अखबार मालिकों के संगठन ‘आईएनएस’ की मांग- पत्रकारों के लिये वेतनबोर्ड की व्यवस्था खत्म हो

बेंगलुरु : देश के समाचारपत्रों के सबसे बड़े संगठन इंडियन न्यूज़पेपर्स सोसाइटी (आईएनएस) ने सरकार से अपील की कि वे प्रिंट मीडिया की आर्थिक व्यवहार्यता के लिये अखबारों के पत्रकार एवं गैरपत्रकार कर्मियों के लिये वेतनबोर्ड की प्रणाली समाप्त कर दे और सरकारी विज्ञापनों की दरों में वृद्धि करे. आईएनएस की 76वीं वार्षिक महासभा को संबोधित करते हुए संगठन के अध्यक्ष किरण बी वडोदरिया ने कहा कि सरकार को प्रिंट मीडिया की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये सकारात्मक कदम उठाने चाहिये. मजीठिया वेतनबोर्ड की सिफारिशों के कारण वेतन में असहनीय वृद्धि और सरकारी विज्ञापनों के बजट में कटौती के कारण देश के तमाम छोटे एवं मझोले प्रकाशनों के बंद होने का खतरा पैदा हो गया है. श्री वडोदरिया ने कहा कि दशकों पुरानी वेतन निर्धारित करने की संवैधानिक प्रणाली को जारी रखने की कोई आवश्यकता नहीं है.

सलाखों के भय से ‘चंडीगढ़ इंडियन एक्सप्रेस’ ने मजीठिया आधा-अधूरा लागू किया, …लेकिन भास्कर कर्मियों का क्या होगा?

सबके दुख-सुख, विपदा-विपत्ति, परेशानी-मुसीबत, संकट-कष्ट, मुश्किल-दिक्कत, आपत्ति-आफत आदि-इत्यादि को अपनी कलम-लेखनी, कंप्यूटर के की-बोर्ड से स्टोरी-आर्टिकल, समाचार-खबर की आकृति में ढाल कर अखबारों, समाचार पत्रों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की अनवरत मशक्कत-कसरत करने वाले मीडिया कर्मियों को अपने ही गुजारे के लिए मिलने वाली पगार अमृत समान हो गई है। हां जी, अमृत समान! मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुतियों को लेकर अखबारों के कर्मचारियों और मालिकान के बीच चल रही लड़ाई शायद इसी पौराणिक कथा का दूसरा, पर परिवर्तित रूप लगती है।

मजीठिया वेज बोर्ड देने में महाराष्ट्र के दूसरे सबसे बड़े समाचार पत्र समूह ने गड़बड़ी-धोखाधड़ी की!

यशोभूमि (हिंदी), पुण्यनगरी (मराठी), मुंबई चौफेर (मराठी), आपलं वार्ताहर (मराठी), कर्नाटक मल्ला (कन्नड़) का प्रकाशन करने वाले तथा अपने आपको महाराष्ट्र का दूसरा सबसे बड़ा समाचार पत्र समूह बताने वाले संस्थान अंबिका ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशनुसार मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन गणना करते समय गड़बड़ी की है. कंपनी द्वारा वेज बोर्ड के मुद्दे पर उदासीनता दिखाने पर लंबे समय तक इंतजार करने के बाद पत्रकारों ने कामगार आयुक्त के यहां शिकायत दर्ज कराई थी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार वेतन दिलवाने का आग्रह किया था। जिस पर आयुक्त ने अंबिका ग्रुप से इस बारे में जबाब मांगा था। अंबिका ग्रुप ने 30 अक्टूबर को कामगार आयुक्त के यहां पत्र देकर आश्वस्त किया था कि वह इसी माह से कोर्ट के निर्देशानुसार निर्धारित वेतन देने लगेंगे और एरियर का भी भुगतान इसी वर्ष कर देंगे।

मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दिए बिना रिटायर करने पर भास्कर वालों को नोटिस भेजा

आदरणीय यशवंतजी, मैं दैनि​क भास्कर सागर संस्करण में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर पदस्थ हूं। मैंने मजीठिया वेज बोर्ड में तहत भास्कर प्रबंधन को एक नोटिस दिया है। अभी तक प्रबंधन ने इस पर ​कोई संज्ञान नहीं लिया है। मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दिए बिना कंपनी ने 4 अक्टूबर को मेरा रिटायरमेंट तय कर दिया।

सिर्फ 5000 रुपये में काम कर रहे हैं दैनिक जागरण, लखीमपुर के रिपोर्टर

दैनिक जागरण लखीमपुर ब्‍यूरो आफिस में इन दिनों संवाददाताओं / रिपोर्टरों का जमकर शोषण हो रहा है… बेहद कम पैसे में ये लोग काम करने पर मजबूर हैं.. प्रबंधन की तरफ से वेतनमान बढाने का झांसा काफी समय से दिया जा रहा है… बार वादा हर बार वादा ही साबित हो रहा है… बेरोजगारी के कारण रिपोर्टर चुपचाप मुंह बंद कर काम कर रहे हैं.. कोई आवाज नहीं उठाता क्योंकि इससे उन्हें जो कुछ मिल रहा है, वह भी मिलना बंद हो जाएगा…

CM Okram Ibobi hums Majithia Wage Board tune

IMPHAL : The mandatory tripartite committee comprising of working journalists, publishers and Government representatives has already been formed and the State Government is fully committed to implement the Justice Majithia Wage Board in the State, said Chief Minister Okram Ibobi while speaking at the inaugural function of the three-day National executive meeting of the Indian Journalists Union (IJU) at the banquet hall of 1st Manipur Rifles today.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए भी वेज बोर्ड गठित करने की मांग

मुंबई : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडवणीस से प्रिंट मीडिया की तर्ज पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी एक वेज बोर्ड के गठन की माँग की गई है। मुंबई मराठी पत्रकार संघ के उपाध्यक्ष एवं टीवी जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सदस्य शशिकांत सांडभोर ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडवडीस से लिखित रूप से माँग की है इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों का आर्थिक शोषण रोकने के लिए जिस तरह से प्रिंट मीडिया में मजीठिया वेज बोर्ड का गठन किया गया है। वैसे ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी एक “वेज बोर्ड” का गठन किया जाये।