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मध्य प्रदेश

कैलाश विजयवर्गीय न सिर्फ मीडिया को बल्कि हम सबको ‘घंटा’ दिखा रहे हैं!

उर्मिलेश-

पत्रकार अनुराग द्वारी ने इंदौर में दूषित पानी पीने से कई गरीब लोगों की हुई मौत के हवाले मुआवजे को लेकर भाजपा नेता और मध्य प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से कुछ सवाल किया. मंत्री ने जवाब देने की बजाय बदजुबानी की.अनुराग ने विजयवर्गीय की बदजुबानी का कड़ा प्रतिकार किया. हर पत्रकार को ऐसा ही करना चाहिए.

पर आज के दौर में ऐसा नहीं होता इसलिए यह प्रकरण ‘बड़ी खबर’ बन गया! किसी मंत्री या जिम्मेदारी के पद पर बैठे किसी भी पदाधिकारी द्वारा ऐसी बदजुबानी और दबंगई दिखाने पर अगर आज के ज्यादातर पत्रकार अनुराग द्वारी जैसा प्रतिकार नहीं करते तो मुझे यह कहने में संकोच नहीं कि वे ‘पत्रकारिता की नौकरी’ भले कर रहे हों पर वे पत्रकार नहीं होते!

और हां, इस घटना से एक और बहुत दिलचस्प बात सामने आ गई. इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाता रहा है. इसके लिए शहर के प्रशासन को बाकायदा सम्मानित किया जाता है. जहां तक याद है, पिछले साल(2025) में भी इंदौर ही ‘सबसे स्वच्छ शहर’ घोषित हुआ था. अपने नागरिकों को स्वच्छ पेय जल उपलब्ध कराये बगैर कोई शहर ‘सबसे स्वच्छ शहर’ कैसे बन जाता है! निश्चय ही अनुराग और विजयवर्गीय संवाद-प्रतिवाद प्रकरण के राष्ट्रीय फलक पर आ जाने के बाद अब ‘सबसे स्वच्छ शहर-इंदौर’ का मिथक भी टूट गया!


नरेंद्र नाथ मिश्रा-

डियर मीडिया और आम जनता,.. मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य के एक जिला में बच्चे पानी पीकर मर गये हैं। अब तक 9 बच्चे की मौत हो चुकी है। सैकड़ों बीमार हैं। उस जिले का मंत्री और सीनियर नेत इस जनसरोकार के मुद्दे पर पूछे गये सवाल को घंटा कहता है। फोकट का मुद्दा कहता है।

यह उस पत्रकार की व्यक्तिगत ताकत और जीत थी कि उसने काउंटर किया और मंत्री ने खेद व्यक्त किया।

कायदे से इतनी बड़ी त्रासदी के बाद किसी भी डेमोक्रेटिक विकसित देश मंत्री को खुद से इस्तीफा देना चाहिए था। हंगामा मच जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं होगा।

लेकिन घटना के बाद भी जिस तरह का अहंकार और संवेदनहीनता दिखाने के बाद भी मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं तो पूरी मीडिया और आ जनता के लिए उनका घंटा शब्द बना रहेगा। मंत्री ने सही में घंटा दिखा दिया गया। याद करें इसी मंत्री ने पिछले दिनों तब आस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेट खिलाड़ी को दोषी ठहरा दिया जब उनके इलाके में उसके साथ छेड़खानी हुई थी। बोल दिया था अकेले घूमने गई ही क्यों। इसी मंत्री के बेटे ने सार्वजनिक तौर पर एक व्यक्ति को बैट से बुरी तरह पीटा था।

ये मंत्री हमसबको-आपको घंटा दिखा रहे हैं। कुछ दिन भारत माता की जय और हिंदू एकता की बात करते दिखेंगे। इस उम्मीद कि इन दोनों चीजों में ये सारी बात खो जाएगी।


मनीष शर्मा-

ये है देश के तथाकथित सबसे “साफ शहर” के “गंदगी से सने” मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जिनके राज में अब तक जहरीले पानी से करीब 8 मौतें हो चुकी है और विजयवर्गीय के अनुसार ये “फोकट और घण्टा” सवाल है।

इस पूरे प्रकरण से कैलाश विजयवर्गीय की मानसिक और नैतिक स्थिति साफ हो चुकी है और उन्हें मंत्री रहने का अब कोई हक नहीं है, हम चाहते है कि पीड़ित परिवारों को कम से कम 1 करोड़ रुपये मुआवजा मिले क्योंकि ये सरकारी हत्या है।

साथ ही इस पूरे मामले की हाईकोर्ट की निगरानी में जांच होना चाहिए और दोषी मंत्री, अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए।


क्रांति कुमार-

कैलाश विजयवर्गीय के तरफ जो टकला आदमी NDTV के पत्रकार अनुराग द्वारी से लड़ रहा था वो इंदौर के उसी इलाके का पार्षद कमल वाघेला है जहां गंदा पानी पीने से दस लोगों की मौत हुई है.

टकला आदमी को देखकर NAYAK फ़िल्म का भानु का किरदार याद आ गया जिसे सौरभ शुक्ला ने निभाया था.

भानु भी CM के लिए कैमरा बंद कराता है, पत्रकारों को डांटता फटकारता है. अपने नेता के लड़ता है. भानु जैसे लोग हर छोटे बड़े नेता के इर्दगिर्द घूमते हुए मिलेंगे. मोहल्लों में भानु लोगों का रुतबा किसी मंत्री से कम नहीं होता है.

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