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NDTV संस्थापकों प्रणय और राधिका को बड़ी राहत : लुक आउट सर्कुलर रद्द की हाईकोर्ट ने, सवालों में CBI केस

नई दिल्ली। Delhi High Court ने मीडिया जगत से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए Prannoy Roy और Radhika Roy के खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर (LOC) को रद्द कर दिया है।

कोर्ट ने साफ कहा कि LOC को निरस्त किया जाता है, हालांकि दोनों को जांच में सहयोग करना होगा। यह आदेश जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच ने दिया है।

क्या था मामला?

यह LOC Central Bureau of Investigation (CBI) द्वारा दर्ज दो मामलों से जुड़ा था—

  • पहला मामला (2017) — जिसे CBI पहले ही बंद कर चुकी है
  • दूसरा मामला (2019) — जिसमें अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है

यानी एक केस खत्म, दूसरे में सालों बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं—इसी आधार पर LOC को चुनौती दी गई थी।

कोर्ट की टिप्पणी

  • LOC अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रह सकता
  • जांच लंबी खिंचने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक बनी रहे
  • जब आरोपी जांच में सहयोग कर रहे हैं, तो LOC का औचित्य कमजोर हो जाता है

क्यों अहम है यह फैसला?

यह फैसला सिर्फ एक कानूनी राहत नहीं, बल्कि एजेंसियों की कार्रवाई पर भी सवाल खड़ा करता है—

  • क्या बिना चार्जशीट के वर्षों तक निगरानी उचित है?
  • क्या जांच एजेंसियां “प्रक्रिया” को ही सजा बना रही हैं?

मामले में यह भी सामने आया कि 2017 वाला केस, जिसमें बैंक लोन को लेकर आरोप थे, CBI खुद ही बंद कर चुकी है।

यह फैसला बताता है कि अदालतें अब “लंबी जांच = अनिश्चित प्रतिबंध” के फॉर्मूले को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। कानून का मकसद जांच करना है, न कि बिना ट्रायल के किसी को सालों तक घेरकर रखना।

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