
संजय कुमार सिंह
आज के अखबारों की मानें तो बुलडोजर न्याय के डबल इंजन वाले शासन में बाबा सिद्दीक की हत्या की जिम्मेदारी जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई (अमर उजाला) ने ली है। पुलिस इस हत्याकांड में उसके शामिल होने की जांच कर रही है (टाइम्स ऑफ इंडिया) और शक की सुई उसी की ओर इशारा करती है (इंडियन एक्सप्रेस)। अखबारों में किसी ने शीर्षक में यह नहीं बताया है कि हत्या के शक में गिरफ्तार तीन युवकों में दो उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के एक ही गांव से हैं। इनमें एक का नाम धर्मराज राजेश कश्यप (19) और शिव कुमार गौतम (24) है। तीसरा हरियाणा का गुरमैल बलजीत सिंह (23) है। द टेलीग्राफ में यह खबर तीन कॉलम की लीड है। चार कॉलम का फ्लैग शीर्षक है, बॉलीवुड के पसंदीदा राजनीतिज्ञ की हत्या में लॉरेंस गैंग संदिग्ध। इसके साथ सिंगल कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, काम की तलाश में बहराइच से पुणे तक। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, पुलिस कुछ ऐसे लीड पर काम कर रही है जिससे संकेत मिलता है कि बाबा सिद्दीक की हत्या पैसे देकर करवाई गई है। और यह काम जेल में बंद गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई के इशारे पर किया गया है। यह अपने नेटवर्क का उपयोग युवाओं को किराये पर लेने के लिए करता है। इस मामले में दो का कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है और इन्हें काम करने के लिए परिष्कृत हथियार उपलब्ध कराये गये थे।
टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का उपशीर्षक है, तीसरे की गिरफ्तारी पोस्ट में हत्या की जिम्मेदारी लेने के बाद हुई। खबर में बताया गया है, अकोला में रहने वाला शुभम लोनकर जनवरी में आर्म्स ऐक्ट के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। उसने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालकर सि्ददीक की हत्या में बिश्नोई गैंग का जुड़ा होना बताया। इसमें कहा गया था कि बाबा सिद्दीक की हत्या का कारण यह है कि वे अभिनेता सलमान खान के करीबी और उनका दाउद इब्राहिम से कथित संबंध है। खबर के अनुसार शुभम फरार है और उसके भाई प्रवीण (28) को पुणे से साजिश और हत्या के आरोप में नाम दर्ज करने के लिए गिरफ्तार किया गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार शूटर शिवकुमार गौतम (24) फरार है और एक चौथा संदिग्ध भी है जिसके बारे में समझा जा रहा है कि उसने इन तीनों की ओर से ठेका लिया था।
मुंबई डेटलाइन से द टेलीग्राफ की खबर इस प्रकार है, पुलिस ने बताया कि उत्तर प्रदेश के दो बेरोजगार किशोरों और हरियाणा के 23 वर्षीय युवक ने शनिवार को मुंबई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) के नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने दो संदिग्ध हत्यारों – गुरमेल बलजीत सिंह और धर्मराज राजेश कश्यप (19) को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बताया कि वे क्रम से हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हैं। हालांकि, कश्यप ने अदालत में दावा किया है कि वह नाबालिग है। तीसरे आरोपी शिव कुमार गौतम, 19, को खोजने और गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीमों को महाराष्ट्र से बाहर भेजा गया है, जिसके बारे में माना जाता है कि वह भी उत्तर प्रदेश का है। उत्तर प्रदेश पुलिस के सूत्रों ने बताया कि कश्यप और गौतम का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और वे नौकरी की तलाश में पुणे गए थे। पुलिस एक सोशल मीडिया पोस्ट की पुष्टि कर रही है जिसमें लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के एक कथित सदस्य ने हत्या की जिम्मेदारी ली है।
