कैनविज समूह के चेयरमैन कन्हैया गुलाटी के पापों का घड़ा जल्द भरने वाला है

कैनविज टाइम्स की धोखाधड़ी के संबंध में आप लोगों को बताना चाह रहा हूं. लोगों को करोड़पति बनाने का ख्वाब दिखाकर लाखों लोगों को ठगने वाले कैनविज समूह के चेयरमैन कन्हैया गुलाटी के पापों का घड़ा जल्दी ही भरने वाला है. यूपी में फर्जीवाड़ा कर लोगों को चूना लगाने वाली कंपनियों की पोल यूं तो आए दिन खुल रही है, लेकिन अब वो दिन भी दूर नहीं जब कन्हैया गुलाटी के काले कारनामों का चिट्ठा चर्चा-ए-आम होगा.

अभी तक गुलाटी एंड कंपनी ने अपने राजनीतिक और प्रशासनिक दबदबे से अपने कुकर्मों को दबाए रखा और जिम्मेदार अफसर भी मलाई काट कर फाइलों पर कुंडली मार कर बैठ गए. हजारों- हजार कारें बांटने का दावा करने वाले कन्हैया गुलाटी यूं तो नीति और नीयत की बात करते हैं लेकिन उनकी खुद की नीयत कितनी दोयम दर्जे की है, आइए उसे विस्तार से समझाते हैं.

कैनविज समूह की धोखाधड़ी से त्रस्त होकर मुरादाबाद के संतोष कुमार शर्मा ने दिनांक 30.05.15 को बरेली जिले के जिलाधिकारी के समक्ष कैनविज समूह द्वारा 7500  रूपये का निवेश कराकर ठगने के संबंध में लिखित शिकायत दर्ज कराई. इस संबंध में भड़ास में 06 जून 2015 को खबर प्रकाशित की गई थी. शिकायत का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के लिए अपर जिला मजिस्ट्रेट, बरेली (नगर)  ने दिनांक 22.06.15 को पुलिस अधीक्षक बरेली को जांच के लिए पत्र लिखकर 15 दिनों के भीतर आख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था. लेकिन जून 2015 के निर्देशों को पुलिस अधीक्षक महोदय ठंडे बस्ते में दबा गए और जांच आज तक लंबित है.

गुलाटी के खिलाफ 60 से अधिक बार जारी हो चुका है एलबीडब्लू

कैनविज की धोखाधड़ी से त्रस्त होकर मुरादाबाद के नरेश कुमार ने सीजेएम कोर्ट में कन्हैया लाल गुलाब व अन्य के विरुद्ध परिवाद दाखिल किया. गुलाटी के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीजेएम कोर्ट से 60 से अधिक बार गैर जमानती वारंट जारी होने के बावजूद वे एक भी बार न तो कोर्ट के समक्ष पेश हुए,  न ही जमानत कराई।

मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार

न्याय के दर-दर भटक रहे लोगों ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है। नरेश सैनी अपनी पीड़ा से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अवगत कराया है।

अमित मिश्रा
प्रबंधक/ मंत्री
जनसंवेदना मानव उत्थान सेवा समिति
am19763@gmail.com

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डिजिटल, अखबार और मैग्जीन बंद कराने पहुंचे लाइव इंडिया के एचआर हेड को करारा जवाब दिया मीडियाकर्मियों ने

इन दिनों लाइव इंडिया समूह की हालत बेहद खराब है. चिटफंड घोटाले समेत सैकड़ों केसों में फंसे लाइव इंडिया की मूल कंपनी समृद्धि जीवन के मालिक महेश मोतेवार और उनका पूरा परिवार सीबीआई के शिकंजे में है. महेश मोतेवार को सीबीआई ने रिमांड पर ले रखा है. हजारों करोड़ के घोटाले के मामले में फंसा यह चिटफंड समूह अपने मीडिया वेंचर को बचाने की सारी कोशिशें कर रहा है लेकिन पैसा न दिए जाने से इंप्लाई परेशान हैं. दो महीने की सेलरी बकाया है.

खबर है कि आज एचआर हेड अजय मेहता पंद्रह बीस लोगों के साथ लाइव इंडिया आफिस पहुंचा और लाइव इंडिया के डिजिटल, मैग्जीन व अखबार को बंद करने का फरमान सुना दिया. कारण बताया कंपनी के पास पैसा न होने को. उसने कर्मियों को कहा कि आज उन सभी का आखिरी वर्किंड डे है. इस पर भड़के मीडिया कर्मियों ने कहा कि पहले सबका बकाया दो, तीन महीने का नोटिस पीरियड का एडवांस पैसा दो फिर बंद करो. कर्मियों ने एकजुटता दिखाते हुए पुलिस को फोन कर बुला लिया. मीडियाकर्मियों ने बिना फुल एंड फाइनल हुए आफिस छोड़ने और डिजिटल मैग्जीन अखबार बंद किए जाने का विरोध किया. पता चला है कि करीब साल भर से कंपनी ने किसी भी इंप्लाई का पीएफ नहीं जमा किया है. एक मीडियाकर्मी ने पीएफ की डिमांड की तो यही एचआर हेड अजय मेहता ने उसे निकाल दिया. वह पीड़ित मीडियाकर्मी श्रम विभाग जा रहा है और कंपनी को कानूनी लड़ाई के लिए खींच रहा है.

बताया जा रहा है कि समृद्ध जीवन कंपनी में जिन जिन लोगों ने निवेश किया है और उनकी परिपक्वता अवधि आ गई है, उनके पैसे नहीं दिए जा रहे हैं. कंपनी पर इस किस्म का ग्यारह सौ करोड़ का बकाया हो गया है. महेश मोतेवार और पूरी फेमिली पर सैकड़ों केस हैं लेकिन कंपनी का वसूली का काम जारी है. दिल्ली के करोलबाग से लेकर नोएडा तक में कंपनी प्रतिदिन लोगों से करोड़ों रुपये निवेश करा रही है. महेश मोतेवार की पहली और दूसरी दोनों पत्नियों को सीबीआई ने तलब किया है. महेश मोतेवार के अन्य परिजनों को भी पूछताछ के लिए सीबीआई ने बुलाया है. फिलहाल सबसे चिंताजनक हालत मीडिया वेंचर की है. टीवी, डिजिटल, मैग्जीन, अखबार सभी में कार्यरत लोग अपने भविष्य को लेकर चिंतित है. पैसे न मिलने से रोजाना की जीवनचर्या पर असर पड़ने लगा है.

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चिटफंड के ‘चैनलों’ से सावधान! मीडियाकर्मियों की जिंदगी नरक बना देते हैं ये

नई दिल्ली: एक का दो और दो का चार बनाने का दावा करती हैं चिटफंड कंपनियां. कंपनियां कुछ ही समय में लखपति बनाने का सपना दिखाती हैं और इनके लालच में आ जाते हैं गरीब और आम निवेशक. लोगों से लिए गए पैसों से चिटफंड कंपनियां संपत्तियां खरीदती हैं और जब निवेशक पैसा वापस मांगते हैं तो उन्हें दर-दर भटकने के लिए छोड़ दिया जाता है पर आज की कहानी ये नहीं है. आज हम बता रहे हैं किस तरह चिटफंड कंपनियां अपने कारोबार को चमकाने के लिए न्यूज चैनल और अखबार शुरू करती हैं और फिर निवेशकों का पैसा डूबने के बाद पत्रकारों और मीडियाकर्मियों को बर्बाद होने के लिए छोड़ देती हैं.

अब हम आपको कुछ पत्रकारों के नाम बताते हैं. हर्षवर्धन त्रिपाठी, अगस्त्य अरुणाचल, मनोजित मलिक और सुभदीप राय ये सभी वो टीवी पत्रकार हैं जिन्हें चिट फंड कंपनी वाले टीवी चैनलों ने कहीं का नहीं छोड़ा. P7 चैनल में काम कर चुके अगस्त्य अरुणाचल आज बेरोजगार तो नहीं लेकिन इनका दर्द किसी बेरोजगार से कम भी नहीं. अगस्त्य अरुणाचल का कहना है, ”पत्नी ने नौकरी शुरू कर दी है, भाई से मदद ले लेता हूं, मां को बताया नहीं है लेकिन कुछ-कुछ करके काम चल रहा है. वहीं एक और पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी का है, ”बहुत सारे लोगों ने हमारे सामने अपनी पत्नी और बच्चों को गांव भेज दिया. सैलरी नहीं आई तो उनका वक्त कटना मुश्किल था.

अगस्त्य अरुणाचल और हर्षवर्धन त्रिपाठी को दो राहे पर लाकर खड़ा करने वाला पी7 चैनल न्यूज चैनल नवंबर 2014 में बंद हो चुका है. इसका संचालन करने वाली कंपनी पर्ल्स ग्रुप के संस्थापक निर्मल सिंह भंगू को धोखाधड़ी के आरोप में सीबीआई ने हाल ही में गिरफ्तार किया है. भंगू ने लाखों निवेशकों को शिकार बनाया तो पी 7 न्यूज चैनल के जरिए सैंकड़ों पत्रकार सड़कों पर आ गए. जैसे-जैसे पर्ल्स ग्रुप पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता गया तो सबसे पहले पी 7 न्यूज चैनल को ही बंद करने की बात सामने आई.

पर्ल्स ग्रुप के P7 न्यूज के पत्रकारों की लड़ाई

अगस्त्य अरुणाचल का कहना है कि जब उन्होंने पी-7 न्यूज चैनल में नौकरी शुरू की तब इस चीज पर जरा भी गौर नहीं फरमाया कि ये चैनल चिट फंड कंपनी का है लेकिन चैनल में वरिष्ठ लोगों की कार्यशैली देखकर अहसास होने लगा कि इस चैनल का मिशन पत्रकारिता नहीं है बल्कि पत्रकारिता के जरिए कंपनी का प्रचार-प्रसार करना इसका मकसद है.

पी7 न्यूज चैनल के आउटपुट विभाग में 4 साल तक काम कर चुके हर्षवर्धन त्रिपाठी का कहना है बुरा दौर तब शुरू हुआ जब सैलरी 15 दिन लेट आने लगी और फिर बढ़ते-बढ़ते ये दौर दो-दो महीने पर पहुंच गया. हर्षवर्धन के मुताबिक चैनल बंद होने की घोषणा के बाद उन्होंने तीन महीने की सैलरी पाने के लिए जमीन आसमान एक कर दिया. डायरेक्टर के सामने धरना प्रदर्शन किया तो साथ ही नोएडा के जिला कलेक्टर को भी साथ लिया. श्रम विभाग के आयुक्त के सामने अर्जी डालकर उन्होंने न्यूज चैनल के संघर्ष कर रहे कर्मचारियों की लड़ाई को आगे बढ़ाया तब जाकर उन्हें अपना हक मिला.

पीएसीएल का कहना है कि निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है. कंपनी में जिन लोगों ने पैसा लगाया है उन्हें उनका पैसा वापस मिलेगा. कंपनी के वकील का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2015 में कमिटी बनायी थी और उसके पास कंपनी के सारे दस्तावेज़ मौजूद हैं.

रोजवैली, सारधा ग्रुप के चैनल के पत्रकारों की लड़ाई

पश्चिम बंगाल के रोज वैली कंपनी के चैनल न्यूज टाइम्स में काम करने वाले कर्मचारियों को अब भी वेतन नहीं मिल रहा. वहां बतौर एनटरटेनमेंट प्रोड्यूसर काम कर चुके सुभदीप राय ने बताया कि उन्होंने 5 साल न्यूज टाइम्स में काम किया लेकिन कंपनी ने उनका पीएफ अकाउंट में डालना साल 2014 से ही बंद कर दिया और जब पत्रकारों ने देरी से सैलरी मिलने, ईपीएफ खाते में न डाले जाने जैसी शिकायतों के खिलाफ आवाज उठाई तो वहां मौजूद बाउंसरों के जरिए उनकी आवाज दबाने की कोशिश की गई. रोजवैली से इस पूरे मामले पर उनका पक्ष मांगा गया लेकिन कंपनी ने कुछ भी कहने से मना कर दिया.

सुभदीप राय अब भी बेरोजगार हैं तो सारधा समूह के चैनल 10 में 5 साल तक काम कर चुके एक और पत्रकार मनोजित मलिक की कहानी भी कमोबेश यही है. अप्रैल 2013 में सारधा ग्रुप के मालिक सुदीप्तो सेन की गिरफ्तारी के बाद चैनल 10 के पत्रकारों को अचानक बर्खास्त किया जाने लगा. वेतन में कटौती शुरू हो गई और मजबूरी में जो लोग आज भी वहां हैं उनकी हालत भी बेरोजगार वालों जैसी ही है.

लब्बोलुआब ये कि पर्ल्स ग्रुप, सारधा ग्रुप, रोजवैली जैसी चिट फंड कंपनियों से जुड़े टीवी चैनलों के पत्रकार कहीं के नहीं रहे. यही नहीं चिटफंड कंपनी समृद्ध जीवन परिवार के चैनल लाइव इंडिया के मालिक महेश मोतेवार को धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है. P7 न्यूज या लाइव इंडिया हो, चैनल 10 हो, न्यूज टाइम्स हो या फिर चिट फंड कंपनी से जुड़ा कोई और टीवी चैनल, हकीकत ये है कि इनके मालिकों का पत्रकारिता से दूर-दूर तक का कोई नाता नहीं.

कई पत्रकारों को बेरोजगार करने वाले भंगू की कहानी

P7 न्यूज कंपनी के मालिक निर्मल सिंह भंगू की जिंदगी का सफर साइकिल पर दूध बेचने से शुरू हुआ था. पंजाब के जिला चमकौर साहबिब में भंगू साइकिल पर दूध इकट्ठा कर शहर में घर-घर जाकर बेचने का काम करता था. इसी दौरान वो एक चिट फंड कंपनी के लिए एजेंट का काम करने लगा. धीरे-धीरे इस काम में भंगू इतना माहिर हो गया कि उसने गुरवंत एग्रोटेक के नाम से अपनी कंपनी शुरू कर दी. ये कंपनी मैग्नेटिक पिलोज बेचने के नाम पर लोगों से पैसा जमा कराती थी. इसके बाद कंपनी का नाम बदलकर 1998 में पीएसीएल इंडिया यानि पर्ल एग्रोटेक कार्पोरेशन लिमिटेड रख दिया गया.

इस तरह दो दशक के भीतर भंगू हिंदुस्तान के सबसे बड़े लैंड बैंक का मालिक बन गया. इस ग्रुप की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके ब्रेंड एंबेसेडर अक्षय कुमार से लेकर ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज ब्रैट ली तक रह चुके हैं. पीएसीएल का मुख्य दफ्तर दिल्ली में है. देशभर में इसके एजेंटों का जाल फैला हुआ है. कंपनी के करीब 8 लाख एजेंट पूरे देश में हैं जो चेन मार्केटिंग के तहत काम करते हैं. इसके अलावा आईपीएल में पंजाब की टीम किंग्स इलेवन के साथ भी पर्ल ग्रुप जुड़ा रहा है.

