे, लघु और मध्यम समाचार पत्रों से जुड़े पत्रकारों को भी समान अवसर देने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई।



