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मध्य प्रदेश

पुलिस पर ‘फूट डालो मौज लो’ वाली रणनीति अपनाने का आरोप लगाकर पत्रकारों ने दिया धरना

कटनी। जिले में पत्रकारों के साथ पुलिस द्वारा किए गए अभद्र व्यवहार और धमकियों के खिलाफ पत्रकार समुदाय एकजुट होकर सड़कों पर उतर आया है। सोमवार को शहर के मध्य सुभाष चौक पर पत्रकारों ने सांकेतिक धरना शुरू किया और दोषी पुलिस अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की।

मामला 31 मई का है, जब सीएसपी ख्याति मिश्रा के परिजनों के साथ पुलिस द्वारा कथित तौर पर की गई बर्बर कार्रवाई की सूचना मिलने पर पत्रकार मौके पर कवरेज के लिए पहुंचे थे। आरोप है कि कवरेज के दौरान पुलिस ने पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की की, उन्हें एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने तक की धमकी दी। इस व्यवहार को लेकर पत्रकारों में भारी आक्रोश देखा गया और मौके पर ही पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया।

घटना के नौ दिन बीत जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कदम न उठाए जाने पर पत्रकारों ने अब सार्वजनिक प्रदर्शन का रास्ता अपनाया है।

धरने में शामिल पत्रकारों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि— “डीएसपी प्रभात शुक्ला सहित संबंधित थाना प्रभारियों व दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ जब तक सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।”

फूट डालो और राज करो की नीति?

धरने में मौजूद पत्रकारों ने आरोप लगाया कि पुलिस विभाग के कुछ अधिकारी पत्रकारों के बीच फूट डालने की रणनीति पर काम कर रहे हैं ताकि आंदोलन को कमजोर किया जा सके। हालांकि धरने में पत्रकारों की एकजुटता और मजबूती साफ देखी गई।

पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि अगर आने वाले दिनों में भी दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती तो यह शांतिपूर्ण धरना उग्र आंदोलन में बदल सकता है। जिले के कई वरिष्ठ नागरिक और बुद्धिजीवी वर्ग भी पत्रकारों के इस आंदोलन के समर्थन में सामने आ रहे हैं।

यह मामला अब न केवल मीडिया की स्वतंत्रता का प्रश्न बन गया है, बल्कि पुलिस प्रशासन की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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