कंपनी ने रियल एस्टेट, टिंबर इंडस्ट्री, हेल्थ, बीमा, होटल जैसे क्षेत्रों में हाथ आजमाने के बाद 2011 में P7 न्यूज चैनल शुरू किया. चैनल के जरिए पर्ल्स ग्रुप कंपनी का प्रचार-प्रसार करना ही उसका मकसद था. राष्ट्रीय चैनल के अलावा भंगू ने क्षेत्रीय चैनल पर्ल्स मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ भी शुरू किया और खूब पूंजी निवेश कराया. लेकिन आज 5 करोड़ निवेशकों से 45 हजार करोड़ रु ऐंठने के आरोप में भंगू को जेल भेजा जा चुका है. इस बीच सीबीआई की जांच में पचा चला है कि निवेशकों के पैसों से कंपनी ने दिल्ली के कनॉट प्लेस में 66 दफ्तरों को खरीदा. पंजाब के संगरुर में पर्ल्स कंपनी के कई निवेशकों को अपनी रकम डूबने का डर सता रहा है.

लाइव इंडिया के मालिक महेश मोतेवार की कहानी

लाइव इंडिया और महाराष्ट्र में मी मराठी न्यूज चैनल के मालिक महेश मोतेवार का शुरूआती सफर भी संघर्ष भरा रहा. महेश मोतेवार ने 2005 में खोली अपनी समृद्ध जीवन परिवार कंपनी को और ताकतवर बनाने के लिए चैनल खोला, अच्छे पत्रकारों को ऊंची सैलरी पर नौकरी दी. मोतेवार की कंपनी ग्रामीणों को बताती थी कि वह पुणे में बकरी और गाय पालन का कारोबार करती है. इसके बड़े-बड़े फार्म हैं, जहां पशुओं का पालन-पोषण होता है. कंपनी ने ग्रामीणों को बताया कि उनके पास जितने भी पैसे हैं, वे उनकी कंपनी में निवेश कर दें. बकरी व गाय पालन में मिलने वाले तीन गुना लाभ उन तक सीधे पहुंचेगा. इस तरह ग्रामीण उनके चंगुल में फंस गए.

महाराष्ट्र के नांदेड जिले के लोहारा तहसील के जेवली गांव में करीब डेढ़ सौ लोगों ने समृद्ध जीवन परिवार में निवेश किया है. श्याम सुंदर पाटिल नाम के किसान ने 21 लाख तो श्रीमंत घोडकें नाम के इस किसान ने 36 हजार रुपये समृद्ध जीवन परिवार में जमा किये हैं. अब मालिक महेश मोतेवार की गिरफ्तारी के बाद अब सभी को अपनी राशि वापस न मिलने का डर सता रहा है. लाइव इंडिया चैनल से इस पूरे मामले पर एबीपी न्यूज ने संपर्क साधा लेकिन उनका अब तक कोई जवाब नहीं आया है. जो भी हो इन चिट फंड कंपनियों के सबसे ब़ड़े शिकार बने निवेशक और खुद पत्रकार जिन्होंने इन कंपनियों से जुड़े टीवी चैनलों में काम किया या फिर कर रहे हैं. पी 7 न्यूज में काम कर चुके पत्रकार हर्षवर्धन और अगस्त्य अरुणाचल का कहना है कि चैनल खोलने के लिए बाकायदा केंद्र सरकार कायदा कानून बनाए और ऐसे लोगों को ही न्यूज चैनल का लाइसेंस दे जो पत्रकार रह चुके हैं या फिर पत्रकारिता करना चाहते हों.

साभार- एबीपी न्यूज

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साईं प्रसाद के मालिक शशांक भापकर भी गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा पुलिस हिरासत में

मुबंई से सूचना है कि मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने साईं प्रसाद ग्रुप ऑफ कंपनीज़ के तीसरे मालिक की भी गिरफ्तारी कर ली है. कंपनी के चेयरमैन बालासाहेब भापकर के बेटे शशांक भापकर को परसों गोवा के मडगांव के एक बंगले से गिरफ्तार किया गया. बताया जा रहा है कि शशांक भापकर गोवा में नए साल का जश्न मनाने के लिए पहुंचे थे. उन पर आर्थिक अपराध शाखा की पैनी नज़र थी.

जैसे ही शशांक के गोवा होने की सूचना मिली, आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने गोवा में जाल बिछाया और शशांक को मडगांव के एक बंगले से गिरफ्तार कर लिया. शशांक भापकर को आर्थिक अपराध शाखा ने कोर्ट मे पेश किया जहां कोर्ट ने 4 जनवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया.  इससे पहले शशांक को मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ़्तार किया गया था लेकिन सहार पुलिस थाने के परिसर से ही शशांक इमीग्रेशन ऑफीसर को चकमा देकर हिरासत से फ़रार हो गये थे.

मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने साईं प्रसाद ग्रुप ऑफ कंपनीज़ के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक बालासाहेब भापकर को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है. छत्तीसगढ़ पुलिस कंपनी की मालकिन वंदना भापकर को गिरफ्तार कर चुकी है. इस तरह पति-पत्नी और पुत्र तीनों को गिरफ्तार किया जा चुका है. आर्थिक अपराध शाखा के डीसीपी प्रवीण पटवाल ने कहा कि फिलहाल हम शशांक भापकर से पूछताछ कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि निवेशकों के पैसे कहां हैं और कौन-कौन से लोग इस धंधे में शामिल हैं. ज्ञात हो कि साईं प्रसाद की तरफ से न्यूज एक्सप्रेस नाम से न्यूज चैनल और हमवतन नाम से अखबार संचालित किया जाता था जो अब बंद हो चुका है.

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पीएसीएल वाले निर्मल सिंह भंगू के कई ठिकानों पर ईडी ने की छापेमारी

पीएसीएल और इसके प्रमोटर रहे निर्मल सिंह भंगू के खिलाफ शिकंजा कसता जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देश के कई शहरों में पीएसीएल के दफ्तरों पर छापे मारे। ईडी निवेशकों से गैरकानूनी तरीके से जुटाई गई करीब 60 हजार करोड़ रुपये की राशि के मामले में मनी लांड्रिंग के पहलू की जांच कर रहा है। यह राशि कई पोंजी स्कीमों के जरिये जुटाई गई।

ईडी के अधिकारियों ने बताया कि पर्ल और इसके निदेशकों व सहयोगियों के ठिकानों पर मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के तहत दिल्ली, मुंबई, मोहाली, चंडीगढ़ और जयपुर में छापे मारे गए हैं। सीबीआई की एफआईआर के आधार पर इस साल की शुरुआत में प्रवर्तन निदेशालय ने पीएसीएल के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था। कंपनी के खिलाफ कई सरकारी एजेंसियां जांच में जुटी हुई हैं। पर्ल पर आरोप है कि इसने रीयल एस्टेट प्रोजेक्ट के नाम पर बिना पूंजी बाजार नियामक की मंजूरी लिए अनधिकृत रूप से सामूहिक निवेश योजनाएं यानी पोंजी स्कीमें चलाईं। इनके जरिये निवेशकों से कई सालों में तकरीबन 60 हजार करोड़ रुपये जुटाए गए।

देश की सबसे बड़ी गैरकानूनी धन उगाही स्कीम के चलते शिकंजे में फंसे पीएसीएल (पर्ल) के निदेशक निर्मल सिंह भंगू सेबी के खिलाफ सैट के शरण में पहुंच गए हैं। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने 22 अगस्त 2014 को पीएसीएल और भंगू समेत कंपनी के सभी निदेशकों को निवेशकों सेवसूले गए लगभग 50 हजार करोड़ रुपये वापस करने का आदेश दिया था। अब यह रकम ब्याज समेत लगभग साठ हजार करोड़ रुपये पहुंच गई है।

इस बीच रामपुर से खबर है कि सिविल लाइंस क्षेत्र में डीएम आवास किनारे स्थित पर्ल बनाम पीएसीएल लिमिटेड के ऑफि‍स में मुरादाबाद के एजेंट्स ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान मौका पाकर ऑफि‍स मैनेजमेंट और कर्मचारी वहां से खिसक लिए। पड़ोसी जिले मुरादाबाद से पहुंचे एजेंटों के मुताबिक, उन्हें कई दिन से पीएसीएल के ऑफि‍स में रुपयों के जमा होने की सूचना मिल रही थी, जिसके चलते शुक्रवार को एजेंट यूनियन ने ऑफि‍स पर छापा मारा। छापे के दौरान ऑफि‍स में बदस्तूर काम जारी मिला। साथ ही बैकडेट में कलेक्शन जमा किया जा रहा था।

एजेंट की बात पर अगर यकीन किया जाए तो सेबी और हाईकोर्ट ने पर्ल बनाम पीएसीएल को ग्राहकों का रुपया आगे जमा करने पर रोक लगा रखी है। यह रोक 22 अगस्त 2014 से जारी है। इसके बावजूद कंपनी बदस्तूर हाईकोर्ट और सेबी के आदेशों का उल्लंघन करते हुए ग्राहकों से रुपया जमा कर रही है। साथ ही पुराने जमा रुपयों के प्लान की मैच्योरिटी होने के बावजूद पिछले करीब एक साल से कोई भुगतान नहीं कर रही है।

सेबी ने वर्ष 2014 में तीन महीने में ग्राहकों का भुगतान करने के आदेश दिए थे। ऐसा नहीं होने पर ग्राहकों और अभिकर्ताओं में जबरदस्त नाराजगी है। इसी के चलते आज अभिकर्ताओं की यूनियन ने कंपनी के ऑफि‍स पहुंचकर सारी ट्रांसएक्शन बंद करवा दी। इस दौरान ऑफि‍स मैनेजमेंट और कर्मचारी मौका देखकर वहां से खिसक लिए। साथ ही आक्रोशित अभिकर्ताओं ने कंपनी ऑफि‍स में ही डेरा डाल लिया। अभिकर्ताओं ने टीडीएस काटने और आयकर विभाग को सूचना न देने का इल्जाम भी लगाया। कलेक्शन एजेंट्स का मानना है कि इस तरह पूरे यूपी और इंडि‍या में कंपनी ने हजारों करोड़ जनता का रुपया ठग लिया है और फ्रॉड जारी है। इसपर यूनियन ने पुलिस और जिला प्रशासन को सूचना देकर कार्रवाई और जांच की मांग की है।

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महेश मोतेवार दो दिन के रिमांड पर, 58 जगहों पर छापे, सतीश के सिंह भी नपेंगे

विवादित निवेश योजना की समृद्ध जीवन कंपनी में चिटफंड घोटाला के संबंध में कंपनी के प्रबंध निदेशक महेश मोतेवार के पुणे के 40 कार्यालयों समेत 58 जगहों पर पुलिस व सीबीआई टीमों ने छापा मारा है. गिरफ्तार मोतेवार को उस्मानाबाद की उमरगा अदालत ने दो दिन यानि 31 दिसंबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है. मोतेवार को उस्मानाबाद पुलिस ने पुणे से गिरफ्तार किया था. बताया जा रहा है महेश मोतेवार की मीडिया कंपनी में सतीश के सिंह भी डायरेक्टर हैं और वे लंबे समय से मोतेवार के इशारे पर तरह तरह के काम करते आए हैं. पुलिस और सीबीआई की टीम सतीश के सिंह से भी पूछताछ कर सकती है क्योंकि मोतेवार के ढेर सारे राज इस वरिष्ठ पत्रकार के पास सुरक्षित हैं.

उधर, चर्चा है कि मोतेवार की गिरफ्तारी के बाद इनका मीडिया का धंधा धराशायी होने वाला है. लाइव इंडिया चैनल, लाइव इंडिया अखबार, प्रजातंत्र लाइव अखबार, मी मराठी समेत कई किस्म के प्रिंट इलेक्ट्रानिक व डिजिटल मीडिया माध्यमों को मोतेवार संचालित करता है. इस सबका मकसद सिर्फ एक रहा है. वह है अपने दागी व आरोपी मालिक को बचाना व इसके ठगी के धंधे को सुरक्षित रखकर बढ़ावा देना. निवेशकों संग धोखाधड़ी का आरोपी मोतेवार पिछले तीन सालों से फरार चल रहा था.

गृह राज्यमंत्री राम शिंदे ने पहले ही कह दिया था कि मोतेवार जल्द ही पुलिस की गिरफ्त में होगा. महेश मोतेवार पर तीन लोगों को डेयरी प्रोजेक्ट में भागीदारी देने का लालच दिखाकर ३५ लाख रूपये की ठगी करने का आरोप है. इस मामले में पुलिस ने साल २०१३ में अदालत में आरोप पत्र दायर किया था. महेश के खिलाफ पुणे के डेक्कन पुलिस थाने में भी निवेशकों से धोखाधड़ी करने और सेबी के निर्देशों का उल्लघंन करने का मामला दर्ज है. इस बारे में भाजपा सांसद किरीट सोमय्या ने मीडिया से बात करते कहा कि मोतेवार को दो साल पहले ही गिरफ्तार करना चाहिए था. कांग्रेस-राकांपा की सरकार से भी मैंने गुहार लगाई थी, लेकिन कुछ नहीं हो सका. हमारी सरकार आने के बाद तुरंत उसकी गिरफ्तार नहीं हुई, लेकिन यह चिटफंड़ घोटाले का मामला सेबी, आरबीई तक पहुंचाया. अब महेश मोतेवार को कोई बचा नहीं सकता.

मूल खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए शीर्षक पर क्लिक करें>

लाइव इंडिया का मालिक महेश मोतेवार चिटफंड घोटाले में गिरफ्तार

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लाइव इंडिया का मालिक महेश मोतेवार चिटफंड घोटाले में गिरफ्तार

हिंदी न्यूज चैनल ‘लाइव इंडिया’, मराठी न्यूज चैनल ‘मी मराठी’, लाइव इंडिया नाम से अखबार और मी मराठी नाम से अखबार की संचालक कंपनी समृद्ध जीवन के एमडी व चेयरमैन महेश मोटेवर उर्फ महेश किसान मोतेवार को चिटफंड घोटाले के चलते गिरफ्तार कर लिए जाने की खबर है. सेबी ने समृद्ध जीवन फूड्स के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था.

कंपनी के चार डायरेक्टर्स द्वारा मनाही के बावजूट चिटफंड कंपनी के जरिए पैसा जमा करने का आरोप है. मोटवार पिछले कई हफ्तों से गायब चल रहे थे. महेश मोतेवार को पुणे में कल दोपहर गिरफ्तार किया गया. पुलिस उन्हें गिरफ्तार करके उस्मानाबाद ले गई है. सेबी और अन्य कई सरकारी एजेंसियों की तरफ से मोतेवार की कंपनी समृद्ध जीवन के बैंक खाते सील करने के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं.

