नई दिल्ली: वरिष्ठ पत्रकार और द स्टेट्समैन के पूर्व संपादक एम.एल. कोटरु का 25 सितंबर को 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। कोटरु ने छह दशकों तक निडर रिपोर्टिंग, संपादकीय ईमानदारी और यादगार किस्सों की धरोहर छोड़ी। उन्हें भारतीय पत्रकारिता का स्तंभ माना जाता था। कश्मीर से उनका गहरा जुड़ाव था और उन्होंने वहां के सामाजिक-राजनीतिक हालात पर संवेदनशीलता के साथ लिखा।
एम.एल. कोटरु द स्टेट्समैन के दिल्ली संस्करण में न्यूज़ एडिटर रहे और द संडे टाइम्स ऑफ लंदन के भारत संवाददाता भी रहे। उनकी किताबों में द कश्मीर स्टोरी (1994) और एशिया ’72: ऑफिशियल गाइड (बेनॉय सरकार के साथ सह-लेखन) शामिल हैं।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के 45वें सदस्य और बाद में महासचिव रहे कोटरु वहां की “स्वर्णिम यादों” को अक्सर साझा करते थे।
कश्मीरी कलाकार वीर मुंशी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी— “अलविदा, कोटरु साहब… आप हमेशा अपने किस्सों और बेमिसाल अनुभवों के लिए याद किए जाएंगे।” उन्होंने कोटरु का एक स्केच भी बनाया।
वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद सईद मलिक ने उन्हें “पत्रकारिता का उस्ताद, प्यारे इंसान और मार्गदर्शक” बताया। वहीं, पत्रकार बंसी रैना ने कहा कि “दिल्ली में रहते हुए भी वे अक्सर श्रीनगर आते थे और अपनी विश्लेषणात्मक व खोजी पत्रकारिता के लिए बेहद लोकप्रिय थे।”
1990 के दशक की उथल-पुथल में कोटरु ने साहस के साथ कश्मीर की रिपोर्टिंग की। ग्रेटर कश्मीर में उनके आलेख तीखे और निष्पक्ष विश्लेषण के लिए चर्चित रहे।
1959 में उन्हें ‘द स्टेट्समैन’ में प्रकाशित लेखमाला “द अदर साइड” के लिए वतुमुल फाउंडेशन (हवाई) का वतुमुल पुरस्कार मिला था।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने एक्स पर लिखा— “एम.एल. कोटरु का निधन पत्रकारिता के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने पीढ़ियों को मार्गदर्शन दिया। हम उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।”
उनकी स्मृति में प्रार्थना सभा रविवार, 28 सितंबर को आर्य समाज मंदिर, ग्रेटर कैलाश-1 (नई दिल्ली) में यज्ञशाला, दूसरी मंजिल पर सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित होगी।



