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दिल्ली धमाके के बीच PM मोदी क्या अडानी सेठ का फायदा कराने भूटान गए हैं? उठे सवाल

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली शनिवार को धमाकों से दहली, 10 लोगों की मौत हो गई और करीब दो दर्जन लोग घायल हैं। चांदनी चौक इलाके के पास हुए इस भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। चश्मदीदों के मुताबिक धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास की दुकानों के शीशे तक टूट गए। पुलिस, फॉरेंसिक टीम और एनएसजी ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।

बहरहाल, अभी तक धमाके की वजहों का आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है।

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूटान दौरे पर निकल गए हैं — इसे लेकर विपक्ष और सोशल मीडिया यूजर्स सवाल दाग रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री अडानी सेठ के पॉवर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की कवायद करने भूटान यात्रा पर गए हैं।

बताते चलें कि 6 सितंबर 2025 को प्रकाश में आया यह वही समझौता है जिसके तहत दोनों कंपनियां 570 मेगावाट की वांगछू हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना को मिलकर विकसित करेंगी। इस प्रोजेक्ट में लगभग 6,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा। समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे और अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी मौजूद थे।

दिल्ली में जब धुएं और डर का साया पसरा हुआ है, उस वक्त प्रधानमंत्री भूटान यात्रा और फोटो सेशन में व्यस्त हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि “देश की राजधानी में खून और डर है, लेकिन पीएम को ‘मित्रों’ के समझौते की चिंता है।”

विपक्ष ने भी पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है कि जब देश की जनता मुश्किल में है, तब प्रधानमंत्री विदेश में “कॉर्पोरेट डील्स को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।” कांग्रेस नेताओं ने इसे “मित्र पूंजीवाद का चरम उदाहरण” बताया है।


पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला एक्स पर लिखते हैं-

गौतम अडानी के भूटान में अरबों के तीन महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट शुरू होने हैं

  1. 570 MW वांगचू जलविद्युत प्रोजेक्ट (6000 करोड़)
  2. 2. 5,000 MW हाइड्रोपावर विकास के लिए MoU (50,000 करोड़)
  3. गेलेपू माइंडफुलनेस सिटी में चर्चा

लगभग 8.4 लाख करोड़। देश की राजधानी में इतना बड़ा आतंकवादी हमला होने के बाद भी प्रधानमंत्री का भूटान दौरा क्यों हुआ है?आप समझदार हैं तो समझ जाइए।


भगतराम ने लिखा है-

दोस्तों के कुछ काम ऐसे होते हैं, जिन्हें हर हाल में करना पड़ता है। सच्चा दोस्त वही होता है, जो दोस्त के लिए दिन देखे ना रात, समय देखे ना हालात! किसी भी वक़्त कहीं भी जाने को तैयार रहे।


पत्रकार रणविजय सिंह लिखते हैं-

भूटान में अडानी का बिजनेस बहुत बढ़ा है. देखरेख में मुश्किल होती होगी. समय-समय पर अडानी ग्रुप के कर्मचारियों को वहां भेजना पड़ता होगा.


इधर भारत की राजधानी दिल्ली ब्लास्ट के मामले में सरकार की ओर से इस पर कोई औपचारिक बयान नहीं आया है, हालांकि पीएमओ सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री को धमाके की जानकारी दे दी गई है और वे “स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।”

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