पूरे मामले को समझने के लिए नीचे दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करें>

चिटफंड के समारोह का ‘लाइव इंडिया’ करता रहा लाइव प्रसारण, सतीश के सिंह भी मंच पर मौजूद

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लाइव इंडिया चैनल की मूल कंपनी समृद्ध जीवन व इसके डायरेक्टरों पर मुंबई स्टाक एक्सचेंज और नेशनल स्टाक एक्सचेंज ने लगाई पाबंदी

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चिटफंड कंपनी ‘समृद्ध जीवन’ से सावधान, इसका भी हाल पीएसीएल और शारधा घोटाले वाला होने वाला है!

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‘प्रजातंत्र लाइव’ के मीडियाकर्मियों ने कैंडल मार्च निकाल कर अपने चिटफंडिये मालिक को ललकारा

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चिटफंडिया ‘समृद्ध जीवन फाउंडेशन’ की मददगार बनी अखिलेश सरकार, निष्कासित मीडियाकर्मी संघर्ष की राह पर

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विवादित चिटफंड कंपनी समृद्ध जीवन के अखबार ‘प्रजातंत्र लाइव’ में बवाल, पुलिस पहुंची, मालिक से शिकायत

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कंपनी के मालिकों को बचाने के चक्कर में दलाल बन गए चिटफंडिया चैनलों के कई पत्रकार

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अपने मालिक की बर्थडे पार्टी को सबसे बड़ी ख़बर बताकर पूरे दिन प्रसारित करता रहा लाइव इंडिया

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ये लाइव इंडिया नहीं, ये है चिट फंड इंडिया

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लाइव इंडिया चैनल की मूल कंपनी समृद्ध जीवन व इसके डायरेक्टरों पर मुंबई स्टाक एक्सचेंज और नेशनल स्टाक एक्सचेंज ने लगाई पाबंदी

एक बड़ी खबर ये है कि लाइव इंडिया चैनल संचालित करने वाली चिटफंड कंपनी समृद्ध जीवन और इसके डायरेक्टरों पर मुंबई स्टाक एक्सचेंज व नेशनल स्टाक एक्सचेंज ने पाबंदी लगा दी है. इस पाबंदी के बाद कंपनी अगर किसी किस्म का कारोबार या निवेश कराती है तो उसे अवैध माना जाएगा. ज्ञात हो कि समृद्ध जीवन कंपनी के नाम पर इसके मालिकों ने देश भर की जनता को हसीन सपने दिखाकर अरबों खरबों रुपये लूटे हैं और इस लूट को शादी ब्याह के नाम पर पैसे की तरह बहाया है. मुंबई स्टाक एक्सचेंज और नेशनल स्टाक एक्सचेंज द्वारा पाबंदी लगाने से संबंधित दस्तावेज नीचे दिए जा रहे हैं.

यह ध्यान रखें कि ये दस्तावेज देश के सारे न्यूज चैनलों और अखबारों के पास पहुंच चुके हैं लेकिन कोई इसे नहीं दखा रहा है क्योंकि समृद्ध जीवन कंपनी ने सत्ता और मीडिया को करोड़ों अरबों रुपये फेंक कर मैनेज कर रखा है. वैसे तो चैनल वाले छोटी से छोटी खबरें को बिग ब्रेकिंग बनाकर दिखाते हैं लेकिन समृद्ध जीवन और पीएसीएल जैसी कंपनियों के बड़े बड़े घटनाक्रमों को पी जाते हैं. समृद्ध जीवन पर पाबंदी संबंधी दस्तावेजों को भड़ास तक समृद्ध जीवन से जुड़े रहे एक ऐसे शख्स ने पहुंचाया है जिसने जनता के पैसे की नंगी लूट देखकर इस फ्राड कंपनी से इस्तीफा दे दिया और अब इस कंपनी को एक्सपोज करने में जुटा हुआ है ताकि फिर करोड़ों लोगों की अरबों खरबों रुपये की खून पसीने की कमाई डूब न सके. पढ़िए मेल और फिर देखिए दस्तावेज.

Dear Sir,

Please go through with the attachment. Bombay Stock Exchange and National Stock exchange banned smaruddha jeevan and his directors.

The third attachment is of RCS Punjab in which, the samruddha jeevan dont have the license to work in punjab but still he is doing business in punjab and doing fraud of crores.

Please also publish sebi order of 2nd sept 15, in which sebi instruct samruddha jeevan to refund the deposited amount in 3 months.

Regards

xyz

मुंबई स्टाक एक्सचेंज द्वारा समृद्ध जीवन को प्रतिबंधित किए जाने संबंधी पत्र….

नेशनल स्टाक एक्सचेंज द्वारा समृद्ध जीवन को प्रतिबंधित किए जाने संबंधी पत्र….

पाबंदी के बावजूद पंजाब में धड़ल्ले से उगाही करने वाले समृद्ध जीवन समूह की काली कथा को द ट्रिब्यून अखबार ने विस्तार से प्रकाशित किया लेकिन पुलिस प्रशासन और मीडिया को मैनेज करने वाला यह समूह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा और उगाही के कार्यक्रम को जारी रखे है.. द ट्रिब्यून अखबार में प्रकाशित विस्तृत खबर पढ़ने के लिए नीचे लिए आ रहे Next पर क्लिक कर दें>>

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Samruddha Jeevan Fraud : महेश किशन मोटेवार समेत तीन डायरेक्टरों की संपत्ति कुर्क करने के आदेश

लाइव इंडिया न्यूज चैनल संचालित करने वाली चिटफंड कंपनी समृद्धि जीवन के डायरेक्टरों महेश किशन मोटेवार, संतोष पायगोडे और राजेंद्र भंडारे की संपत्ति कुर्क करने के आदेश ग्वालियर की एक अदालत ने दिए हैं. इन तीनों डायरेक्टरों की संपत्ति कुर्क करने के आदेश रोकने को लेकर दाखिल याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है. तीनों के खिलाफ मजिस्ट्रेट कोर्ट से स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं.

शासकीय अधिवक्ता जगदीश प्रसाद शर्मा ने बताया कि समृद्धि जीवन चिटफंड कंपनी के डायरेक्टरों महेश मोटेवार, संतोष पायगोडे और राजेंद्र भंडारे के खिलाफ थाटीपुर थाने में जनता के साथ धोखाधड़ी किए जाने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 3/4 के तहत प्रकरण पंजीकृत किया गया है. लोगों को उनका धन कम समय में दुगना करने का लालच देकर पैसे वसूलने वाली इस कंपनी के तीनों डायरेक्टर एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही फरार हैं. इन पर न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए धारा 82/83 की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है.

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Samruddha Jeevan Fraud : अब तो मान लीजिए ‘समृद्ध जीवन’ फ्रॉड चिटफंड कंपनी है, पढ़ें ये 30 पेज की सरकारी जांच रिपोर्ट

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Sebi orders Samruddha Jeevan Foods India to repay investors money in 3 months

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Samruddha Jeevan Fraud : अब तो मान लीजिए ‘समृद्ध जीवन’ फ्रॉड चिटफंड कंपनी है, पढ़ें ये 30 पेज की सरकारी जांच रिपोर्ट

कथित मुख्यधारा के मीडिया घराने चिटफंड कंपनियों के हजारों करोड़ रुपये के फ्राड पर लंबी चुप्पी साधे रहते हैं, दिखाते भी हैं तो बस दो चार सेकेंड के लिए या नीचे पट्टी पर चला कर मुंह सिल लेते हैं. वैसे तो छोटे व गैर-जरूरी मसलों पर दिन भर मुंह फाड़े चिल्लाते रहते हैं लेकिन चिटफंड कंपनियों के फर्जीवाड़े के खुलासे पर इन्हें सांप सूंघा रहता है. इसकी बड़ी वजह चिटफंड कंपनियों से मीडिया हाउसों की सेटिंग हैं. हजारों करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े में घिरी चिटफंड कंपनियां मीडिया हाउसेज को मुंहमागी कीमत देकर उनका मुंह बंद रखने का काम करती हैं. इसी कारण लुटेरी चिटफंड कंपनियों के फ्राड पर न कभी कोई ‘प्राइम टाइम’ होता है, न कभी कोई ‘विशेष’ आता है और न ही ‘आज की बात’ होती है. ‘धड़ाधड़’ और ‘फटाफट’ खबरों में भी चिटफंड कंपनियों के फ्राड की खबरों पर खूब कृपा करके उन्हें बख्श दिया जाता है.

अब जबकि सहारा के श्री महोदय जेल में हैं और छूट नहीं पा रहे हैं, पीएसीएल पर अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना लगा है, निवेशकों को पचास हजार करोड़ रुपये लौटाने के आदेश को कायम रखा गया है, साईं प्रसाद की मालकिन धोखाड़ी के आरोप में जेल जा चुकी हैं, समृद्ध जीवन फूड्स को भी पैसे लौटाने के आदेश सेबी ने दिए हैं, आपको अब एक नई खबर बताते हैं. यह खबर समृद्ध जीवन से जुड़ी हुई है. लाइव इंडिया नामक चैनल संचालित करने वाली यह कंपनी देश के कई राज्यों में अवैध तरीके से हजारों करोड़ रुपये की उगाही करने में जुटी है. सारे नेता, अफसर, एजेंसियां चुप्पी साधे हैं क्योंकि सबको महीना पहुंच रहा है. इस समृद्ध जीवन कंपनी के कारनामों को लेकर एक सरकारी संस्था ने जो जांच की है, उसकी जांच रिपोर्ट भड़ास के पास है. इस जांच रिपोर्ट में इस कंपनी के देश विरोधी, जन विरोधी, अवैध और अनैतिक कारनामों का खुलासा किया गया है. इस जांच रिपोर्ट के हर पन्ने को यहां प्रकाशित किया जा रहा है. शुरुआत पहले पन्ने से करते हैं…

अगला पेज पढ़ने के लिए नीचे लिखे Next पर क्लिक करें.

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Sebi orders Samruddha Jeevan Foods India to repay investors money in 3 months

NEW DELHI: Markets regulator Sebi today asked Samruddha Jeevan Foods India and its directors to refund in three months money collected from investors through unauthorised cattle and goat farm schemes. The company and its directors — Mahesh Kisan Motewar, Vaishali Mahesh Motewar, Ghanshyam Jashbhai Patel and Rajendra Pandurang Bhandar — have also been barred from the capital market for four years. The Securities and Exchange Board of India (Sebi) has begun the probe after receiving complaints about the company agents promising “more than 12 per cent fixed returns and other unusual returns on investments in cattle and goat farms”.

The company was running Collective Investment Scheme (CIS) without obtaining regulatory approvals. A Sebi probe found that the firm was collecting money from the public in order to carry out business of “purchase and rearing of goats/buffaloes’ and also of sheep farming. Under its various schemes, the company was offering to double the money in five and half years, while also promising an amount equivalent to 1.5 times of the contract value as ‘accidental death help’.

The company’s financial statements showed that ‘advance from customers’ in fiscal year 2011-12 stood at over Rs 331 crore, at over Rs 163 crore in 2010-11 and Rs 36 crore in 2009-10. It spent over Rs 56 crore towards ‘advertisement and sales promotion (including commission)’ in 2011-12, Rs 39.5 crore in 2010-11 and Rs 22 crore in 2009-10. In an order passed today, Sebi has the company and its directors to “wind up the existing CIS and refund the money collected by the said company under the schemes with returns which are due to its investors…within a period of three months.”

Thereafter, the firm has to submit a winding up and repayment report within 15 days, including the trail of funds claimed to be refunded, bank account statements indicating repayment to investors among others. In addition, they have been barred from selling any assets of the company, except for the purpose of making refunds to its investors. In case, they fail to comply with the order, Sebi said Samruddha Jeevan and its directors will continue to be barred from the securities market, even after the completion of four years of restrictions imposed on them “till all the CIS are wound up and all the money mobilised through such schemes are refunded to its investors with returns which are due to them.”

Besides, it would make a reference to State Government/ Local Police and register a civil/criminal case against Samruddha Jeevan and would make a reference to the Ministry of Corporate Affairs to initiate the process of winding up of the firm.

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चिटफंड के समारोह का ‘लाइव इंडिया’ करता रहा लाइव प्रसारण, सतीश के सिंह भी मंच पर मौजूद

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अपने मालिक की बर्थडे पार्टी को सबसे बड़ी ख़बर बताकर पूरे दिन प्रसारित करता रहा लाइव इंडिया

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ये लाइव इंडिया नहीं ये है चिट फंड इंडिया

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पीएसीएल को निवेशकों का 49100 करोड़ रुपया लौटाने का आदेश बरकरार

मुंबई। भारतीय प्रतिभूति अपीलीय ट्राइब्यूनल (सैट) ने बाजार नियामक सेबी के उस आदेश पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया जिसमें प्रॉपर्टी डेवलपर पीएसीएल को निवेशकों का 49,100 करोड़ रुपया लौटाने का आदेश जारी किया गया था। सेबी ने अवैध सामूहिक निवेश योजना को लेकर पीएसीएल के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बाद पिछले साल सेबी के आदेश के खिलाफ पीएसीएल ने ट्रिब्यूनल में अपील किया था। लेकिन ट्रिव्यूनल ने पीएसीएल की अपील खारिज करते हुए उसे सेबी के निर्देशों पर तीन महीने में अमल करने को कहा।

सेबी ने अवैध योजनाओं के जरिये निवेशकों से धन जमा करने के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए पीएसीएल लिमिटेड (पहले पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन) को तीन महीने के भीतर 49 हजार 100 करोड़ रुपये निवेशकों को लौटाने का आदेश दिया था। सेबी ने कंपनी से अवैध सामूहिक निवेश योजना (सीआईएस) को बंद करने को भी कहा है।  सेबी के आदेश के बाद पीएसीएल ने इसे प्रतिभूति अपीलीय ट्राइब्यूनल (सैट) में चुनौती दी। वहीं, पीएसीएल के बयान में कहा गया कि दुर्भाग्य से सेबी इस बात पर ध्यान नहीं दे सका कि कंपनी ने कहा था कि उसे सीआईएस नहीं माना जाए। कंपनी ने कहा है, ‘पीएसीएल ने सेबी की बेंच के सामने कहा था कि वह सीआईएस नहीं चला रही है। कंपनी ने अपने रीयल एस्टेट कारोबार के लिए जो धन जुटाया है, उसके पास उचित मात्रा में परिसंपत्तियां हैं।’

सेबी ने कहा है कि वह उच्चतम न्यायालय के एक दिशानिर्देश के अनुसार कंपनी तथा निदेशकों के खिलाफ धोखाधड़ी तथा व्यापार में अनुचित व्यवहार करने वह सामूहिक निवेश योजनाओं (सीआइएस) के बारे में सेबी के नियमों के उल्लंघन के आरोप में पीएसीएल के खिलाफ कार्रवाई की है।  भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इस संबंध में 92 पृष्ठ का आदेश जारी किया था। इसके अनुसार कंपनी ने खुद स्वीकार किया है कि उसने 49,100 करोड़ रुपये जुटाये है और अगर पीएसीएल एक अप्रैल 2012 से 25 फरवरी 2013 के बीच जुटाये गये कोष का पूरा ब्योरा दे तो यह राशि और भी अधिक हो सकती है। जिन निवेशकों से यह राशि जुटायी गयी, उनकी संख्या करीब 5.85 करोड़ है। इनमें वे ग्राहक भी शामिल है। जिन्हें जमीन आवंटित करने की बात कही गयी थी और उन्हें अभी तक जमीन नहीं दी गयी। अवैध तरीके से धन जुटाने के मामलों में यह न केवल राशि के लिहाज से बल्कि निवेशकों की संख्या को लेकर भी सबसे बड़ा मामला है।