द टेलीग्राफ में लखनऊ डेटलाइन से पीयूष श्रीवास्तव की खबर है, उत्तर प्रदेश के पुलिस और राजस्व अधिकारियों की एक टीम रविवार को गंदारा गांव में कश्यप और गौतम के घरों पर यह पता लगाने के लिए पहुंची कि उनके परिवार अपनी जमीन पर रहते हैं या अवैध रूप से रह रहे हैं। एक लेखपाल ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “हमें नहीं पता कि हमें यहां क्यों भेजा गया है, लेकिन हमारा काम यह पता लगाना है कि उनकी संपत्ति वैध है या नहीं।” उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार अपराध के आरोपी लोगों की संपत्तियों को अवैध घोषित करने के बाद उन्हें ध्वस्त करने के लिए जानी जाती है – एक ऐसी प्रथा जिस पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में रोक लगा दी है। खबर के अनुसार दोनों युवकों के परिवार के लोगों ने कहा कि उन्हें नहीं पता है कि वे दोनों कब और क्यों मुंबई पहुंचे।” कहने की जरूरत नहीं है कि हत्या जिसने भी करवाई हत्या करने के लिए मध्यमवर्गीय परिवार के हिन्दू युवाओं को चुना जो बेरोजगार भी हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि कमाई न हो तो आदमी जो काम मिलता है उसी को करने के लिए मजबूर होता है और ऐसे काम की सजा जेल जाना हो तो आगे के लिए भी कमाने की चिन्ता खत्म हो जाती है। यह आदर्श स्थिति नहीं है लेकिन बेरोजगारी में यह किसी को पसंद आ सकता है और मौका मिले तो अपरिपक्व युवा ऐसी पेशकश स्वीकार कर सकते हैं।
यह समाज की हालत है और हत्या का एक पक्ष यह भी है। बाकी तो हत्या का कारण कुछ भी हो सकता है लेकिन जब सभी अखबारों ने खबर दी है कि एक गिरोह के शामिल होने का संदेह या दावा है तो मुद्दा यह है कि उसने बेरोजगार युवको को हत्या जैसे अपराध में लगा दिया या जेल से यह सब कर पाया। यह पुलिस प्रशासन की कमजोरी है और इसे हाइलाइट किये जाने की बजाय खबरें ऐसे प्रस्तुत की गई है जैसे किसी गैंगस्टर ने हत्या करवा दी तो क्या किया जा सकता है। हत्यारे पकड़ ही लिये गये हैं अब कोई खास बात नहीं है। दूसरी ओर, कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में हत्या और बलात्कार के मामले में भी अपराधी गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस का ही आदमी था लेकिन वहां अपराध को जबरन गंभीर बताया गया और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से अपराध को भयावह बताने की कोशिश संघ समर्थक एंकर पत्रकार ने न सिर्फ खबर से बल्कि एक्स पर पोस्ट से भी करने की कोशिश की। अब मामला यह है कि जेल में बंद एक गैंगस्टर जेल से ही अपना काम कर रहा है, बेरोजगार (हिन्दू) युवकों को पैसे देकर हत्या जैसा अपराध करवा रहा है। पुलिस वारदात से पहले कुछ पता नहीं लगा पाई पर मामला ऐसे पेश किया गया है जैसे रूटीन हो और कार्रवाई चल रही है।
इसका पता शीर्षक से ही लगता है। हिन्दुस्तान टाइम्स में शीर्षक है, बाबा का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान से, पुलिस सुराग तलाश रही है। एक बॉक्स में हत्या से संबंधित कुछ बातें हाइलाइट की गई हैं। इनमें पकड़े गये या फरार युवकों की उम्र नहीं लिखी है और ना यह लिखा है कि ये बेरोजगार युवा हैं। दो यूपी के और एक हरियाणा का जरूर लिखा है। इन तथ्यों का शीर्षक है, अभी तक जो पता है। इसके साथ तीन कॉलम की एक खबर मुझे लीड के शीर्षक से ज्यादा महत्वपूर्ण लगती है। इसका शीर्षक है, वाई ग्रेड की सुरक्षा के बावजूद हत्या से राज्य में चुनाव से पहले राजनीति गर्माई। टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक रूटीन खबर की ही तरह है, पुलिस सिद्दीक की हत्या में विश्नोई गैंग का संबंध पता लगा रही है। द हिन्दू में यह खबर लीड नहीं है। लीड इजराइल की खबर है। हत्या की खबर दो कॉलम में टॉप पर और शीर्षक हिन्दी में कुछ इस प्रकार होगा, मुंबई एनसीपी नेता की हत्या के पीछे विश्नोई गैंग होने की आशंका। दि एशियन एज की लीड का शीर्षक है – उत्तर प्रदेश, राजस्थान उपचुनाव के उम्मीदवारों के चयन के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की बैठक। बाबा सिद्दीक की हत्या की खबर यहां तीन कॉलम में है। शीर्षक है, “सिद्दीक की हत्या के सिलसिले में तीन गिरफ्तार; महाराष्ट्र में राजनीतिक विवाद शुरू।”
