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बिहार में पीएसीएल के चार ठिकानों पर छापेमारी, बैकडेट में जमा करा रहे थे पैसे

बिहार में ‘जमाकर्ता हित संरक्षण अधिनियम’ के तहत पहली बार आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) ने पर्ल एग्रो टेक कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) के खिलाफ कार्रवाई की है. इओयू ने कंपनी के पूर्णिया, वैशाली, सासाराम और बिहारशरीफ स्थित कार्यालयों पर छापेमारी कर करीब 20 लाख रुपये नकद बरामद किया और कुछ कार्यालय संचालकों और प्रबंधकों को गिरफ्तार किया. चारों जिलों में कंपनी के नौ निदेशकों सह प्रमोटरों पर एफआइआर दर्ज की गयी है.

<p>बिहार में 'जमाकर्ता हित संरक्षण अधिनियम' के तहत पहली बार आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) ने पर्ल एग्रो टेक कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) के खिलाफ कार्रवाई की है. इओयू ने कंपनी के पूर्णिया, वैशाली, सासाराम और बिहारशरीफ स्थित कार्यालयों पर छापेमारी कर करीब 20 लाख रुपये नकद बरामद किया और कुछ कार्यालय संचालकों और प्रबंधकों को गिरफ्तार किया. चारों जिलों में कंपनी के नौ निदेशकों सह प्रमोटरों पर एफआइआर दर्ज की गयी है. </p>

बिहार में ‘जमाकर्ता हित संरक्षण अधिनियम’ के तहत पहली बार आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) ने पर्ल एग्रो टेक कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) के खिलाफ कार्रवाई की है. इओयू ने कंपनी के पूर्णिया, वैशाली, सासाराम और बिहारशरीफ स्थित कार्यालयों पर छापेमारी कर करीब 20 लाख रुपये नकद बरामद किया और कुछ कार्यालय संचालकों और प्रबंधकों को गिरफ्तार किया. चारों जिलों में कंपनी के नौ निदेशकों सह प्रमोटरों पर एफआइआर दर्ज की गयी है.

बिहार में जिन जिलों में छापेमारी की गयी है, वहां पाया गया कि पीएसीएल लोगों से पैसा तो आजकल में ले रही थी, लेकिन उन्हें रसीद बैक डेट यानी 21 अगस्त, 2014 का दे रही थी. लोगों को यह झांसा दे रही थी कि बैक-डेट से रसीद दे रहे हैं, तो ब्याज भी उसी दिन से देंगे. इस झांसे में लोग बड़े आराम से फंस रहे थे. साथ ही जो लोग अपने पहले से जमा किये पैसे लौटाने की जिद कर रहे थे, उन्हें वर्तमान जमा राशि से ही लौटा रहा था. बिहार में कंपनी का आफर था कि किस्तों में पैसा दें और जमीन ले जाएं. पूर्णिया, वैशाली, नालंदा समेत कई जिलों में लैंड ब्लॉक होने की बात कंपनी कहती थी, लेकिन जांच में ऐसा कुछ नहीं मिला. इसके अलावा कंपनी कई तरह के लोक लुभावने ‘कलेक्टिव इंवेस्टमेंट स्कीम’ के तहत लोगों से पैसा जमा करवाती थी.