वही, पीएसीएल तथा निर्मल सिंह भांगू समेत उसके शीर्ष कार्यकारियों के खिलाफ सीबीआई भी जांच कर रही है। साथ ही यह सेबी की जांच के घेरे में पुराने मामलों में से एक है। नियामक ने 16 साल पहले फरवरी 1998 में पीएसीएल को कहा था कि वह न तो कोई योजना शुरू कर सकती है और न ही अपनी मौजूदा योजनाओं के तहत कोष जुटा सकती है। कंपनी ने अपनी दलील में कहा कि वह कोई अवैध योजना नहीं चला रही है और जमीन की खरीद-बिक्री में शामिल है। सेबी ने अवैध तरीके से धन जुटाने की योजना चलाने को लेकर 1999 में पीएसीएल को नोटिस जारी किया था। बाद में मामला अदालतों में गया। उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल फरवरी में आदेश जारी कर सेबी को यह पता लगाने को कहा कि क्या पीएसीएल का कारोबार सामूहिक निवेश योजना के दायरे में आता है या नहीं और कानून के मुताबिक कार्रवाई करने को कहा।

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पीएसीएल पर सेबी ने अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना लगाया, देने होंगे 7269 करोड़ रुपये

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पीएसीएल पर सेबी ने अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना लगाया, देने होंगे 7269 करोड़ रुपये

नई दिल्‍ली। बाजार नियामक सेबी ने पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) और इसके चार डायरेक्‍टर्स पर 7,269 करोड़ रुपए की पेनल्‍टी लगाई है। पीएसीएल को यह रकम 45 दिनों के भीतर चुकानी होगी। सेबी द्वारा किसी कंपनी पर लगाई गई यह सबसे बड़ी पेनल्‍टी है। सेबी के अनुसार पीएसीएल के डायरेक्‍टर्स तरलोचन सिंह, सुखदेव सिंह, गुरमीत सिंह और सुब्रता भट्टाचार्य ने लोगों से अवैध तरीके से पैसा जुटाया है। इसके चलते कंपनी पर इतना बड़ा जुर्माना लगाया गया है। ज्ञात हो पर्ल और पीएसीएलल की तरफ से ही एक न्यूज चैनल पी7 न्यूज चलाया जाता था। साथ ही कई पत्रिकाएं भी निकाली जाती थीं। बाद में कंपनी के फ्राड का खुलासा होने और कई एजेंसियों के शिकंजे में फंसने के बाद ये मीडिया हाउस बंद हो गया। यहां के कर्मचारियों ने अपने बकाया वेतन के लिए लंबा आंदोलन चलाया जिसके बाद उन्हें उनका हक मिल सका। हालांकि अब भी ढेर सारे कर्मी अपना बकाया पाने के लिए भटक रहे हैं।

पिछले साल सेबी ने पीएसीएल को पिछले 15 साल में फर्जी स्‍कीमों के माध्‍यम से जुटाए गए 49,100 करोड़ रुपए निवेशकों को वापस करने का आदेश दिया था। हालांकि इस आदेश के खिलाफ पीएसीएल ने सिक्‍युरिटी अपीलेट ट्रिब्‍युनल (सेट) में अपील की थी। लेकिन पीएसीएल की अपील को खारिज करते हुए पिछले महीने सेट कंपनी की अपील खारिज करते हुए निवेशकों को पैसा वापस करने को कहा था। सेबी ने अपने आदेश में कहा है कि पीएसीएल ने पिछले एक साल में भारी मात्रा में निवेशकों से अवैध स्‍कीमों के माध्‍यम से पैसा जमा किया है। इसके चलते कंपनी का मुनाफा सिर्फ एक साल के भीतर बढ़कर 2,423 करोड़ हो गया। सेबी ने इस मामले में कड़े शब्‍दों का प्रयोग करते हुए कहा कि जिस तरह कंपनी ने अवैध तरीके से पैसा जुटाया है। उसे देखते हुए अभी तक की सबसे बड़ी पेनल्‍टी लगाए जाने के लिए पीएलसीएल से बेहतर कोई दूसरा मामला नहीं हो सकता।

सेबी के अनुसार पीएसीएल पर उसका यह सख्‍त रवैया अवैध तरीके से पैसा जुटाने की कोशिश में जुटी फाइनेंस कंपनियों को एक कड़ा संदेश देगा। पिछले कुछ वर्षों में इस प्रकार की गतिविधियों में तेजी आई है। देश में लाखों लोगों की बड़ी रकम इन्‍हीं स्‍कीमों में निवेश के चलते डूब गई है। ऐसे गंभीर मामलों को हल्‍के में नहीं लिया जा सकता। सेबी के नियमों के तहत यह फर्जी तरीके से धन जुटाने वाली कंपनियों पर 25 करोड़ रुपए से लेकर उनके सालाना मुनाफे के तीन गुना तक पेनल्‍टी वसूलने का अधिकार है। जहां तक मौजूदा मामले का सवाल है, सेबी ने इसी नियम का पालन करते हुए कंपनी पर उसके मुनाफे की तीन गुनी पेनल्‍टी लगाई है।

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साईं प्रसाद की मालकिन वंदना भापकर को कोर्ट ने जेल भेजा

चिटफंड कंपनी साईं प्रसाद की मालकिन वंदना भापकर को रायपुर की एक अदालत ने जेल भेज दिया है. उन्हें पहले एक दिन के रिमांड पर पुलिस को सौंपा था. रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उन्हें 14 दिनों के न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है. लाभ की आकर्षक स्कीमों का झांसा देकर कई सालों से छत्तीसगढ़ और देश के दूसरे शहरों में सक्रिय साईं प्रसाद और उससे सम्बंधित दूसरी कंपनियों पर CBI ने छापा मारी शुरू कर दी है. साथ ही देश के 30 से ज़्यादा शहरों में दस्तावेजी जांच पड़ताल शुरू हो गयी है. सूत्रों के अनुसार CBI की तीन टीमें रायपुर पहुंची जिसमे दिल्ली कोलकता और भिलाई के अधिकारी शामिल थे.

 

CBI अधिकारियों ने रिंग रोड राजेन्द्र नगर के पास मिलेनियम काम्प्लेक्स के फ्यूचर अ डे नामक फर्म पर दबिश दी. यह कंपनी साई प्रसाद की सहयोगी कंपनी बताई जा रही है. मारुती रेसीडेंसी अमलीडीह के एक मकान पर भी छापामार कार्यवाही हुई. दोनों जगहों पर कोई जिम्मेदार नहीं मिला. सूत्रों के अनुसार सीलबंद कार्यवाही की भी तैयारी है. इस तरह की जांच देश के 25 से 30 शहरों में जारी है. साथ ही कंपनी द्वारा 800 करोड़ रुपये का गड़बड़झाला किए जाने के मामले की भी जांच की जा रही है.

एक अधिकारी ने बताया कि अशोक मिलेनियम में भाड़े पर जगह लेकर कम्पनी चला रहे साईं प्रसाद के आफिस पर CBI ताला तोड़कर घुसी और पुलिस बल की मौजूदगी में दस्तावेजी जांच शुरू हुई. मगर कोई भी सामने नहीं आया है. वहीं रायपुर में कंपनी के ऊपर सीधे तौर पर कोई FIR दर्ज नहीं है मगर निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की खबर है. निवेशक इस वक्त एजेंटों को ढूंढ रहे हैं. पश्चिम बंगाल के शारदा चिट फंड घोटाले से भी साईं प्रसाद कंपनी के तार जुड़े होने का सन्देह है. उडीशा और प.बंगाल में साईं प्रसाद के ऊपर 50 से ज़्यादा FIR दर्ज है.

न्यूज़ एक्सप्रेस नेशनल चैनल, रीजनल चैनल MP CG स्वराज एक्सप्रेस और हमवतन अखबार की आड़ में चिटफंड कारोबार करने वाली यह कम्पनी मीडिया के नाम पर सरकार और प्रशासन में अपनी पकड़ बनाने की जुगत के थी. मगर कंपनी के मालिकों की सारी मंशा पर पानी फिर गया. कुछ चैनलों व अखबार की गर्भावस्था में ही मौत हो गयी. पुलिस कंपनी की मालकिन को पुणे के चिंचवड से ले गयी.

जानकारों के अनुसार देश में वर्षों से चिटफंडिया कारोबार करने वाले देश के सभी राज्यों में वसूली करते रहे हैं. SEBI और RBI की कार्यवाही से बचने के लिए नामी कंपनियों ने कोआपरेटिव सोसायटी बना कर कामकाज को नंबर एक में तब्दील करना शुरू कर दिया है. एक तरह से ये कंपनिया नाम बदलकर सहयोगी कम्पनियों के ज़रिये फ़र्ज़ीवाड़ा करती हैं. साईं प्रसाद की मालकिन वंदना भापकर को छत्तीस गढ़ पुलिस ने अरेस्ट किया है. उनसे एक दिन की रिमांड अवधि के दौरान पूछताछ जारी है. पुलिस की कोशिश है कि वंदना भापकर पर दबाव बनाकर बाला साहब भापकर व शशांक भापकर को सामने लाया जाए ताकि चिटफंड फ्राड का पूरा खुलासा हो सके.

पत्रकार दानिश आज़मी की रिपोर्ट.

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800 करोड़ का घोटालेबाज चिटफंडिया पुष्पेंद्र सिंह बघेल गिरफ्तार, ‘खबर भारती’ नाम से चैनल भी चलाया था

‘खबर भारती’ नाम से न्यूज चैनल चलाने वाले एक चिटफंडिया को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. इंदौर से मिली सूचना के मुताबिक अवैध तरीके से बैंकिंग कारोबार करने वाली सांई प्रसाद इंटरप्राइजेज चिटफंड कंपनी के सीएमडी पुष्पेंद्र सिंह बघेल को भोपाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने उसे इंदौर के राजेन्द्र नगर थाना क्षेत्र के एक होटल से उस दौरान गिरफ्तार किया जब वह अपने ड्राइवर के नाम से रजिस्टर्ड एक चिटफंड कंपनी से जुड़े एजेंटों को ठगी करने के तरीके बता रहा था.

बघेल की आधा दर्जन से अधिक अलग-अलग नाम की फर्मों पर देशभर में करीब 26 सौ करोड़ रुपए का घोटाले का आरोप है. जांच एजेंसी सेबी उसके स्वामित्व की कई चिटफंडी कंपनियों को ब्लैक लिस्टेड घोषित कर चुकी है. इधर, पुष्पेन्द्र की गिरफ्तारी की भनक लगते ही प्रवर्तन निदेशालय की टीम भी सक्रिय हो गई है. सूत्रों की मानें तो साईं प्रसाद चिटफंड कंपनी आरबीआई के बिना अनुमति के संचालित थी.

साईं प्रसाद चिटफंड कंपनी ने पूरे भारत में करीब 26 सौ करोड़ का गोरखधंधा फैला रखा था. इसका मास्टरमाइंड पुणे का बाला साहब भापकर है ,जो कंपनी का प्रमुख कर्ताधर्ता है. इस कंपनी के कर्ताधर्ता लोगों को दोगुना रकम का लालच देकर फरार हो जाते थे. देशभर के छह राज्यों में इनका गोरखधंधा फैला था. पुष्पेन्द्र मूलत: शहडोल का रहने वाला है. चिटफंड कंपनी की शुरुआत उसने शहडोल, रीवा समेत उत्तरप्रदेश के कुछ जिलों से शुरू की थी. उसकी कंपनियों के गोरखधंधे की जांच नहीं हो सके, इसके लिए उसने कुछ साल पहले एक नेशनल न्यूज चैनल शुरू किया था. जो फिलहाल बंद बताया जा रहा है. प्लास किसान एग्रोटेक लिमिटेड, पर्ल एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल, प्लस), सांई प्रकाश ग्रुप ऑफ कंपनी, सांई प्रसाद फूड्स लिमिटेड, सांई दीप, श्रद्धा इंडिया सेल्फ हेल्प ग्रुप सरल, जेकेवी मल्टी स्टेट कंपनी, डॉल्फिन कंपनी, वास्तव एलआर, रेनबो ऑफ ग्रुप कोलकाता वायर इंडस्ट्रीज लिमिटेड आदि चिटफंड कंपनिया करोड़ों रुपए लेकर प्रदेश से भाग चुकी हैं.

बघेल को बचाने के लिए हरियाणा से आ रहे नेताओं के फोन कॉल

साईं प्रकाश ऑर्गेनिक फूड्स लिमिटेड और साईं प्रकाश प्रॉपर्टी डेवलपमेंट लिमिटेड कंपनी के संचालक पुष्पेंद्र सिंह बघेल ने एक कंपनी के छोटे मुलाजिम के रूप में जिंदगी की शुरूआत की थी। देखते ही देखते वह करोड़ों रुपए का मालिक बन बैठा। देश के बड़े राजनेताओं से संपर्क की बदौलत वह इस मुकाम पर जा पहुंचा। अब वही राजनेता उसे छुड़ाने के लिए पुलिस पर दबाव बना रहे हैं। पुलिस ने उन लोगों की भी पड़ताल शुरू कर दी है, जिनके जरिए बघेल ने इतनी संपत्ति बना ली है।

अफसरों के पास ज्यादातर फोन हरियाणा से जुड़े राजनेताओं के आ रहे हैं। पुलिस मुख्यालय से लेकर जांच से जुड़े अफसरों को भी फोन किए जा चुके हैं, ताकि बघेल पर की जा रही कार्रवाई में नरमी बरती जाए। गुरुवार को इंदौर से गिरफ्तार किए गए पुष्पेंद्र पर केवल मप्र में ही तीन हजार लोगों से सौ करोड़ रुपए डिपॉजिट कराने का आरोप है। एमपी नगर पुलिस ने पुष्पेंद्र को शुक्रवार को अदालत में पेश किया। पूछताछ व रिकवरी का हवाला देते हुए उसे रिमांड पर दिए जाने की अपील पुलिस ने अदालत से की। इसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने उसे 25 जून तक रिमांड पर भेजने के आदेश कर दिए।

मल्टी सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में मुफ्त इलाज देने का दावा कर लोगों को ठगने वाले डॉक्टर हितेश शर्मा को भी पुलिस ने शुक्रवार को अदालत में पेश कर एक दिन की रिमांड पर ले लिया। पुष्पेंद्र बघेल ने कहा कि कंपनी में उसने केवल 88 करोड़ रुपए का डिपॉजिट करवाया है। उसकी संपत्ति 200 करोड़ की है। करीब आठ महीने पहले उसने अपना न्यूज चैनल भी बंद कर दिया। उसका कहना है चैनल बेचकर सबकी रकम चुका दूंगा। बघेल ने कहा कि कुछ लोग मेरे पीछे पड़े हैं, मुझे उलझाना चाहते हैं।

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‘प्रजातंत्र लाइव’ के मीडियाकर्मियों ने कैंडल मार्च निकाल कर अपने चिटफंडिये मालिक को ललकारा

विवादित चिटफंड कंपनी समृद्ध जीवन द्वारा संचालित न्यूज चैनल लाइव इंडिया के अखबार ‘प्रजातंत्र लाइव’ के छंटनी के शिकार कर्मचारियों ने कैंडल मार्च निकाल कर अपना गुस्सा प्रकट किया और अपने चिटफंडिये मालिकों को ललकारा. हिंदी दैनिक अखबार प्रजातंत्र लाइव के प्रबंधन पर कर्मचारियों ने प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. दिल्ली पत्रकार संघ का समर्थन पाकर उत्साहित आंदोलनकारी कर्मियों ने लाइव इंडिया कार्यालय से जंतर मंतर तक कैंडल मार्च निकाला. मार्च में बड़ी संख्या में मीडियाकर्मियों ने भाग लिया. लाइव इंडिया प्रबंधन ने 12 मई 2015 को लगभग 50 कर्मचारियों को बिना कारण बताए संस्थान में प्रवेश पर रोक लगा दी थी. मार्च में शामिल पत्रकारों को डीजेए महसचिव आनंद राणा और प्रेस एसोसिएशन के सचिव (पीआईबी) मनोज वर्मा और डीजेए अध्यक्ष अनिल पांडे ने भी संबोधित किया.

दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन द्वारा जारी प्रेस रिलीज इस प्रकार है….

लाइव इंडिया परिसर में कैंडिल मार्च के बाद प्रबंधन मुंह छिपाकर भागा

लाइव इंडिया (चैनल) ग्रुप के दैनिक समाचार पत्र ‘प्रजातंत्र लाइव’ में कार्यरत करीब 50 पत्रकारों और गैर पत्रकार कर्मचारियों पर प्रबंधन द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न के खिलाफ दिल्ली पत्रकार संघ के आह्वाहन पर लाइव इंडिया ग्रुप के कार्यालय 1, मंदिर मार्ग, नई दिल्ली से जंतर मंतर तक कैंडिल मार्च निकाला गया। कैंडिल मार्च में लगभग बड़ी संख्या में पत्रकारों और गैर पत्रकारों  ने भाग लिया। लाइव इंडिया प्रबंधन ने 12 मई 2015 को लगभग 50 कर्मचारियों को बिना कारण बताए संस्थान में प्रवेश पर रोक लगा दी थी। उसी दिन से ये कर्मचारी कार्यालय में प्रवेश करने और बकाया वेतन देने की मांग कर रहे हैं।

मार्च में शामिल पत्रकारों को डीजेए महसचिव आनंद राणा ने संबोधित किया। उन्होंने पीडि़त कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि उनके इस संघर्ष में दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन उनके साथ है तथा इस लड़ाई पर लाइव इंडिया प्रबंधन को झुकना पड़ेगा और सभी मांगें माननी पडेंगी। उन्होंने कर्मचारियों के रोके गए वेतन तथा प्रवेश पर लगी रोक को तुरंत हटाने और वेतन देने की मांग की तथा चेतावनी दी कि पत्रकारों के उत्पीड़न के खिलाफ हमारी लड़ाई लंबी चलने वाली है।  प्रेस एसोसिएशन के सचिव (पीआईबी) मनोज वर्मा ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया और कहा कि पूरे मीडिया जगत में अब इस तरह का माहौल बन गया है कि कुछ स्वार्थी पत्रकार प्रबंधन के साथ मिलकर साथी पत्रकारों का शोषण करते हैं। वे भूल जाते हैं कि वो भी पत्रकार हैं परंतु अपने निजी हितों के लिए वो किसी भी स्तर पर गिरने के लिए उतारू रहते हैं।

डीजेए के अध्यक्ष अनिल पांडे ने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि दिल्ली पत्रकार संघ न केवल पीडि़त कर्मचारियों के साथ है बल्कि ये आश्वासन भी देता है कि दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन सभी स्तरों पर कर्मचारियों के हितों के लिए जारी इस संघर्ष में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएगा। कर्मचारियों द्वारा कैंडिल मार्च आयोजित करने की सूचना पाकर कंपनी के मालिक और तथाकथित पत्रकार बसंत झा मुंह छिपाकर भाग खड़े हुए। कर्मचारियों ने परिसर पर जमकर नारे बाजी की तथा प्रबंधन मुर्दाबाद के नारे लगाए।

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‘लाइव इंडिया’ न्यूज चैनल के मालिकों के फ्रॉड पर सेबी ने लगाई रोक

सेबी (SEBI) यानि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने लाइव इंडिया न्यूज चैनल चलाने वाले मालिकों की एक कंपनी पेल (PAIL) यानि प्रास्परटी एग्रो इंडिया लिमिटेड के फर्जीवाड़े पर रोक लगा दी है। सेबी के आदेश के बाद अब इस कंपनी के लोग निवेशकों से पैसे नहीं उगाह सकेंगे। अपने आदेश में सेबी ने कंपनी के निदेशकों संतोष श्रवण माली, संतोष कालूराम, वानश्री तुकाराम, ह़षिकेश वसंत, दत्‍तारेय माधव यादव को कई आदेशों का पालन करने को कहा है।

सेबी ने कंपनी को दिए अपने आदेश में कहा है किसी स्‍कीम से निवेशकों से अब धन नहीं जुटाएंगे। धन जुटाने के लिए कोई नई स्‍कीम अथवा नया प्‍लान लॉन्‍च नहीं करेंगे। इसके साथ ही कोई नई कंपनी भी शुरू नहीं करेंगे। कंपनी द्वारा जुटाए गए धन से बनाई गई सभी संपत्तियों की सूची तुरंत जमा करेंगे। जुटाए गए धन से खरीदी गई संपत्तियों और अन्‍य सामान को किसी भी तरह से ठिकाने लगाने की कोशिश नहीं करेंगे। बैंक खाते में जमा धन, कंपनी की निगरानी में रखे धन अथवा लोगों से बड़े पैमाने पर जुटाए गए धन को इधर-उधर नहीं करेंगे। ऐडवर्टाइजमेंट और सेल्‍स प्रमोशन पर हुए खर्चों का पूरा ब्‍योरा पेश करेंगे। इसके अलावा मूल कंपनी Samruddha Jeevan Foods India Limited से PAIL यानि Prosperity Agro India Limited को ट्रांसफर किए गए सभी अकाउंट का पूरा ब्‍योरा पेश करेंगे। इसके अलावा PAIL से Samruddha Jeevan Multi- State and Multi Purpose Co-operative Society Limited को ट्रांसफर किए गए सभी खातों का पूरा ब्‍योरा पेश करेंगे। आदेशों में यह भी कहा गया है कि उक्‍त दिशा निर्देशों को तुरंत प्रभाव से प्रभावी माना जाएगा और अगले आदेश तक यही प्रभावी रहेंगे।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008 में HDIL Infra Projects को Broadcast Initiatives से Live India चैनल खरीदने के लिए ऑफर दिया था। बाद में इस चैनल को Prosperity Agro के मालिक महेश मोटवार को बेच दिया गया था। वह इस कंपनी में चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्‍टर थे।  Prosperity Agro India को कंपनी अधिनियम 1956 के अनुसार 5 फरवरी 2010 को रजिस्‍ट्रार ऑफ कंपनी, पुणे में रजिस्‍टर्ड किया गया था। कंपनी इस समय पशुओं के प्रजनन और उनके चारे आदि के व्‍यवसाय से जुड़ी हुई है। गुजरात और कर्नाटक समेत कई राज्‍यों में यह कंपनी काम कर रही है। इसके अलावा कंपनी इसमें चारा, बीज, पौधे, सब्‍जी, फल आदि के कारोबार में भी उतरने की योजना बना रही है। महेश मोटवार कई सरकारी एजेंसियों की जांच के निशाने पर हैं। इन पर फर्जी तरीके से लोगों से धन उगाहने का आरोप है।

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सहारा वालों ने बिहार के सीएम के गांव की बूढ़ी लाचार महिला का सवा तीन लाख रुपये हड़पा

Regarding SAHARA maturity not paid to investor

Yashwant Sir,

Editor, www.Bhadas4Media.com

My mother Saroj Singh 70 years old is illeterate. Her SAHARA a/c control no- 20719201775, date 15-12-2003 maturity amount Rs 320000/-. Without her permission by keeping her in dark maturity amoung fixed in other scheme Receipt no-034005534023-43, Date 19-09-2014, Amount Rs 320000/-. This is the case of Bihar CM village Harnauth branch code (2071). branch Manager Mr Vijay Singh-09939205612, 09471004666.

Regarding this when I contact Mr Rajesh Singh Media Head TV, Noida on his Mobile no 09811170008 on 05-04-2015 at 9 am with my wife and friend he says “SAHARA main humse puch kar paisa jama karaye the, Main kuch nahi kar sakta. Main para banking main nahi hoon. paise lene ke liye sidhe tareke se baat karoo” After that his mobile switch off.

Yashwant g please help so that I may get back hard earned money without interest.

Regard,
Saroj Singh
Mother of Dinkar Prasad Singh
09891136359
dinkarprasadsingh@gmail.com

दिनकर प्रसाद सिंह द्वारा भड़ास को भेजे गए पत्र पर आधारित.

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‘लाइव इंडिया’ न्यूज चैनल : सेलिब्रिटी कॉन्ट्रेक्ट के नाम पर चैनल के अंदर-बाहर के लोगों ने बनाया पैसा!

पूरी कहानी को समझने के लिए सबसे पहले इस यूट्यूब लिंक ( https://www.youtube.com/watch?v=KZPOILhTRf4 ) पर क्लिक करके वीडियो देखें जो महाराष्ट्र टीवी पर प्रसारित खबर है. इसमें रोशनी चोपडा, जो एकंर हैं, इस समय लाइव इंडिया के साथ वर्ल्ड कप के लिए जुडी हैं, की चीटिंग की कहानी है. आरोप है कि प्रोडक्शन हाउस को धोखा इस वजह से किया गया क्योंकि इस कांट्रेक्ट के जरिए लाइव इंडिया चैनल से जुड़े टॉप लोगों ने पैसे बनाए.

इंजमाम उल हक और दिलीप वेंगसरकर के कॉन्ट्रेक्ट में भी घपले की बात चर्चा में है. चैनल के मालिकों का पैसा चैनल में ही काम रहे लोगों ने कई बहानों से अपनी जेब में डाल लिया. पहले भी इस चैनल के संपादक और उनके खास लोगों पर कुछ कार्यक्रमों में मंत्रियों को बुनाले के लिए लाखों रुपए बनाने के आरोप लग चुके हैं. चिटफंडिया चैनल के मालिकों को इस मामले की जानकारी पूरे सबूत के साथ पहुंचाई जा चुकी है लेकिन उनकी मजबूरी ये है कि वे दूध देने वाली गाय की लात को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. आखिर चिटफंडियों के घपले घोटाले के मामलों को सलटाने वाले संपादक रिपोर्टर तो चाहिए ही. ऐसे में अगर ये संपादक रिपोर्टर कुछ काला पीला कर लें तो मालिक कैसे बोल सकता है कि क्योंकि वह तो आकंठ काले पीले के धंधे से ही जनमा पनपा है. 

अब आइए रोशनी चोपड़ा की कहानी पर. उपरोक्त जो यूट्यूब लिंक है, वह महाराष्ट्र टीवी पर प्रसारित खबर से संबंधित है, जिसका प्रसारण महाराष्ट्र टीवी पर तीन मार्च को किया गया. इसका प्रसारण महाराष्ट्र टीवी के संपादक सैय्यद सलमान अहमद ने कराया. इस मामले में कुछ खास अपडेट / जानकारियां इस प्रकार हैं…

Promises & commitments are made to be broken, this has been proved once again, this time by a celebrity. Comedy Cicus fame anchor Roshni Chopra & her manager Neeti Simoes cheated a Production house based in New Delhi. Kridha Productions claims Roshni Chopra & Neeti Simoes misguided them just for the sake of ‘saving agency fee’ & this has been said by Neeti celearly on whats app chat. So called production company was the one who managed Roshni’s anchoring schedule for Live India (National News Channel) for on going cricket world cup series. For that agency was in touch with Roshni & Neeti from day one through phone calls & whats app. Kridha Productions made several phone calls to Roshni’s manager & sent an e-mail from kridhaproductions@outlook.com having all the details for Roshni’s Anchor Schedule in the News Channel. E-mail sent on 24/01/2015 also contains the Signing amount of Roshni i.e. 13 Lakh 50 thousand. Production house also mentioned their fee in that particular mail. Roshni’s manager Neeti cheated Kridha production in smart & professinal way. Initialy she said they will pay agency fee once the contract will signed up, when the contract got signed she said, they will pay agency fee when they will got the money, “we will pay you one time fee as we are ethical enough not to overstep ur involvement here” said Neeti. But when everything done & when they had no excuse Neeti Clearly said “Yes we are saving agency fee” on whats app chat. Finaly she also said…. you havn’t done anything for us. Production company tried to informed all this to Roshni but in vain she didn’t replied on phone. Kridha productions posting each & every chat along with the mail which was sent to Roshni’s manager, so that people should aware of truth.

E-mail sent to Neeti Simoes (Roshni’s Manager) on 24th Jan :-

Greetings From Kridha Productions !!!!

Dear All,

As per our discussion with you, I am sending you the details of Roshni Chopra’s Anchoring Proposal for News Channel, Live India, Delhi

1. Roshni Chopra Must be available in Delhi From 13th Feb 2015 to 29th March 2015.

2. Roshni Chopra will Anchor sports based special show for 30 days during this period.  (Two shows daily).

3. Exact dates of those 30 days, will be given to you,  well in advance.

4. Live India will arrange costume designer & hair stylist for Roshni chopra… Initially, for 2-3 shows, you have to manage yourself.

5. Live India also arrange two way Air tickets for Roshni Chopra & her manager.

7. Roshni Chopra’s fee will be  Rs 13.5 Lakhs + Service tax.

8. 10-20 % of Roshni’s fee will be given as an advance.

9.Live India will send you CONTRACT PAPERS very soon.

10. Agency charges will be 10% of Roshni’s Fee, as discussed earlier.

You are free to call me anytime !!!