इंडियन एक्सप्रेस में यह तीन कॉलम की लीड है। फ्लैग शीर्षक है, बाबा सिद्दीक की हत्या के एक दिन बाद मुख्य शीर्षक है, जांच से विश्नोई गैंग की भूमिका का पता चला, कांट्रैक्ट हत्या होने की संभावना। अमर उजाला के शीर्षक से इसकी तुलना कीजिये और सोचिये कि जेल में बंद गैंगस्टर को इतनी हिम्मत कहां से आती होगी कि वह बुलडोजर सरकार के राज में हत्या की जिम्मेदारी ले रहा है। क्या इसलिये की हत्या करने-करवाने वाले का धर्म एक है और जिसकी मौत हुई है वह दूसरे धर्म का है। ऐसा होना नहीं चाहिये। अगर है तो बहुत अपमानजनक है और सरकार का समर्थन करने वालों को यह सब बताना चाहिये? मुझे लगता है कि अगर किसी समूह को ऐसा काम मिल जाये जो उसकी योग्यता क्षमता से ज्यादा है तो ऐसा ही होता है। हर कदम पर हर रोज कोई ना कोई चूक उजागर होती है। सोशल मीडिया पर एक ही पोस्ट कई लोग करते हैं यह तो कई बार देखा जा चुका है। अखबारों में ऐसा हो जाये तो हास्यापद होगा और इससे बचने की कोशिश में जो हो रहा है वह मुझे बहुत दिलचस्प लगता है। खबरें तो अब कई स्रोत से आती हैं।
इंडियन एक्सप्रेस में लीड के साथ दो कॉलम की एक खबर है। संदिग्ध हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश से, दो का आपराधिक रिकार्ड है। मुझे लगता है कि यह सूचना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण है। आम आदमी के लिए यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि हिन्दू हित की बातें करने वाली सरकार के जमाने में हिन्दू युवक अपराधी बनाये जा रहे हैं या कुछ पैसों के लिए बन रहे हैं। इस लिहाज से मुझे द टेलीग्राफ का शीर्षक सही लगता है। लेकिन यह सरकार का समर्थन और विरोध भी हो सकता है। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, लॉरेंस गैंग ने मारा बाबा सिद्दीक को। मुझे लगता है कि यह बहुत ही रूटीन और सामान्य शीर्षक है। चुनाव वाले किसी राज्य में ऐसे नेता की हत्या कोई गैंगस्टर करता या करवाता है तो उसके कई मायने हो सकते हैं और सभी अखबारों को देखने से नहीं लगता है कि किसी को इसकी चिन्ता है (शायद इसलिए भी कि कोई बयान न हो) जबकि कोलकाता मामले में बहुत सामान्य हत्या या अपराध को राजनीतिक रंग दे दिया गया था। तब हत्यारे की गिरफ्तारी से पूर्ण विराम नहीं लगा था पर अब लगा दिख रहा है।
गौरी लंकेश के हत्यारों का सम्मान
बेरोजगार युवकों को हत्यारा बनाने की इन खबरों के बीच आज एक खबर है, गौरी लंकेश के हत्यारों को जमानत और उनका सम्मान। समझना मुश्किल नहीं है कि इससे अपराध के प्रति क्या संदेश जायेगा और यह खबर आम लोगों को मालूम होना कितना जरूरी है। इंडियन एक्सप्रेस में यह खबर पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम की है। आप जानते हैं कि पत्रकार और ऐक्टिविस्ट गौरी लंकेश की हत्या 5 सितंबर 2017 को बेंगलुरु में उनके घर के बाहर तीन बंदूकधारियों ने कर दी थी। 2023 दिसंबर में, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने गौरी लंकेश हत्या मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत स्थापित करने का निर्देश दिया था। हत्या के आरोपियों को 9 अक्टूबर को बेंगलुरु सेशन कोर्ट ने जमानत दी गई थी। खबर के अनुसार, जमानत पाने वालों में कथित शूटर भी है और हिन्दुत्व समूहों ने इनका सम्मान किया है। 11 अक्तूबर को श्री राम सेने ने इनका सम्मान किया था। श्रीराम सेना के ज़िला अध्यक्ष नीलकांत कंडगल ने बीबीसी हिंदी को बताया, “वो हिंदू कार्यकर्ता हैं। ज़मानत पर रिहा हुए थे, इसलिए हमने उनका स्वागत फूल और मालाओं से किया। हमने कालिका मंदिर में पूजा की और प्रार्थना की कि वे अदालत से बरी हो जाएं। “
दशहरे पर आतिशबाजी से हवा खराब हुई
