
नोएडा। नोएडा से हिंदी खबर चैनल में कार्यरत पत्रकार महेंद्र माही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विवादों में घिर गए हैं। उन पर आरोप लग रहा है कि नोएडा सेक्टर-18 मार्केट की एक दुकान को बिना किसी आधिकारिक जांच के “मिलावटी खाना बेचने वाला” करार देते हुए ट्वीट किया।
मामला सेक्टर-18 की सावित्री मार्केट से जुड़ा है, जहां चांदनी चौक के मशहूर पराठों की दुकान संचालित होती है। आरोप है कि पत्रकार महेंद्र माही ने बिना फूड विभाग की किसी जांच या फूड सैंपल टेस्ट के न सिर्फ उक्त दुकान, बल्कि उसी लाइन में मौजूद अन्य दुकानों को भी मिलावटी खाना बेचने वाला बता दिया और उनकी वीडियो X पर पोस्ट कर दी।
सोशल मीडिया पर उठे तीखे सवाल
इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
FakejournalistMahndrMahii ट्रेंड

विवाद के बाद X पर FakejournalistMahndrMahii हैशटैग ट्रेंड करने लगा, जिसमें अब तक हजार से अधिक यूजर्स अपनी प्रतिक्रियाएं दे चुके हैं। ट्रेंडिंग लिस्ट में यह हैशटैग तीसरे नंबर तक पहुंच गया। कई यूजर्स ने महेंद्र माही को “फेक जर्नलिस्ट” बताते हुए उनके आचरण और पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं।
पत्रकारिता की भूमिका पर बहस
इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर पत्रकारिता की जिम्मेदारी, नैतिकता और फूड से जुड़े आरोपों में आधिकारिक जांच की अनिवार्यता को लेकर भी बहस छेड़ दी है। लोग यह सवाल कर रहे हैं कि बिना प्रमाण और विभागीय पुष्टि के किसी व्यवसाय को सार्वजनिक रूप से बदनाम करना कितना उचित है।
फिलहाल, मामले में न तो फूड विभाग की कोई आधिकारिक जांच सामने आई है और न ही संबंधित पत्रकार की ओर से इन आरोपों पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया दी गई है।
https://twitter.com/i/status/2008233265128501319
इस प्रकरण पर आरोपी पत्रकार महेंद्र माही की तरफ़ से जो भेजा गया है उसे पढ़िए-
जब कोई व्यक्ति जनता के हित में काम करता है तो उसके कई दुश्मन बन जाते हैं। ख़ास तौर पर अपने ही लोग उसके पीछे लग जाते हैं।
देश में इस समय सबसे बड़ी समस्या मिलावट की है और इससे देश का युवा सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहा है। मैंने बड़ी ईमानदारी से इस मुद्दे को उजागर किया। इसके बाद नोएडा का खाद्य विभाग जागा और नोएडा के सेक्टर 18 में एक के बाद एक 27 दुकानों का निरीक्षण किया, जहाँ गंदगी का अंबार देखने को मिला।
खाद्य विभाग ने कई दुकानों को नोटिस जारी किए और तीन दिनों के भीतर सुधार का अवसर दिया। आदेशों का पालन न करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई और लाइसेंस निरस्त करने की बात कही गई।
अगर यह ख़बर केवल किसी एजेंडे के तहत होती, तो खाद्य विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता। ख़बर में दम था, मजबूती थी, इसी वजह से विभाग को एक्शन लेना पड़ा। सभी दुकानदारों को नोटिस और वार्निंग दी गई।
सच्चाई सामने आने के डर से एक प्रोपेगेंडा रचा गया, ताकि मैं अपनी ख़बर हटा लूँ। लेकिन सच आपके सामने है। खाद्य विभाग ख़ुद बता रहा है कि चारों ओर कितनी गंदगी फैली हुई है।