Thanks & regards

Kapil

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Whats app chat between Kridha Productions & Neeti Simoes (Roshni’s Manager) with actual date & time:-

11:38PM, Jan 22 – Kapil Gambhir: Hi Neeti… Roshni jus gave ur no. To me…. I need Roshni as an anchor in news channel, delhi for 30 days. For cricket world cup. Is she available ???
11:38PM, Jan 22 – Kapil Gambhir: IMG-20150122-WA0032.jpg (file attached)
Regard – kapil gambhir
12:08AM, Jan 23 – Neeti Simoes: Let’s talk in the morning
12:08AM, Jan 23 – Kapil Gambhir: Sure
10:58AM, Jan 23 – Neeti Simoes: Hi called u. Plscall back wen free
11:06AM, Jan 23 – Kapil Gambhir: Hi
11:07AM, Jan 23 – Kapil Gambhir: Cl u back…. After sometime
11:07AM, Jan 23 – Kapil Gambhir: Plz wait
1:23PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Hi neeti
1:24PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Is der any update ???
1:24PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: If yes then, plzzz let me know.
1:24PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Coz they want to hear from me soon
2:50PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Hi
2:50PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: I’ll send u a mail
2:50PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Wts ur e mail I’d???
2:52PM, Jan 24 – Neeti Simoes: Neetisimoes@gmail.com
2:52PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: K
2:52PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Thanks
3:29PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Mail sent
3:29PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Plz check
5:37PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Hi
5:37PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Neeti
5:37PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Plz reply soon
5:37PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: I got the contract papers from live india
6:13PM, Jan 24 – Neeti Simoes: I will need time till tom
6:14PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Wt hpnd Neeti ?
6:14PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: I HV done the deal on your assurance
6:14PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Dats y they gave me the contract papers
6:15PM, Jan 24 – Neeti Simoes: What assurance? I told u I need to speak to roshni n get back. I did not give u any assurance
7:01PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: K….
7:01PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: No issues
7:02PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Tk ur time
12:41PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Hi
12:41PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Neeti
12:41PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Wts up??
12:41PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Anurag g SE BAAT ho gyi aapki ???
12:39PM, Jan 25 – Neeti Simoes: Hi..roshni is reaching mumbai in some time.. I’ll discuss with her n get back to u by tonight
12:45PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: K
12:45PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Plz… Let me know asap
12:46PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: They are calling me
1:13PM, Jan 25 – Neeti Simoes: Pls tell them I will let all of u know tonight
1:13PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Oks
8:10PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Hi Neeti
8:10PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Any update ???
11:27PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Hi Neeti….. Still waiting for ur reply !!!!
12:22AM, Jan 26 – Neeti Simoes: Hi.. Will sign the contract tomorrow
12:22AM, Jan 26 – Neeti Simoes: Need to discuss a few a more details
12:22AM, Jan 26 – Kapil Gambhir: Oks
12:22AM, Jan 26 – Kapil Gambhir: I’ll cl after 12
12:23AM, Jan 26 – Kapil Gambhir: I’ll cl u after 12
12:24AM, Jan 26 – Kapil Gambhir: Shud I cl u knw ??
12:24AM, Jan 26 – Kapil Gambhir: Nw
12:31AM, Jan 26 – Kapil Gambhir: K… Catch u tomorrow
7:23PM, Jan 26 – Kapil Gambhir: Hi Neeti…
7:23PM, Jan 26 – Kapil Gambhir: Plz update me…
7:28PM, Jan 27 – Neeti Simoes: Hi.. M still waiting for anuraag to send me the final contract.
7:28PM, Jan 27 – Neeti Simoes: We will pay u a one time fee as we are ethical enough not to overstep ur involvement here.
7:34PM, Jan 27 – Kapil Gambhir: K
7:34PM, Jan 27 – Kapil Gambhir: Thanks for ur conern
7:37PM, Jan 27 – Kapil Gambhir: Koi b development ho toh plz let me knw…
7:37PM, Jan 27 – Kapil Gambhir: ????????
7:43PM, Jan 27 – Neeti Simoes: Yep will do
7:44PM, Jan 27 – Kapil Gambhir: ??????
7:44PM, Jan 27 – Kapil Gambhir: ??
9:12PM, Feb 5 – Kapil Gambhir: Kapil gambhir
9:12PM, Feb 5 – Kapil Gambhir: Kridha productions
9:12PM, Feb 5 – Kapil Gambhir: 09582332552
9:13PM, Feb 5 – Neeti Simoes: ??
4:02PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Hi neeti
4:02PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Wts up!!
4:03PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Roshni’s promo in live India is already aired !!!
4:04PM, Feb 10 – Neeti Simoes: Yes it must have
4:04PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Didn’t hear anything from ur side !!!
4:05PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Show is also gonna be aired by tomorrow
4:06PM, Feb 10 – Neeti Simoes: Yep cos she has not signed yet
4:06PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Wt?
4:07PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Not yet ?
4:07PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Ok…
4:07PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Then KB tk sign hoga ??
4:12PM, Feb 10 – Neeti Simoes: Tom
4:13PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Oks
4:14PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Plz let me kn w
4:14PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Knw
6:11PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: Hi Neeti…
6:11PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: Show is already aired
6:11PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: !!!
6:12PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: Wt are u waiting for ???
6:31PM, Feb 11 – Neeti Simoes: Excuse me?
6:31PM, Feb 11 – Neeti Simoes: What do u mean by msging me what r u waiting fo
6:31PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: I mean… Its been a long time
6:37PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: She has signed the contract yet or not ?
6:37PM, Feb 11 – Neeti Simoes: U can’t send me such msgs like we owe u something. We got a call directly. Still out of basic ethics I told u we will pay u a token. U don’t need to keep calling n msging me like this. We will pay u wen we receive the money. Take care.
6:38PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: When will u pay me… I just wanted to know this ??
6:41PM, Feb 11 – Neeti Simoes: M not answerable to u. U will get ur payment wen we do. Thx
6:42PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: Neeti, it was me… Who told u everything in the beginning… The channel, the contract money… N all… I even mail u when everything got final….
6:46PM, Feb 11 – Neeti Simoes: No. We got 3 inquiries. N u were one of them. N finally the contract, monies everything was done directly with anuraag.
6:47PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: So, wts ur call ??
6:48PM, Feb 11 – Neeti Simoes: I think I told u clearly. We will pay u for ur involvement. I cannot keep repeating myself.
6:49PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: Oks
3:06PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: When will u pay agency’s fee ?
3:07PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: I made a call…
3:07PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: But u didn’t reply !!!
3:08PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: I knw… Initial amount from live India ???
3:09PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: I knw roshni got initial amount from live India !!!
3:19PM, Feb 19 – Neeti Simoes: So?
3:19PM, Feb 19 – Neeti Simoes: Firstly I wud like to know on what basis r u asking us for the money. What was ur contribution in the entire process
3:20PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: U know everything
3:20PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: U committed to
3:20PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: We will pay u a one time fee as we are ethical enough not to overstep ur involvement here.
3:21PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: It WS ur msg
3:21PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: ????????
3:37PM, Feb 19 – Neeti Simoes: Yep but u were just one of the many people who approached us for this. Neither did u help in agreements or anything. The reason why we even considered cos anuraag was awkward about u calling him too.
3:38PM, Feb 19 – Neeti Simoes: So I don’t think we owe u anything.
3:38PM, Feb 19 – Neeti Simoes: Thanks.
3:54PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Which means u r trying to save AGENCY fee
4:02PM, Feb 19 – Neeti Simoes: Yes ?? if that’s what u want to believe. What fees? What did u do for us? Kindly awaken me
4:07PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Few days earlier u said… U r waiting for contract…. Then u said u r waiting for money…
4:07PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: N nw this….
4:08PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: These are ur ethics ???
4:08PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: We will pay u a one time fee as we are ethical enough not to overstep ur involvement here.
4:08PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Apka msg apko jagane k liye
4:08PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: ??????????
4:09PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: This is small world… Jus remember this things
4:10PM, Feb 19 – Neeti Simoes: Yep. Thanks for the advice.
4:10PM, Feb 19 – Neeti Simoes: U still have not answered my question. What did u do for us that ur asking for fee?
4:11PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Shud I send u that msg again ???
4:11PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Neeti, it was me… Who told u everything in the beginning… The channel, the contract money… N all… I even mail u when everything got final….
4:12PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Y did u say…
4:12PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: We will pay u after the contract
4:13PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: I can again send ur msgs to u
4:13PM, Feb 19 – Neeti Simoes: Please answer.
Have u got us the show?
NO

Did u finalize our money?
NO

Did u do our contract work?
NO

Did u give dates?
NO

Did u do ANYTHING?
NO
4:14PM, Feb 19 – Neeti Simoes: Thanks. Take care.
4:16PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: U misguided me…
4:16PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Each every
4:17PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Yeah I do everything
4:17PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Check mail
4:18PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: From Kridhaproductions@outlook.com

NO REPLY FROM NEETI AFTER THIS

xxx

उधर, लाइव इंडिया में मनमानी से जुड़ी एक और खबर सामने आई है. गुजरात में एक रिपोर्टर है जो गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में खद को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सबसे करीबी बताता फिरता है और लाइव इंडिया की नौकरी बजाते हुए दूरदर्शन से भी वेतन पा रहा है. दिनभर दूरदर्शन में बैठता है. दूरदर्शन की ही फीड को लाइव इंडिया में भिजवाने का काम करता है. वैसे भी लाइव इंडिया पर गौर करें तो कई दूसरे लोग जिसमें एकंर से लेकर मैग्जीन-पेपर के संपादक तक हैं, दो से तीन जगह काम करते हैं. ऐसे में दूरदर्शन तो घर की बात है इन लोगों के लिए.

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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पीएसीएल ने भारतीय तंत्र को दिखाया ठेंगा, पाबंदी के बावजूद जमकर उगाही जारी

चिटफंड कंपनी पीएसीएल को हजारों करोड़ रुपये का फ्रॉड करने के कारण भले ही सरकारी सिस्टम चौतरफा शिकंजे में लिए हो लेकिन इस कंपनी की सेहत पर कोई असर पड़ता दिख नहीं रहा है. कंपनी के मालिक निर्मल सिंह भंगू के अघोषित आदेश के कारण पीएसीएल का पैसा उगाही अभियान जोरों पर जारी है. एक ताजे आंतरिक सर्वे में पता चला है कि इस कंपनी ने बिहार, यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत भारत के बहुत बड़े हिस्से में निवेशकों को बरगलाकर पैसे जमा कराने का काम जारी रखा हुआ है.

(राजस्थान का कोटा शहर. यहां चिटफंड कंपनी पीएसीएल का चमचमाता बड़ा सा आफिस बीच शहर में जोर शोर से चालू है. यहां हर रोज लाखों रुपये निवेशकों का जमा कराया जाता है. पीएसीएल के एजेंट स्थानीय लोगों को लंबे चौड़े सपने दिखाकर पैसे जमा कराते हैं और खुद भारी भरकम कमीशन खाते हैं. यह खेल पूरे देश में जारी है. हालांकि सेबी, सुप्रीम कोर्ट समेत कई एजेंसियों संस्थाओं ने इस कंपनी पर पाबंदी लगाकर निवेशकों से पैसे जमा कराने पर रोक लगा दी है और पहले जमा कराए गए पैसे लौटाने को कहा है. पर पीएसीएल के कर्ताधर्ता भारतीय तंत्र को धता बताकर अपना धंधा जारी रखे हुए हैं.)

उधर, जो निवेशक परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद पैसे मांगने कंपनी के आफिस आ रहे हैं तो उन्हें हर हाल में बिना पैसे दिए टरका दिया जा रहा है. इन लोगों को उनका पैसा किसी अन्य स्कीम में डालने का प्रलोभन दिया जा रहा है ताकि पैसा कंपनी से बाहर न जाए. ऐसे हजारों लोगों ने पिछले दिनों पीएसीएल के मालिकों के घरों के सामने प्रदर्शन किया लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है. कंपनी प्रबंधन अब भी भारतीय सिस्टम को पटाने और खरीदने में जुटा हुआ है. चर्चा है कि इसी कारण अभी तक भंगू गिरफ्तार नहीं हो पा रहा है.

एक चर्चा यह भी है कि भंगू ने सारी संपत्ति देश से बाहर ले जाकर दूसरे देशों में धंधा जमा लिया है. इसने भारत में अपनी कंपनियों में खुद की पोजीशन ऐसी कर ली है कि मालिक के रूप में दूसरे लोग फंसेंगे, वह खुद को बेदाग निकाल लेने में सफल रहेगा. मास्टर माइंड निर्मल सिंह भंगू के इस खेल पर से आंतरिक सर्वे एजेंसी ने परदा उठाया है.

पर्ल्स और पीएसीएल के संस्थापक निर्मल सिंह भंगू और उनके रिश्तेदारों का पीएसीएल लिमिटेड की तीन में से दो मातृ कंपनियों पर नियंत्रण है. ये ब्योरा 61 वर्षीय भंगू के उस दावे के बाद सामने आ रहा है जिसमें उन्होंने खुद को कंपनी का ‘सलाहकार’ होने का दावा किया. जिन दिनों बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पीएसीएल लि. से 5.85 करोड़ निवेशकों से जुटाए गए 49,100 करोड़ रुपये लौटाने के लिए कहा था तब भंगू ने सेबी को बताया कि उन्हें कारण बताओ नोटिस गलत भेजा गया है.

पीएसीएल की वार्षिक रिपोर्ट में उसके शीर्ष शेयरधारकों में तीन कारोबारी इकाइयों के नामों का उल्लेख है. ये सिंह एंड सिंह एंड सिंह टाउनशिप डेवलपर्स लिमिटेड याशिका फिनलीज लि. और अलार्मिंग फिनवेस्ट लि. थीं, जिनके पास पीएसीएल की कुल 20 फीसदी हिस्सेदारी थी. निर्मल सिंह भंगू के पास याशिका फिनलीज की 8.84 फीसदी हिस्सेदारी है. निर्मल सिंह भंगू के रिश्तेदार हरविंदर सिंह भंगू की याशिका में 9.55 फीसदी हिस्सेदारी है. शेयर बाजारों को दी गई जानकारियों में इस शख्स और भंगू के बीच संबंध को स्पष्ट नहीं किया गया. इसमें हरविंदर को दिल्ली के पश्चिम विहार का निवासी बताया गया है और पिता / पति के कॉलम में ‘निर्मल सिंह भंगू’ लिखा था. इस प्रकार यह भंगू का बेटे हो सकता है. परिवार के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि भंगू के बेटे का नाम हरविंदर था, जो कुछ साल पहले गुजर गया. उनकी दो बेटियां ऑस्ट्रेलिया में कारोबार का प्रबंधन करती हैं. याशिका की स्थापना वर्ष 1994 में की गई थी.

ऐसे तमाम खेल, गणित, तिकड़मों के जरिए भंगू खुद बचा लेने का मंसूबा पाले हुए है. देखना है कि भारतीय न्याय प्रणाली, भारतीय जांच व्यवस्था भारत के इस सबसे बड़े चारसौबीस को सीखचों के पीछे पहुंचाने और निवेशकों को उनका वाजिब धन दलाने में में कामयाब हो पाती है या फिर सबको चकमा देकर भंगू भारत से भागकर विदेशों में ऐश का जीवन बसर करता रहेगा व भारत के करोड़ों निवेशक अपनी गाढ़ी कमाई के लिए खून के आंसू रोते रहेंगे.

