बीते कुछ समय से देश में जिस तरह की राजनीति हो रही है वह भारत के हित में तो कम से कम नहीं ही दिख रही है। प्रधानमंत्री की अगुवाई में उनके मंत्री, सांसद जो भद्द पिटवा रहे हैं उससे हर तरफ गलत संदेश जा रहा है। मोदीजी हर बात को इवेंट में बदलकर मीडिया के जरिए जो डंका बजाते हैं उसका बुलबुला देर सबेर फूट ही जाता है। रही बची कसर एआई समिट आयोजन में हुई विश्वव्यापी बदनामी ने पूरी कर दी है…
प्रशांत टंडन-
कोई पॉलिटिकल करियर बर्बाद करने की धमकी दे रहा है तो कोई मज़ाक बना रहा है. फैसले सिर्फ अमेरिका कर रहा ही नहीं रहा है उनकी एकतरफा घोषणा भी खुद करता है. कॉर्पोरेट का फुलाया गुब्बारा अब पिचकने लगा है. मोदी की छवि जहां पहुँच गई है वहां से रिकवरी अब मुश्किल है.
कृष्ण कांत-
“मुझे नहीं पता था कि स्टेज पर क्या हो रहा है। मैं कन्फ्यूज़ था। उन्होंने (मोदी) मेरा हाथ पकड़ लिया और मैं सोच रहा था कि हमें क्या करना चाहिए।”- सैम ऑल्टमैन, CEO, OpenAI
ऐसा डंका बजा रहे हैं, रोज बेइज्जती करा रहे हैं।
शीतल पी सिंह-
दिल्ली में चले AI impact summit में आए एक अमेरिकी techno enthusiast (Peter Girnus) की आयोजन के बारे में X पर टिप्पणी का अनुवाद।

“यहाँ भारत के AI Impact Summit से लाइव अपडेट्स हैं-
- 100 अरब डॉलर का वादा किया गया।
- 70,000 लोग आए थे।
- मुख्य विषय था – भविष्य।
कुछ बड़ी बातें:
- बिल गेट्स नहीं आए (एपस्टीन कनेक्शन की वजह से)।
- एन्विडिया के CEO जेन्सन हुआंग बीमार होने से कैंसल हो गए।
- एक यूनिवर्सिटी ने 1,600 डॉलर वाला चीनी रोबोट डॉग दिखाया और कहा कि ये हमारा अपना आविष्कार है। नाम रखा – ओरियन। उसी यूनिवर्सिटी ने कोरियाई ड्रोन सॉकर एरिना भी फेक दिखाया। बाद में यूनिवर्सिटी ने कहा – प्रोफेसर कैमरे के जोश में आ गए थे।लेकिन IT मंत्री ने पहले ही ट्वीट करके बधाई दे दी थी।
- पहले दिन ही एक प्रदर्शक के AI पहनने वाले गैजेट्स (वेयरेबल्स) चोरी हो गए।
- कई प्रदर्शकों को उनके अपने स्टॉल में बंद कर दिया गया। उन्हें लगा जैसे जेल में हैं। पानी नहीं था। वाई-फाई काम नहीं कर रहा था।डिजिटल पेमेंट फेल हो गए। खाने-पीने वाले सिर्फ नकद ले रहे थे।
- प्रधानमंत्री ने OpenAI और Anthropic के CEOs से हाथ पकड़कर फोटो खिंचवाई।उन्होंने सैम ऑल्टमैन का हाथ पकड़कर ऊपर उठाया। ऑल्टमैन और अमोदेई ने मुट्ठी ऊपर की, लेकिन हाथ नहीं मिलाया। कुछ दिन पहले Anthropic ने सुपर बाउल में विज्ञापन चलाए थे – जिनमें लिखा था: ‘धोखा’, ‘विश्वासघात’, ‘धोखेबाजी’। ऑल्टमैन ने कहा: “मुझे लगा ये ओपन क्लॉक है।”
- सैम ऑल्टमैन ने वादा किया – 2028 तक सुपरइंटेलिजेंस आ जाएगा।
- लोग वेन्यू से निकलने के लिए मीलों पैदल चले।कोई बस नहीं थी।
यही है वो भविष्य।” (ये गिरोह नेहरू को ख़ारिज करने निकला है)


