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मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दिए बिना रिटायर करने पर भास्कर वालों को नोटिस भेजा

आदरणीय यशवंतजी, मैं दैनि​क भास्कर सागर संस्करण में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर पदस्थ हूं। मैंने मजीठिया वेज बोर्ड में तहत भास्कर प्रबंधन को एक नोटिस दिया है। अभी तक प्रबंधन ने इस पर ​कोई संज्ञान नहीं लिया है। मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दिए बिना कंपनी ने 4 अक्टूबर को मेरा रिटायरमेंट तय कर दिया।

आदरणीय यशवंतजी, मैं दैनि​क भास्कर सागर संस्करण में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर पदस्थ हूं। मैंने मजीठिया वेज बोर्ड में तहत भास्कर प्रबंधन को एक नोटिस दिया है। अभी तक प्रबंधन ने इस पर ​कोई संज्ञान नहीं लिया है। मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दिए बिना कंपनी ने 4 अक्टूबर को मेरा रिटायरमेंट तय कर दिया।

मैंने कंपनी से मजीठिया का लाभ दिए जाने के लिए की मांग की लेकिन कंपनी ने सुनवाई नहीं की। इसके बाद मैंने रिटायरमेंट के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। मैंने कंपनी के खिलाफ माननीय सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। कृपया इस संबंध में उचित मार्गदर्शन दें ताकि मुझ ​सहित अन्य साथियों के साथ न्याय हो सके। कंपनी को दिए नोटिस की प्रति अटैच कर रहा हूं कृपया प्रकाशित कर कृतार्थ ​कीजिएगा।

मनमोहन श्रीवास्तव

डिप्टी न्यूज एडिटर
दैनिक भास्कर, सागर मप्र
09926002305

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1 Comment

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  1. journalist

    November 25, 2014 at 12:25 pm

    आदरणीय यशवंत जी, समाजसेवा, नैतिकता और सद्व्यवहार सिखाने का दावा ​करने वाला तथा​कथित नंबर एक अखबार दैनिक भास्कर में इस समय काफी खलबली का माहौल है। हालात ये है कि कर्मचारी आपस में ही गुत्थम गुत्था हो रहे हैं। पिछले दिनों दैनिक भास्कर के सागर संस्करण में जो हुआ उससे मीडिया जगत ही शर्मसार है।जानकारी के अनुसार करीब चार दिेन पूर्व रात्रि डेढ़ बजे के लगभग न्यूज एडिटर संजय पांडे ने सभी सीमाएं तोडते हुए एक पेजमेकर कम सब एडिटर से भारी गाली गलौच की, बात मारपीट तक जा पहुंची। अन्य कर्मचारियों ने बीच बचाव कर मामला शांत कराया। इस घटना की शिकायत उच्च प्रबंधन तक प​हुंची लेकिन किसी के कान में जूं तक नहीं रेंगी। कर्मचारी काफी प्रताडित है तथा मानसिक संताप झेल रहा है। अंधेर नगरी चौपट राजा यानि संपादक धृतराष्ट बन अपने ‘संजय’ के बचाव में लगा हुआ है। अंदर के हालात बेहद खराब हो रहे हैं लेकिन कहीं सुनवाई नहीें हो रही है। पांडे से ​कई कर्मचारी प्रताडित हैं लेकिन नौकरी जाने के भय से मौन धारण किए हुए हैं। लावा अंदर ​ही अंदर खदक रहा है ​कब फूट जाए कहा नहीं जा सकता।
    एक कर्मचारी का मेल

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