भड़ास4मीडिया के स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) के हेड सुजीत कुमार सिंह प्रिंस की रिपोर्ट. संपर्क: 09170257971

पूरे मामले को समझने के लिए इन खबरों को भी पढ़िए…

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पीएसीएल का फ्रॉड और भंगू का झूठ : इनके सामने सहाराश्री तो बेचाराश्री नजर आते हैं

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दो बड़े अफसरों ने मतंग सिंह की गिरफ्तारी को रोकने का प्रयास किया था, जांच शुरू

: मतंग सिंह की गिरफ्तारी में अधिकारियों की भूमिका की जांच : केंद्रीय गृह मंत्रालय में एक शीर्ष नौकरशाह और सीबीआई में एक संयुक्त निदेशक जांच के दायरे में हैं जिन्होंने सारदा घोटाला मामले में कुछ दिनों पहले गिरफ्तार हुए पूर्व कांग्रेसी मंत्री मतंग सिंह की गिरफ्तारी को कथित रूप से रोकने का प्रयास किया था . एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि समझा जाता है कि सीबीआई ने इस सिलसिले में प्रधानमंत्री कार्यालय को एक रिपोर्ट भेजी है.

शीर्ष सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह को अधिकारियों ने इन खबरों से अवगत कराया है कि मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने सिंह की गिरफ्तारी को कथित रूप से रोकने का प्रयास किया था. सिंह को सीबीआई ने शनिवार को कोलकाता में गिरफ्तार किया. सूत्रों ने बताया, ‘‘गृह मंत्री को मामले की जानकारी है और अधिकारी से उसकी स्थिति स्पष्ट करने को कह सकते हैं.’’

समझा जाता है कि गृह मंत्री ने संकेत दिए हैं कि अगर कोई भी व्यक्ति किसी भी खराब आचरण में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. सीबीआई के संयुक्त निदेशक (नीति) आर. एस. भट्टी ने इस सिलसिले में सवालों का जवाब नहीं दिया. वह मीडिया मामलों के प्रभारी भी हैं. बाद में सीबीआई प्रवक्ता से मीडिया को बताने को कहा गया कि मामले की जांच चल रही है और इसलिए एजेंसी कोई टिप्पणी नहीं करेगी.

गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि अभी तक अधिकारी के खिलाफ कोई ठोस मामला नहीं दिख रहा है और मीडिया में जो खबरें आई हैं वे ‘‘अफवाह’’ हैं. रिजिजू ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘अभी तक कुछ भी ठोस नहीं है, केवल अफवाह है . अगर कुछ ठोस दिखता है तो हम उस मुताबिक काम करेंगे.’’ मुद्दे के बारे में पूछने पर सीबीआई निदेशक अनिल सिन्हा ने कुछ भी कहने से मना कर दिया. सिन्हा ने कहा, ‘‘क्या मैं इस तरह के विषय पर कभी बात करता हूं.’’

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1500 करोड़ के चिटफंड घोटाले के मुख्य आरोपी कमल सिंह का सबसे खास एजेंट मिहिर मौलिक जेल गया

जादूगोड़ा : झारखंड के राजकॉम 1500 करोड़ के चिटफंड घोटाले के मुख्य आरोपी कमल सिंह के सबसे मुख्य एजेंट मिहिर मौलिक को जादूगोड़ा पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. इसके बाद निवेशकों मे भारी खुशी का माहौल है. अब निवेशक जल्द से जल्द कमल सिंह की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं. मिहिर मौलिक पर जादूगोड़ा थाना क्षेत्र के रहने वाले कुशों मुखी ने ठगी, जातिसूचक गालीगलोच करने, चेक बाउंस होने एवं नौकरी के नाम पर 15 लाख रुपया ठगी का आरोप लगाकर जादूगोड़ा थाना मे मामला दर्ज़ करवाया. इसके बाद कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी अरविंद प्रसाद यादव ने मिहिर मौलिक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. उस पर चारसौबीसी एवं एसटीएससी समेत अन्य धाराओ में मामला दर्ज़ किया गया है.

कमल सिंह के सबसे विश्वस्त साथी एवं बड़े एजेंट यूसिल बाग्जाता में कार्यरत अधिकारी (सहायक अधीक्षक माइंस) मिहिर चंद्र मौलिक ने कमल के चिटफंड कंपनी में लगभग 200 करोड़ से अधिक का निवेश कराया था, जिसमें विदेशों से भी बड़ी मात्रा में पैसा का निवेश कराया गया था. कमल के भाग जाने के बाद मिहिर मौलिक भी जादूगोड़ा से फरार हो चुका था. मिहिर चंद्र मौलिक के ऊपर जादूगोड़ा थाना में कई लोगों ने धोखाधड़ी और ठगी का मामला दर्ज कराया. इसके बाद पुलिस द्वारा मिहिर मौलिक के गिरफ्तारी के लिए वारंट निकाला जा चुका था. मिहिर पर वारंट निकाले हुए लगभग 14 माह हो चुके हैं फिर भी वह गिरफ्तारी से दूर था. मिहिर के फ़रारी के बाद कई निवेशकों का कहना है कि मिहिर आराम से कोलकाता में रह रहा था और करोडो की लागत से मौलिक बाजार बना रखा है. मिहिर मौलिक कमल के हर राज से वाकिफ है और कमल के फ़रारी के बाद ज्यादातर एजेंट उन्ही के यहाँ शरण लिए हुए थे. पिछले 14 महीनो से फरार मिहिर मौलिक अचानक से तीन दिनों पहले जादूगोड़ा स्थित अपने क्वाटर पहुंचा था जहां उसके आने की खबर से निवेशक उसके घर जाकर पैसा वापसी की मांग को लेकर हंगामा कर रहे थे. ज्योतिका चक्रवर्ती के नेतृत्व में महिलाओं ने मिहिर के क्वाटर जाकर जबर्दस्त हंगामा किया. इधर मिहिर की गिरफ्तारी के बाद निवेशकों ने जल्द से जल्द मुख्य आरोपी कमल सिंह एवं दीपक सिंह की गिरफ्तारी की मांग की है.

जादूगोड़ा से संतोष अग्रवाल की रिपोर्ट.

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मुकर गए चिटफंडिये भंगू के चेले, नाराज पत्रकारों ने सेलरी के लिए पी7 आफिस में फिर अनशन शुरू किया

जनता के अरबों-खरबों रुपये दबाए बैठी चिटफंड कंपनी पीएसीएल की तरफ से एक चैनल शुरू किया गया था, पी7 न्यूज नाम से. अब जबकि पीएसीएल और इसके मालिक भंगू पर सीबीआई, ईडी, आईटी, सेबी समेत कई एजेंसियों ने पूरी तरह शिकंजा कस दिया है, इस कंपनी के प्रबंधन से जुड़े लोगों ने जनता का जमा धन लौटाने की बात तो छोड़िए, अपने कर्मचारियों तक का बकाया देने से इनकार करना शुरू कर दिया है. पी7 प्रबंधन ने एक बार फिर कर्मचारियों के साथ धोखा किया है.  पिछले दिनों हड़ताली कर्मियों और प्रबंधन के बीच हुए समझौते के मुताबिक प्रबंधन को कर्मचारियों को सैलरी 15 दिसंबर को देना था, लेकिन वो अब तक नहीं दिया है… इससे नाराज सौ से ज्यादा कर्मचारी आज से P7 ऑफिस कार्यालय में धरने पर बैठ गए हैं…

इस बीच कर्मचारियों के धरना प्रदर्शन की खबर मिलते ही डायरेक्टर केसर सिंह, डायरेक्टर शरद दत्त, एचआर हेड विधु शेखर समेत सभी प्रबंधन से जुड़े लोग दफ्तर से नदारद हो गए हैं… आंदोलनरत कर्मचारियों का कहना है जब तक उनको सैलरी और सेटलमेंट की राशि नहीं मिल जाती है तब तक वे यहां से नहीं जाएंगे…. पिछले महीने ही हंगामों के बीच सिटी मजिस्ट्रेट और तमाम अधिकारियों की मौजूदगी में समझौता कराया गया था… इस समझौते के तहत 15 दिसंबर को माह नवंबर की सैलरी और 30 नवंबर को सेटलमेंट की पहली किस्त मिल जानी चाहिए थी…. हैरत की बात तो ये है कि पी7 प्रबंधन ने सिटी मजिस्ट्रेट की तरफ से कराए गए आधिकारिक समझौते को ठेंगा दिखा दिया…..

कर्मचारियों का कहना है कि प्रबंधन निहायत ही नीच है और वो बार बार समझौते का उल्लंघन कर रही है…. कर्मचारियों का आरोप है कि 15 दिसंबर के बाद रोज प्रबंधन की तरफ से कहा जाता है कि आज, कल सैलरी आ जाएगी लेकिन अब दस दिन से ज्यादा हो गए है… आलम ये है कि कर्मचारी परेशान हैं और वे अब सोचकर आए हैं कि जब तक प्रबंधन सैलरी व सेटलमेंट की राशि नहीं देगी तब कर सभी लोग यहीं मौजूद रहेंगे…. कर्मचारियों के रुख देखते हुए डायरेक्टर केसर सिंह और एचआर हेड विधु शेखर मौके से फरार हो गए… कर्मचारी इस मूड में हैं कि जब तक समझौते का हूबहू पालन नहीं होता, वे धरना प्रदर्शन से नहीं उठेंगे…..

अनशन स्थल की अन्य तस्वीरें देखने के लिए इस शीर्षक पर क्लिक करें:  पी7 चोर है… पी7 शर्म करो… पी7 प्रबंधन हॉय हॉय…

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सेबी का आदेश- पीएसीएल नामक कंपनी के पास कोई मान्यता नहीं, जनता पैसा न लगाए

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चैनल बंद कर भाग रहे निदेशकों को पी7 न्यूज कर्मचारियों ने घेरा, आफिस में बवाल

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‘पी7 न्यूज’ के निदेशक केसर सिंह को हड़ताली कर्मियों ने बंधक बनाया, चैनल पर चला दी सेलरी संकट की खबर

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और मीडियाकर्मियों ने अपने हिस्से की स्क्रीन पर कब्जा जमा लिया….

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पी7 न्यूज प्रबंधन अपने कर्मियों को 15 जनवरी तक फुल एंड फाइनल पेमेंट दे देगा, बवाल खत्म

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पी7 न्यूज में हड़ताल, प्रसारण ठप, कई माह से सेलरी न मिलने के कारण लेबर कोर्ट गए कर्मी

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पी7 चैनल बिक गया, पी7 हरियाणा के भी बिकने की चर्चाएं

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पर्ल ग्रुप पर पीएफ डिपार्टमेंट का छापा, बड़ा गड़बड़-घोटाला मिला

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‘PACL’ की असलियत : परिपक्वता अवधि पूर्ण होने के बाद भी एजेंट का लाखों रुपये दाबे बैठी है कंपनी

लगता है पीएसीएल कंपनी भी धराशाई होने की कगार पर है. यही कारण है कि यह कंपनी अपने निवेशकों का धन उन्हें परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद लौटा नहीं रही है. भड़ास4मीडिया को भेजे एक मेल में पीएसीएल के एक निवेशक सुरेंद्र कुमार पुनिया ने बताया है कि उनका इस कंपनी में एजेंट कोड Agent Code 1950022771 है. इनके कुल आठ एकाउंट हैं जिसमें कुल चार लाख रुपये यानि 4,00,000/- जमा हैं. इनकी परिपक्वता अवधि दिसंबर 2013 और जनवरी-फरवरी 2014 थी. पर कंपनी पैसे लौटाने में आनाकानी कर रही है. सुरेंद्र ने PACL Amount Refund मामले में भड़ास से दखल देने की गुजारिश की है.

ज्ञात हो कि ऐसे मामलों को सेबी देखती है और सेबी ही वो प्लेटफार्म है जहां निवेशक / एजेंट सीधे मेल कर रिफंड की फरियाद लगा सकते हैं. Surendra Punia की मेल आईडी surendrak.punia@gmail.com है.  सुरेंद्र पुनिया तो मात्र एक उदाहरण हैं. ये मेल लिख भेज लेते हैं इसलिए इनकी बात सुनी भी जा रही है, प्रकाशित भी हो रही है. लेकिन ऐसे हजारों एजेंट हैं जो अपढ़ हैं और मेल वगैरह का इस्तेमाल नहीं करते. वे लोग अपनी शिकायत बात कहां रख पाते होंगे. पीएसीएल के कई एजेंटों का कहना है कि उन्हें परिपक्वता अवधि पर पैसा लौटाने की जगह कंपनी किन्हीं दूसरी योजनाओं में पैसा लगवा दे रही है, वह भी बिना सहमति लिए. ऐसी गुंडागर्दी देखकर आज ये निवेशक / एजेंट उस क्षण को कोस रहे हैं जब उन्होंने अपना पैसा पीएसीएल में लगाने का फैसला किया.

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सहारा की कई कंपनियां आज भी मार्केट से पूंजी उठाने में जुटीं हैं… कहां है सेबी?

