मुंबई- महाराष्ट्र विधानसभा परिसर में एक पत्रकार से मारपीट को लेकर राजनीतिक और पत्रकारिता जगत में भारी आक्रोश है। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड द्वारा एक पत्रकार को थप्पड़ मारने की घटना सामने आने के बाद मुंबई प्रेस क्लब ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एवं विधानसभा अध्यक्ष राहुल नारवेकर से कठोर कार्रवाई की मांग की है।
यह मामला तब सामने आया जब भाजपा विधायक नितेश राणे ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें आव्हाड को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता अंबादास दानवे से बातचीत के दौरान एक पत्रकार को थप्पड़ मारते हुए देखा गया। हालांकि वीडियो कब का है, यह स्पष्ट नहीं हो सका है।

मुंबई प्रेस क्लब ने इस घटना को “शर्मनाक” बताते हुए कहा कि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि द्वारा ऐसा व्यवहार न केवल लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि विधानसभा सत्र के दौरान रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रेस क्लब का बयान- “विधानसभा परिसर एक लोकतांत्रिक स्थान है जहां पत्रकारों को बिना डर और दबाव के रिपोर्टिंग करने का अधिकार है। इस तरह की हिंसा न केवल प्रेस की स्वतंत्रता का उल्लंघन है, बल्कि पूरे पत्रकार समुदाय को डराने का एक खतरनाक संकेत भी है,” प्रेस क्लब ने अपने बयान में कहा।
संस्था ने सभी पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की और स्पष्ट कहा, “किसी भी जनप्रतिनिधि को पत्रकार पर हाथ उठाने का अधिकार नहीं है। हम अपने साथी पत्रकार के साथ खड़े हैं और ऐसे हमलों का पुरज़ोर विरोध करते हैं।”
आव्हाड पर केस दर्ज
इस घटना के अलावा, विधानसभा परिसर में एक दिन पहले हुए भाजपा और एनसीपी कार्यकर्ताओं के बीच टकराव के बाद आव्हाड पर पुलिस कार्य में बाधा पहुंचाने का केस दर्ज किया गया है। खबरों के अनुसार, पुलिस ने उनके समर्थक नितिन देशमुख को हिरासत में लिया था, जिसके विरोध में आव्हाड ने देर रात करीब 2 बजे धरना शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस भाजपा विधायक गोपीचंद पडालकर के समर्थकों के प्रति नरमी बरत रही है, जबकि उनके सहयोगी को गिरफ्तार किया गया।
विधानसभा में विजिटर्स पर रोक
इस पूरे घटनाक्रम के बाद विधानसभा अध्यक्ष राहुल नारवेकर ने मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में विजिटर्स की एंट्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा, “नितिन देशमुख और पडालकर के अतिथि सरजे राव टकले के व्यवहार ने विधानमंडल की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। मामला विशेषाधिकार समिति को सौंपा जा रहा है और पुलिस शिकायत भी दर्ज होगी।”
इसके साथ ही विधानसभा में विधायकों की नैतिकता पर निगरानी रखने के लिए एक एथिक्स कमेटी गठित करने की घोषणा की गई है, जो जरूरत पड़ने पर सदस्यों की सदस्यता रद्द करने की भी सिफारिश कर सकती है। नारवेकर ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिया है कि वे विधानसभा परिसर में बैठकें न करें और सभी औपचारिक बातचीत राज्य सचिवालय में ही हो।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आव्हाड के खिलाफ सरकार और विधानसभा अध्यक्ष क्या कार्रवाई करते हैं, और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कौन-से व्यावहारिक कदम उठाए जाते हैं।