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पूर्णिया से मिली जानकारी के अनुसार आर्थिक अपराध इकाई के निर्देश पर सोमवार को स्थानीय बस स्टैंड के सामने पाल मार्केट स्थित पीएसीएल ननबैंकिंग कंपनी के कार्यालय में की गई छापामारी में गिरफ्तार हुए शाखा प्रबंधक समेत 11 कर्मियों को मंगलवार को जेल भेज दिया गया है जबकि पुलिस ने इस मामले में कंपनी के डायरेक्टर समेत 23 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. छापामारी के दौरान गिरफ्तार हुए शाखा प्रबंधक मनोज कुमार कर, सीनियर सहायक गोपाल कुमार मिश्र, बबन कुमार, सहायक गौतम कुमार, स्टोर कीपर अजीत कुमार के अलावा मृत्युंजय कुमार, चन्द्रमणि कुमार सिंह, अमरेन्द्र कुमार गुप्ता, नीरज कुमार सिंह, अरूण कुमार राव एवं रामजी सिंह को पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई के बाद जेल भेज दिया है. पुलिस ने इसके अलावा पीएसीएल कंपनी के डायरेक्टर सुखदेव सिंह तथा दिल्ली स्थित कार्यालय के निर्मल सिंह भंगू, आनंद गुरूवंत सिंह, तरलोचन सिंह, गुरूनाम सिंह, उत्पल, दविन्द्र कुमार, योगिन्द्र सिंह, गुरमीत सिंह, सुब्रतो भट्टाचार्य के साथ-साथ कोलकाता के आईटी सुपरवाइजर शशिकांत मोहंती, पटना शाखा के सीएससी प्रभारी सतीश कुमार जैन, सीनियर असिसटेंट अजय कुमार के खिलाफ भादवि की धारा 406, 420, 468, 471, 109, 120 बी, 34 एवं सेक्शन 3 बिहार प्रोटेक्शन आफ इंटरेस्ट आफ डिपोजिट एक्ट 2002 सेक्शन 66 आई टी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है. सेबी के रोक के बावजूद तीन माह के भीतर ग्राहकों से करीब सवा करोड़ की राशि अवैध तरीके से जमा लिए गए थे जबकि सेबी ने तीन माह के अंदर ग्राहकों को रुपया वापस करने का निर्देश दिया था. 17 नवंबर तक राशि जमा करने वालों को भी 21 अगस्त का ही रसीद दिया जाता था. छापामारी के दौरान पुलिस ने लगभग साढ़े चार लाख नगद एवं पीएनबी एवं एक्सिस बैंक के कई चेक बुक भी बरामद किए थे जो फर्जी तरीके से राशि का लेनदेन करते थे. इस मामले में नामजद अभियुक्तों में से 11 को जेल भेज देने के बाद अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई तेज कर दी गई है.

उल्लेखनीय है कि पर्ल ग्रुप के 45 हजार करोड रुपये के घोटाले की अब तक की जांच के दौरान सीबीआई को अनेक ऐसे दस्तावेज बरामद हुए है जिनसे पता चलता है कि जाली भूमि आवंटन पत्रों को जारी कर भारी मात्रा में निवेश इकट्ठा किया गया. सीबीआई ने ग्रुप के लगभग एक हजार संदेहास्पद बैंक खातों को सील कर दिया है और ग्रुप के निदेशको से अनेक बार पूछताछ करने के बाद उनके विदेश जाने पर रोक लगा दी है. प्रवर्तन निदेशालय ने भी पीएसीएल के खिलाफ मनी लांड्रिग एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर अनेक लोगों से पूछताछ की है. पीएसीएल के इस झांसे में देश के करीब 5 करोड़ निवेशक आ गए . कंपनी में करीब 45 हजार करोड़ रुपये निवेश हुआ. आरोप है कि जब पैसा लौटाने की बात आई तो निेवेशक को नहीं उनका पैसा मिला . पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी पीएसीएल पर जाली दस्तावेजों के जरिए कई भूमि आवंटन करने का आरोप. कंपनी के एक हजार खाते शक के आधार पर सीज. कंपनी के प्रमुख प्रमोटरों के विदेश जाने पर रोक. पीएसीएल के खिलाफ सीबीआई ने आपराधिक षडयंत्र और धोखाधडी के तहत मुकदमा दर्ज किया. पीएसीएल का मामला शारदा घोटाले से अलग एक ही जमीन के कागज कई लोगों के पास अनेक राज्यों में जमीनों के दस्तावेजों की जांच जारी ईडी ने भी लोगों से पूछताछ शुरू की. सीबीआई ने इसी साल फरवरी महीने में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पीएसीएल और उसकी सहयोगी कंपनी पीजीएफ के खिलाफ 45 हजार के तथाकथित घोटाले में जांच शुरु कर अनेक शहरो में छापेमारी की थी. इस छापेमारी के दौरान सीबीआई को एक ट्रक से भी ज्यादा दस्तावेज बरामद हुए थे. इन दस्तावेजों की अब तक की जांच के दौरान सीबीआई को जमीनों के आवंटन को लेकर अनेक ऐसे दस्तावेज मिले है जिनसे पता चलता है कि एक ही जमीन कई लोगों को आवंटित कर दी गई. छापे में मिली जमीनों की सेल डीड ट्रासंफर डीड और टाईटल डीडो की मौके पर पहुंच कर जांच की जा रही है.

