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सर्वोच्च न्यायालय के रुख से अखबार मालिकानों में हड़कंप, निर्णायक मोड़ पर मजीठिया आंदोलन, तोड़फोड़ के प्रयास तेज

नई दिल्ली/नोएडा। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना कर रहे अखबार मालिकानों में न्यायालय में 14 मार्च को हुई सुनवाई के बाद हड़कंप का माहौल है। अखबार मालिकानों को इस बात का कतई अन्दाजा नहीं था कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का रुख इतना सख्त होगा। अब अखबार मालिकानों की ओर से आंदोलित कर्मचारियों में तोड़-फोड़ के प्रयास तेज हो गए हैं।

नई दिल्ली/नोएडा। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना कर रहे अखबार मालिकानों में न्यायालय में 14 मार्च को हुई सुनवाई के बाद हड़कंप का माहौल है। अखबार मालिकानों को इस बात का कतई अन्दाजा नहीं था कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का रुख इतना सख्त होगा। अब अखबार मालिकानों की ओर से आंदोलित कर्मचारियों में तोड़-फोड़ के प्रयास तेज हो गए हैं।

दैनिक जागरण के नोएडा प्रबंधन द्वारा आंदोलित कर्मचारियों को तरह-तरह से भ्रमित किया जा रहा है। अखबार मालिकानों के गुर्गों की यह भी कोशिश है कि ऑफिस के अंदर काम कर रहे कर्मचारियों को इस आंदोलन में जाने से रोका जाये। क्योंकि विभिन्न अखबार प्रतिष्ठानों में कार्यरत कर्मचारियों को अदालत के आदेश के बाद यह पता चल गया है कि अब आंदोलित कर्मचारियों को उनका हक़ मिलने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसे में कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारी अपने हक़ के लिए बाहर आने की कोशिश करेंगे।

दो साल से मजीठिया वेज बोर्ड का हक़ पाने की लड़ाई लड़ रहे कर्मचारियों और उनके अधिवक्ताओं के अनुसार इस सुनवाई के बाद अपने हक़ के लिए संघर्ष कर रहे कर्मचारियों की जीत सुनिश्चित हो गयी है। ऐसे में कर्मचारियों को धैर्य और हिम्मत के साथ लड़ाई लड़नी होगी क्योंकि संघर्ष अब निर्णायक चरण में है। आंदोलित कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि वे बेहद सतर्क रहते हुए अपनी लड़ाई लड़ेंगे और अखबार मालिकानों को धूल चटाएंगे।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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