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छत्तीसगढ़

विष्णु के वन मंत्री केदार को पत्रकारों का खुला ख़त- ये अफसर आपको बदनाम कर देंगे सरकार!

छत्तीसगढ़ वन विभाग के एक रेंजर कैसे कितने पत्रकारों को चमका देते हैं सीखिए इनसे तरीका ..!

पता नहीं घमंड के कौन से ब्रांड वाला ये गांजा फूंक लेते हैं ..!!

वीडियो में गालियां हैं इसलिए सावधानी से सुनें ..!!!

https://x.com/kanhaiyaa/status/1860689299324191039?s=46

छत्तीसगढ़ | सीजी (Chattisgarh) के बीजापुर प्रेस क्लब के सदस्यों/पत्रकारों ने राज्य शासन के वन मंत्री माननीय केदार कश्यप को बाकायदा लिखित पत्र भेजकर राज्य में व्याप्त भ्रष्ट अफसरों को लेकर चेताया है. पत्रकारों ने खुले शब्दों में लिखा है कि वन विभाग में कार्यरत भ्रष्ट अफसरों पर अंकुश लगाइए, अन्यथा ये लोग आपकी इज्जत मिट्टी-पलीत कर देंगे. बदनाम कर देंगे, लंका लगा देंगे.

पत्र में क्या है, पहले लिखित में पढ़ें उसके बाद पत्र और उसमें लिखे के समर्थन में हस्ताक्षर नीचे देखें…


महोदय,

छत्तीसगढ़ में काबिज भाजपा सरकार को मोदी जी की गारंटी और सुशासन की सरकार की संज्ञा दी जाती है परंतु आपके ही विभाग में पदस्थ कुछ वन परिक्षेत्र अधिकारी सरकार की इस मंशा को मट्टी-पलीत करते हुए नजर आ रहे हैं.

आपकी सरकार में पत्रकारों के साथ सिर्फ बदसलूकी ही नहीं हो रही है बल्कि उन पर फर्जी मामले भी बनाए जा रहे हैं. हाल ही में बीजापुर जिले के भोपाल पटनम में पदस्थ वन परिक्षेत्र अधिकारी विनोद तिवारी से जुड़ा एक ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है, जहां पर वे विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने गए हुए पत्रकारों के साथ मां बहन की गाली देते और उनके साथ बदसलूकी करते हुए नजर आ रहे हैं.

पिछले तीन दिनों से यह खबर सोशल मीडिया, अखबारों और चैनलों में सुर्खियां बनी हुई है परंतु अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई होता हुआ नजर नहीं आ रहा है इससे ऐसा लग रहा है कि वन विभाग में भ्रष्टाचार करने वाले अफसर को सरकार संरक्षण देने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है. उक्त रेंजर के खिलाफ पहले भी भोपाल पटनम क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा भ्रष्टाचार के अलावा जंगलों को काटकर जमीन कब्जा करने जैसी शिकायत कर चुके हैं. तो वहीं दूसरी ओर उन पर भोपाल पटनम क्षेत्र में स्थित बेशकीमती इमारती लकड़ी और सागौन वृक्षों की कटाई और तस्करी में संलिप्त होने की खबरें भी आई थीं.

बावजूद कार्रवाई न होने के कारण रेंजर विनोद तिवारी स्वयं को डीएफओ या सरकार से कम नहीं समझते हैं.

महोदय, इस तरह के अफसर को आश्रय देना यानी कि सरकार के सुशासन पर और मोदी जी के गारंटी पर सवालिया निशान लगाना है।

महोदय, आपको पत्र लिखने के पीछे पत्रकारों की मंशा यह नहीं है कि हम विभाग के किसी अफसर की शिकायत कर रहे हैं परंतु हम यह चाहते हैं कि अगर प्रदेश में इस तरह के अफसर पर लगाम नहीं लगाया गया तो आगामी दिनों में यही अफ़सर आपकी सरकार को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.

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