ढूंढ़ने से मिलती है बड़ी खबर, मुझे मिली, आइए बताऊं कैसे

आज सुबह पहली नजर में कई अखबार पढ़ने के बाद लगा कि वाकई कोई बड़ी खबर नहीं थी। मैं पहले लिख चुका हूं कि इसी कारण सभी अखबारों ने अलग-अलग खबर को लीड बनाया है और ये कैसी खबरें हैं। जब दोबारा अखबार लेकर बैठा तो मेरे मन में यह सवाल उठा कि अगर मुझे एडिशन निकालना होता या लीड तय करना होता तो क्या करता। मेरे लिए मेरा ही सवाल मुश्किल था। जिन खबरों की चर्चा मैं कर चुका हूं उनमें से किसी को भी मैं लीड लायक नहीं मानता। टेलीग्राफ की खबर अपवाद है। मैं क्या करता? और खबरें ढूंढता। मैंने और अखबार देखने शुरू किए।

दैनिक भास्कर में ऊपर ही लिखा था, आज नो निगेटिव अखबार। समझ गया इसमें भी कुछ नहीं मिलना। मेरा मिजाज नो निगेटिव वाला नहीं है और अभी ऐसी स्थिति नहीं आई है कि निगेटिव खबरें बहुत कम होती हों और उन्हें छोड़ दिया जाए। भास्कर में एक खबर दिखी जो है तो दिल्ली के लिए ही लेकिन महत्वपूर्ण है। शीर्षक है, 15 साल पुरानी डीजल गाड़ी उठा लेगी परिवहन विभाग व एमसीडी की टीम। यह खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में भी लीड के बगल में प्रमुखता से छपी है। दिल्ली के लिए यह वाकई बड़ी खबर है। इसके बाद अमर उजाला में खबर मिली जो निश्चित रूप से लीड थी। पता नहीं मजबूरी में भी दूसरे अखबारों ने इसे लीड क्यों नहीं बनाया। अमर उजाला, इंडियन एक्सप्रेस में यह खबर कल थी और जब हिंसा व पलायन बढ़ा है तो निश्चित रूप से यह लीड थी। पर किसी और अखबार में लीड नहीं है।

इसके बाद मैंने राजस्थान पत्रिका का दिल्ली एडिशन देखा, इसमें बिहार के सुपौल की एक खबर लीड है। खबर है कि वहां हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों ने छेड़खानी का विरोध किया तो कई गुंडे बदमाश हॉस्टल में घुस आए और लड़कियों की बुरी तरह पिटाई की। ढेरों लड़कियां घायल हैं और अस्पताल में भर्ती है। सुशासन बाबू के राज में ऐसी घटना खासकर तब जब भाजपा को बिहार के जंगल राज से तकलीफ थी और अखबार वाले खूब छापते थे – निश्चित रूप से लीड होनी चाहिए। इसलिए भी कि अंतरात्मा की आवाज पर इस्तीफा देने वाले मुख्यमंत्री की अंतरात्मा अब आवाज नहीं लगाती है। स्थिति अलग तब होगी जब आपको सरकार और प्रधानमंत्री की तारीफ ही करनी हो। और दैनिक जागरण ने यही किया है। दैनिक जागरण ने देहरादून में निवेशक सम्मेलन के उद्घाटन की खबर को लीड बनाया है।

शीर्षक है, “चार साल में 10 हजार उपाय कर कारोबार आसान बनाया : मोदी”, दूसरी लाइन है, “कहा, बदल रहा है देश, अब विश्व के आर्थिक विकास का इंजन होगा भारत”। ऐसी खबर सूचना के लिए ठीक है। मजबूरी में भी लीड बनाने लायक नहीं है। इस हिसाब से आज की दो सर्वश्रेष्ठ खबरें हुईं, गुजरात से पलायन बढ़ा और सुपौल में छात्राओं के हॉस्टल पर हमला। यह खबर इंडियन एक्सप्रेस में भी पहले पेज पर है। इस खबर को लीड नहीं बनाने का एक ही कारण हो सकता है कि आप भाजपा के विरोध में नहीं छापना चाहते हैं। वरना ऐसी घटनाएं रोज नहीं होंतीं। और इसे महत्व नहीं देना था तो गुजरात से पलायन की खबर भी कम महत्वपूर्ण और मार्मिक नहीं है। पर उसकी भी उपेक्षा की गई। क्यों आप समझते हैं। राजस्थान पत्रिका में दोनों खबरें प्रमुखता से लगी हैं।

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक, संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट। संपर्क : anuvaad@hotmail.com



 

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