अमर उजाला में पहले पन्ने की खबर के अनुसार दशहरे पर आतिशबाजी और रावण दहन से राजधानी दिल्ली की हवा खराब हो गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, शाम चार बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 224 दर्ज किया गया। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के मुताबिक, वायु प्रदूषण में आतिशबाजी के धुएं के अलावा पराली के धुएं की हिस्सेदारी 0.442 फीसदी रही। वहीं, खुले में कूड़ा जलाने से होने वाले धुएं की हिस्सेदारी 1.896 फीसदी दर्ज की गई। एनसीआर में फरीदाबाद (177) और गुरुग्राम (169) को छोड़कर गाजियाबाद (265), ग्रेटर नोएडा (228) और नोएडा की हवा एक्यूआई 243 के साथ खराब श्रेणी में रही। जब सरकार वायु प्रदूषण कम करने की कोशिश में है और ऐसे कामों पर रोक नहीं लगा रही है तो निश्चित रूप से ये खबर हैं लेकिन अखबारों में प्रमुखता नहीं पाती हैं।
दिल्ली के बाद गुजरात में करोड़ों का नशा
हिन्दुस्तान टाइम्स में आज तीन कॉलम में छपी खबर के अनुसार दिल्ली के बाद गुजरात में कोकीन का बड़ा जखीरा मिला है। अंकलेश्वर में दिल्ली और गुजरात पुलिस ने रविवार को एक संयुक्त अभियान में 5000 करोड़ रुपये मूल्य की करीब 518 किलोग्राम कोकीन बरामद की है। इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि यह नई बरामदगी दिल्ली में इस माह की शुरुआत में जब्त की गई 700 किलोग्राम कोकीन के मामले से जुड़ा है। इसके साथ ही अब तक 1,289 किलोग्राम कोकीन और 40 किलो हाइड्रोपोनिक थाईलैंड मारिजुआना बरामद की जा चुकी है। इसकी कुल कीमत 13,000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। इस संबंध में अब तक 12 लोग गिरफ्तार किये जा चुके हैं। फिल्म अभिनेता-अभिनेत्रियों के पास और निजी सेवन के लिए बरामद नशे की खबरों को कैसे प्रमुखता मिली थी उसे याद कीजिये तो पता चले कि करोड़ों के नशे की बरमदगी की खबर ही नहीं है।
महाराष्ट्र के कांग्रेस नेताओं की बैठक दिल्ली में
द हिन्दू में पहले पन्ने पर चार कॉलम में छपी एक खबर का फोटो का शीर्षक है, राहुल गांधी ने महाराष्ट्र कांग्रेस नेताओं के शीर्ष नेताओं की अर्जेन्ट मीटिंग आज दिल्ली में बुलाई। राजनीति में इसके कई मायने हैं पर अखबारों में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है।
चिड़िया घर के लिए 400 करोड़ की जरूरत
टाइम्स ऑफ इंडिया में आज प्रकाशित एक खबर के अनुसार दिल्ली चिड़िया घर के आधुनिकीकरण के लिए 400 करोड़ रुपये की जरूरत है और बजट सिर्फ 30 करोड़ रुपये का है। वह भी तब जब यह केंद्र सरकार के क्षेत्राधिकार वाला अकेला चि़ड़ियाघर है। इस चिड़िया घर की दशा का अंदाजा इस तथ्य से लगता है कि हाल में दिल्ली के चिड़ियाघर को वर्ल्ड एसोसयेशन ऑफ जूज़ की सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है। आठ अक्तूबर की इस खबर के बाद आज टाइम्स ऑफ इंडिया में इसका कारण छपा है। जनसत्ता ने इस संबंध में लिखा था, चिड़िया घर में रखे अफ्रीकी हाथी ‘शंकर’ को जंजीरों में बांधकर रखने का आरोप में सदस्यता रद्द हुई है। आज की खबर से लगता है कि मामला चिड़िया घर के आधुनिकीकरण और पुनरुद्धार का है। बजट सरकार को देना है पर खबर देने में भी कंजूसी दिख रही है।
आरएसएस प्रमुख की सलाह की उपेक्षा का आरोप
दि एशियन एज ने आज एक्स पर कपिल सिबल की एक पोस्ट के हवाले से खबर छापी है कि भाजपा सरकर ने आरएसएस प्रमुख की समावेशी बातों को नजरअंदाज किया है। खबर के अनुसार विजयदशमी पर अपने संदेश में मोहन भागवत ने कहा है कि सभी त्यौहार मिल-जुलकर मनाए जाने चाहिए। ..हर तरह के लोगों में मित्रता होनी चाहिए…भाषाएँ विविध हो सकती हैं, संस्कृतियाँ विविध हो सकती हैं, भोजन विविध हो सकता है लेकिन मित्रता..उन्हें एक साथ लाएगी। सिबल ने एक्स पर लिखा है, कौन सुन रहा है? मोदी? अन्य? सिबल ने इसपर एक वीडियो भी जारी किया है। खबर में उसका भी हवाला है। दूसरे अखबारों में यह पहले पन्ने पर नहीं है।


