
इलेक्टोरल बॉन्ड मामले को लेकर चर्चा में आई मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) का एक नया घालमेल सामने आया है. जिसका आरोप चीन पर लगा है.
दरअसल, बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (BEST) की तरफ से मेघा इंजीनियरिंग की सहायक कंपनी एवेट्रांस प्राइवेट लिम्टेड को अगस्त 2023 में 2100 इलेक्ट्रिक बसों की सप्लाई का आर्डर दिया था. लेकिन कंपनी अब तक मात्र 185 बसों की आपूर्ति ही कर सकी है.
अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में एक आरटीआई के हवाले से मिली जानकारी के बेस पर लिखा गया है कि, बृहन्मुंबई नगर निगम, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और बेस्ट द्वारा उपलब्ध कराए आंकड़ों से पता चला कि बीएमसी ने इलेकट्रिक वाहनों की खरीद के लिए बेस्ट को 493 रुपये दिए थे. इनमें से बेस्ट ने एवेट्रांस प्राइवेट लि. को टोकन मनी के रूप में 205.8 करोड़ रुपये दिए गए थे.
आपूर्ति में लेटलतीफी के सवाल पर, बेस्ट के महाप्रबंधक अनिल दिग्गिकर ने बताया कि, “आपूर्तिकर्ता ने स्पेयर पार्ट्स से संबंधित कुछ मुद्दों का हवाला दिया है, जिससे बसों के निर्माण पर असर पड़ा है, आपूर्ति में भी इसीलिए देरी हुई. हमने उन्हें पिछले साल एक नोटिस भेजा था, उसके बाद आगे भी नोटिस भेजा है. हमने कुल तीन नोटिस अब तक भेजे हैं, जिसमें सबसे लैटेस्ट नोटिस अप्रैल 2024 को भेजा है.”
वहीं, ईवेट्रांस के प्रवक्ता ने कहा, “मुख्य समस्या बैटरी के निर्माण हेतु पार्ट्स मैनेज करना है. हमारी ईवी बसों में, बैटरी को चेसिस में रखा जाता है, और विनिर्माण लागत का 60 प्रतिशत इसके पीछे चला जाता है. भारत-चीन तनाव के कारण हमें चीन से आवश्यक कच्चा माल नहीं मिल सका, जिससे उत्पादन में देरी हुई.”

पामिरेड्डी पिची रेड्डी और पीवी कृष्णा रेड्डी द्वारा संचालित मेघा कंपनी चुनावी बॉन्ड का सबसे बड़ा खरीददार था, जिसने अप्रैल 2019 और अक्तूबर 2023 के बीच कई विंडो में नियमित बॉन्ड खरीदे. 966 करोड़ रुपये के कुल चुनावी बॉन्ड में से अधिकतम यानी 584 करोड़ बीजेपी के पास गए थे. हालांकि मेघा की सहायक कंपनी एवेट्रांस को इससे पहले मई 2022 में बेस्ट द्वारा सप्लाई का ऑर्डर दिया गया था.
आरटीआई डेटा से पता चलता है कि 2022 में कंपनी ने बेस्ट को 20 बसें डिलीवर की थीं, 2023 में 72 बसें भेजी गईं, इस वर्ष 4 जुलाई तक 93 बसें एवेट्रांस द्वारा डिलीवर की गईं.
टेंडर की शर्त क्या थी?
अनुबंध का लेटर जारी होने के 6 महीने के भीतर 25 प्रतिशत बसें भेजी जानी थी. अगली 25 प्रतिशत बसों की आपूर्ति अनुबंध जारी होने के 12 महीने के भीतर और बाकी 50 प्रतिशत बसें भी इसी दरम्यान डिलीवर करती थीं. निविदा के अनुसार बसों की आपूर्ति में देरी पर प्रतिदिन 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा आपूर्ति करने में विफल रहने पर बेस्ट के पास अनुबंध रद्द करने का अधिकार भी है.
बेस्ट के एक अधिकारी ने आपूर्ति में देरी और जुर्माना संबंधित सवाल के जवाब में कहा कि, यह केवल 2100 बसों की पूरी खेप हमें प्राप्त होने के बाद ही लगाया जा सकता है. वहीं बाकी की बकाया राशि पर अधिकारी ने जवाब दिया, 205 करोड़ रुपये की राशि भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार बसों की आपूर्ति के लिए एवेट्रांस को एक टोकन के रूप में भूगतान की गई है, शेष बकाया धनराशि बेस्ट के पास मौजूद है.