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कुछ दस्तावेज की जांच से पता चला है कि कई जगहो पर कंपनी ने अपनी जमीनें दिखाई थी लेकिन सीबीआई अधिकारी जब जांच के लिए उन जगहो पर पहुंचे तो वहा वह जमीनें नहीं थी जैसा कि कंपनी ने दावा किया था. सीबीआई ने मध्य प्रदेश सरकार के साथ मिल कर भी कई जमीनों की जांच की है और अनेक राज्यों में सीबीआई की टीमें जमीनों और खाताधारकों दोनों की जांच कर रही है . सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस मामले में पीएसीएल कंपनी के निदेशको से कई चरणों में पूछताछ की गई है और पूछताछ के बाद पासपोर्ट अथारिटी को सूचित कर दिया है कि कंपनी के मेन प्रमोटर्स के लिए विदेश जाने पर रोक लगा दी गई है. अधिकारी ने बताया कि शक के आधार पर कंपनी के एक हजार बैंक खातों को सीज कर दिया गया है. सीबीआई का अधिकारिक तौर पर कहना है कि इस मामले की जांच के दौरान ऐसे तमाम सबूत मिले है जिनसे पता चलता है कि कंपनी ने आपराधिक षडयंत्र और धोखाधडी के जरिए पैसे एकत्र करने का काम किया मसलन जब पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने पीएसीएल कंपनी को अपनी योजना को खत्म करने और निवेशको का पैसा वापस करने को कहा तो दिल्ली में दूसरे नाम से जाली योजना चलाई गई औऱ इसके लिए दूसरी कंपनी खोल ली गई. आरोप है कि दिल्ली की इस दूसरी कंपनी ने नए निवेशको से फंड इकट्ठा किया औऱ पहली कंपनी के निवेशकों को इसके जरिए पैसा वापस किया गया . पीएसीएल के खिलाफ सीबीआई के अलावा प्रवर्तन निदेशालय ने भी मनी लाड्रिग एक्ट यानि पीएमएलए के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और इस बाबत अनेक लोगों से पूछताछ की जा रही है ईडी जानना चाहता है कि इस मामले में कहीं हवाला के जरिए पैसा बाहर तो नहीं भेजा गया ईडी ने इस मामले में अधिकारिक तौर पर केवल इतना कहा कि मामले की जांच जारी है.

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0 Comments

  1. santosh singh

    December 1, 2014 at 1:22 pm

    PACL hi nahi REAL VISION au bhi bahut sare company hai jo aaj bhi luka chip kar paisa ka ugahi kar rha hai.AAM ADMI jante hua bhi paisa jama kar rahe hai.AAM ADMI bahut jald hi karorpati banana ke chaker me sab kuch gwa de rha hai .Bihar ke log turant pasa ke jhasa me aa jate hai.

  2. Nasra khatoon

    November 2, 2016 at 3:39 pm

    Sir, mere sath v thagi hui hai, mera paisa abhi tak company ne nahi loutaya hai. Mere sath kai logo ka paisa v laga tha jo aaj tak nahi loutaya gaya. Please kuchh kijiye

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