चिटफंड कम्पनी टिम्बरवर्ल्ड के खिलाफ निर्णय सुनाते हुए दिल्ली की तीसहजारी कोर्ट ने सेबी के हुक्मरानों को भी खरी-खरी सुना दी. कोर्ट ने कहा है कि यदि नियामक संस्थाओं ने सुस्ती या लापरवाही न दिखाई होती और समय पर सख्त कार्यवाई की होती तो आज निवेशकों के करोड़ों रुपये डूबने से बच जाते. कोर्ट ने कम्पनी पर 25 करोड़ का जुर्माना लगाया है. इस कम्पनी ने नियमों की कमजोरी का फायदा उठाते हुए बाजार से सामूहिक निवेश के जरिये 22 करोड़ रुपये उठाये और फिर अन्य चिटफंड कम्पनियों की तरह कभी वापस नहीं किया. Continue reading

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सहारा ग्रुप अपने निवेशकों का धन वापस नहीं कर रहा, पढ़ें एक पीड़ित का पत्र

देवरिया : बड़े पैमाने पर जनता के धन को पानी की तरह से अपने सुख और ऐशो आराम में व्यतीत करने वाला सहारा ग्रुप अपने ग्राहकों/ निवेशकों / उपभोक्ताओं का धन परिपक्तवता अवधि पूर्ण हो जाने के बाद भी उसका भुगतान नहीं कर रहा है। जब भी इस सम्बन्ध में सहारा के कर्मचारी/अधिकारियों से बातचीत की जाती है वे कई तरह के बहाने बनाकर टरका दे रहे हैं। दबाव देने पर मारपीट और बलवा करने पर उतारू हो जाते हैं तथा जबरन झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देते हैं।

इन दिनों शादी व्याह का सीजन चल रहा है। लोगों को अपनी बेटे बेटियों की शादी करनी है। कई जरूरतमंद ऐसे हैं जिनको अपनी बीमारी का ईलाज कराना है। सहारा के अभिभावक कहे जाने वाले सुब्रत राय सहारा और दो अन्य लोग पब्लिक के पैसे के साथ शतरंजी खेल खेलने की वजह से जेल की सलाखों के पीछे हैं तो बाकी बचे इनके कर्मचारियों को क्यों नहीं जेल में डाल दिया जा रहा है जो पब्लिक का पैसा लेने के बाद उनको वापस नहीं कर रहे हैं। क्या यह मामला अपराध की श्रेणी में नहीं आता है।  उदाहरण के लिए देवरिया जिले के एक उपभोक्ता की पीड़ा जान लेना लाजमी होगा…

दिनांक 3 दिसम्बर 2014
सेवा में,                            
क्षेत्रीय प्रबन्धक
सहारा क्रेडिट कोओपरेटिव सोसायटी लिमिटेड
सिविल लाइन्स रोड, देवरिया
    एवं
सहारा क्रेडिट कोओपरेटिव सोसायटी लिमिटेड
रजिस्टर्ड आफिस- सहारा इण्डिया भवन
1, कपूरथला काम्पलेक्स,
अलीगंज, लखनऊ-226024

विषय- परिपक्वता अवधि व्यतीत हो जाने के बाद भी भुगतान का नही किया जाना।
महोदय,
निवेदन है कि प्रार्थी मिनहाज अहमद पुत्र स्व0 मुस्ताक अहमद, निवासी वार्ड नम्बर 16, न्यू कालोनी (सच्चिदानन्द मार्ग), थाना कोतवाली देवरिया का निवासी है। प्रार्थी ने दिनांक 31-7-2009 को सहारा म्यूचयुअल बेनिफिट स्कीम के तहत एक हजार प्रतिमाह मूल्यवर्ग का खाता 60 माह हेतु खुलवाया था। जिसकी सदस्यता संख्या 10081103096 एवं खाता संख्या 10082918078 है।
जिसकी परिपक्वता पूर्ण हुए तीन माह से अधिक हो गए है। उक्त परिवक्ता धनराशि 73140-00 की वापसी के बाबत विदड्राल स्लिप भी दिनांक 22-9-2014 को बन चुका है। जिसमें गवाह के रूप में सहारा के एजेन्ट श्री संजय सिंह पुत्र केदार सिंह ग्राम बगहा मठिया पोस्ट व जिला देवरिया है व उनका कोड संख्या 1008510622 है का हस्ताक्षर भी है। लेकिन अत्यन्त दुःख के साथ अवगत कराना पड़ रहा है कि प्रार्थी को प्रतिदिन कार्यालय बुलाकर भुगतान हेतु बुलाया जाता है लेकिन धन का भुगतान न करके मात्र आश्वासन दिया जा रहा है। जबकि प्रार्थी की पत्नी श्रीमती रूही मिनहाज का स्वास्थ्य अत्यधिक खराब है तथा उनकी ईलाज के उक्त धन की सख्त जरूरत है।
अतः अनुरोध है कि अविलम्ब प्रार्थी के उपरोक्त धन भुगतान कराने की कृपा करें। अन्यथा की दशा में प्रार्थी इस प्रकरण को लेकर इलेक्ट्रानिक एवं प्रिन्ट मीडिया और कानून की शरण में जाएगा तथा इस सम्बन्ध में हुए शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक क्षति और समस्त व्यय के उतरदायी व्यक्तिगतरूप से आप एवं आपकी संस्थान होगी।
प्रार्थी-

मिनहाज अहमद
पुत्र स्व0 मुस्ताक अहमद
निवासी वार्ड नम्बर 16 न्यू कालोनी
(सच्चिदानन्द मार्ग) थाना कोतवाली, देवरिया
मोबाईल नम्बर – 9415387040

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इनामी बदमाश और पुलिस का भगोड़ा मोदी राज में बन गया न्यूज चैनल का डायरेक्टर!

माननीय प्रधानमंत्री जी,  आपसे कुछ सवाल पूछना चाहता हूं. कुछ बताना भी चाहता हूं. सवाल ये है कि एक पत्रकार और प्रबंधन में सूचना प्रसारण मंत्रालय कितना भेदभाव करता है? क्या आपको इसकी जानकारी है? मैं जानता हूं कि आपको नहीं होगी, क्योंकि आपने इस मंत्रालय को गंभीरता से लिया ही नहीं… यही वजह है कि केंद्र कि ये पहली सरकार है जिसने सूचना प्रसारण मंत्रालय को फुल टाइम मंत्री तक नहीं दिया है…

आपको पता है एक पत्रकार जब प्रेस इन्फार्मेशन ब्यूरो यानि पीआईबी की मान्यता लेने के लिए आवेदन करता है तो उसकी महीनों पुलिस जांच होती है… मसलन दिल्ली में जहां वो रहता है, उस थाने से पुलिस की रिपोर्ट ली जाती है… पत्रकार स्थाई रूप से जहां का निवासी है, वहां से पुलिस की रिपोर्ट मंगाई जाती है… मतलब एक कठिन प्रक्रिया से गुजरने के बाद पत्रकार को पीआईबी की मान्यता मिल पाती है… लेकिन प्रधानमंत्री जी, चैनल का डायरेक्टर बनने के लिए आपका मंत्रालय आंख मूंद लेता है… सारे नियम कायदे कीमती गिफ्ट के नीचे दब कर दम तोड़ देते हैं… इस मामले की पूरी जांच हो तो कई ऐसे मामले खुलेंगे…

एक मसले की जानकारी मैं आपको देता हूं….

मध्यप्रदेश में आपकी ही पार्टी यानि बीजेपी की सरकार है… वहां ग्वालियर की पुलिस ने एक घपलेबाज को ईनामी बदमाश घोषित कर रखा है… यानि इसकी खोज खबर देने वाले को पुलिस की ओर से 2000 रुपये का ईनाम दिया जाएगा…. इस आदमी पर अन्य तमाम गंभीर धाराओं के अलावा धोखाधड़ी यानि 420 का अपराध भी पंजीकृत है… ये अलग बात है कि एमपी की पुलिस इसे गिरफ्तार करना ही नहीं चाहती? वरना वो अब तक गिरफ्तार कर चुकी होती… बहरहाल पुलिस से बचने और उस पर रौब गांठने के लिए इस ईनामी बदमाश ने किसी की सलाह पर दिल्ली में एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल खरीद लिया…. अब ये पैसे और चैनल की आड़ में सरकार को फिरंगी की तरह नचा रहा है….

मोदी जी! हैरानी की बात तो ये है कि जिस कांग्रेस को आप पानी पी-पी कर भ्रष्ट बताते रहे हैं, उस कांग्रेस की सरकार ने इस ईनामी बदमाश को चैनल का डायरेक्टर बनने नहीं दिया… फाइल सालों से इधर उधर घूमती रही… लेकिन किसी मनमोहन की सरकार में कोई इसे डायरेक्टर बनाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया… पर आपकी यानि बीजेपी की सरकार बनते ही ये अपराधी-भगोड़ा एक राष्ट्रीय चैनल का डायरेक्टर बन गया… चैनल का डायरेक्टर बनने के पीछे क्या डील हुई? ये तो जांच का विषय है… लेकिन कहा ये जा रहा है कि जिस शहर का ये रहने वाला है, पहले सूचना प्रसारण मंत्रालय जिस मंत्री के पास था, वो भी उसी शहर के निवासी रहे हैं… वैसे हो सकता है कि मंत्री को पता भी न हो और नीचे के अफसरों ने पूरा खेल कर दिया हो…

बहरहाल ये तो जांच का विषय है, लेकिन जब सरकार के मंत्री मीडिया को जिम्मेदार बनने की नसीहत देते हैं, तब मन में एक ही सवाल उठता है कि क्या मंत्रियों को शर्म नहीं आती? मैं फिर आपको बताना चाहता हूं कि बहुत जरूरी है कि सूचना प्रसारण मंत्रालय को फुल टाइम मंत्री दिया जाए, जिससे कोई अपराधी, भगोडा अय्याश किसी राष्ट्रीय चैनल का डायरेक्टर ना बन पाए…. उसकी सही जगह जहां उसे रहना चाहिए यानि जेलने का इंतजाम किया जाना चाहिए….

लेखक महेंद्र श्रीवास्तव कई न्यूज चैनलों और अखबारों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं. महेंद्र अपना परिचय अपने ब्लाग पर खुद इस प्रकार लिखे हुए हैं- ”सच तो ये है कि लोगों के बारे में लिखते-लिखते खुद को भूल गया हूं। वैसे मैं पत्रकार हूं। करीब 15 साल तक हिंदी के तमाम राष्ट्रीय समाचार पत्रों में काम करने करने के बाद अब दिल्ली पहुंच चुका हूं। यहां मैं न्यूज चैनल से पिछले सात साल से जुड़ा हूं। वैसे मैं यूपी के मिर्जापुर का निवासी हूं, लिहाजा मेरी शुरुआती पढ़ाई यहीं हुई, बाद में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री और कानून की पढाई पूरी की। इसके बाद पूर्वांचल विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिग्री हासिल करने के बाद मीडिया से जुड़ गया। मीडिया से जुडे़ होने के कारण मुझे सत्ता के नुमाइंदों को काफी करीब से देखने का मौका मिलता है। यहां देखता हूं कि हमाम में सब……यानि एक से हैं। इसके साथ ही मीडिया से जुड़े होने की वजह से यहां के भी तमाम ऐसे अनुभव होते है जो मुझे लगता है कि आप तक पहुंचने चाहिए। इसी सच को मैं शब्दों में ढालने की कोशिश करता रहूंगा।” 

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वरिष्ठ पत्रकार ललित पत्ताजोशी पर सीबीआई को शक है…

: सारदा घोटाले की आंच पहुंची मीडिया तक, सीबीआई ने की पूछताछ : भुवनेश्वर। सारदा चिट फंट में सीबीआई जांच की आंच अब पत्रकारों तक भी पहुंच गयी है। वरिष्ठ मीडियाकर्मी ललित पत्ताजोशी के घर सीबीआई ने छापा मारा। सीबीआई ने इस दौरान घंटों तक पत्रकार से पूछताछ की। सीबीआई के इस छापेमारी के बाद मीडिया की भी कलई खुलने लगी है। वरिष्ठ पत्रकार ललित पत्ताजोशी पर सीबीआई को शक है कि उनके सारदा चिट फंड घोटाले में आरोपी सुभांकर नायक से करीबी संबंध हैं।

सुभांकर नायक को कुछ दिनों पहले ही सीशोर ग्रुप के घोटाले के आरोपी के तौर पर गिरफ्तार किया गया है। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने पत्रकार के घर कई दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया। साथ ही नेपल्ली में स्थिन उनके आलीशान घर को भी सीज कर दिया है। सीबीआई के सूत्रों की माने तो नायक पर सीशोर ग्रुप के साथ मिलकर नामी लोगों को प्रभावित करने का आरोप है। इनमें आईएस, आईपीएस अधिकारियों सेमेत कई नेता व व्यापारिक घराने भी हैं। सीबीआई अधिकार का कहन है कि, पूछताछ के दौरान हमे पता चला कि नायक पत्ताजोशी के साथ गहरे संबंध हैं। नायक का कहना है कि वह रुपयों के लेन-देन में पत्ताजोशी की मदद करता था। पत्ताजोशी और नायक के बैंक खाते की भी जांच की जा रही है। हालांकि पत्ताजोशी ने इस बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया। सारदा चिट फंट घोटालें में जांच के घेरे में सिर्फ पत्ताजोशी ही नहीं बल्कि कई अन्य मीडियाकर्मी भी हैं।

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चैनल बंद कर भाग रहे निदेशकों को पी7 न्यूज कर्मचारियों ने घेरा, आफिस में बवाल

नोएडा से खबर है कि पी7 न्यूज चैनल बंद करके भाग रहे निदेशकों को मीडियाकर्मियों ने घेर लिया है. कई महीने से सेलरी न मिलने से नाराज मीडियाकर्मी चैनल के निदेशकों केसर सिंह आदि को उनके केबिन से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं. मीडियाकर्मियों का आरोप है कि चैनल के निदेशकगण सेलरी न देने और बकाया पैसा हड़पने के इरादे से गुपचुप तरीके से चैनल बंद कर फरार होने की तैयारी कर रहे थे.

श्रम विभाग और प्रोविडेंट फंड डिपार्टमेंट समेत कई विभागों की तरफ से इन दिनों चैनल प्रबंधन पर कर्मचारियों को उनका बकाया भुगतान और पीएफ आदि के पैसे देने को लेकर दबाव बनाया जा रहा है. ये कई विभाग चैनल के अंदर अनियमितताओं की जांच भी कर रहे हैं. देश भर में चिटफंड के कारोबार से हजारों करोड़ रुपये इकट्ठे करने वाली कंपनी पीएसीएल इन दिनों सेबी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद से संकट में फंस गई है. बावजूद इसके पीएसीएल की तरफ से बैकडेट में निवेशकों से अवैध उगाही का कार्यक्रम जारी है.

ये कंपनी अपने कर्मचारियों को सेलरी देने में खुद को अक्षम बता रही है लेकिन कंपनी के पदाधिकारियों पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है. चैनल के हड़ताली कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि वे बिना सेलरी लिए जाने वाले नहीं हैं, भले ही इसके लिए उन्हें चैनल गेट के सामने आमरण अनशन करने को मजबूर होना पड़े. खबर लिखे जाने तक पी7 न्यूज चैनल के नोएडा मुख्यालय में हंगामा मचा हुआ है. कई मीडियाकर्मियों ने भड़ास को फोन करके जानकारी दी कि चैनल निदेशक सेलरी न देने के लिए चैनल बंद करके भागने की फिराक में थे जिन्हें रोक लिया गया है और उन्हें चैनल से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है.

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‘पी7 न्यूज’ के निदेशक केसर सिंह को हड़ताली कर्मियों ने बंधक बनाया, चैनल पर चला दी सेलरी संकट की खबर

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क्रेडिट कोआपरेटिव सोसायटियों द्वारा बिना रिजर्व बैंक लाइसेन्स के किए जा रहे बैंकिंग कारोबार पर रोक

बाड़मेर : राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुनील अम्बवानी एवं न्यायमूर्ति प्रकाश गुप्ता की खण्डपीठ ने बुधवार को एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटियों द्वारा बिना रिजर्व बैंक लाइसेन्स के किए जा रहे बैंकिंग कारोबार पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने क्रेडिट सोसायटियों द्वारा ऋण देने एवं एटीएम लगाने जैसे बैंकिंग व्यवसाय करने वाली गतिविधियों पर भी रोक लगा दी है।

बाड़मेर निवासी एडवोकेट सज्जनसिंह भाटी ने सहकारी अधिनियम एवं नाबार्ड से पंजीकृत क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटियों द्वारा आकर्षक लुभावनी योजनाएं लाॅंच कर ग्राहकों से करोड़ों की जमाएं स्वीकार करने एवं उंची ब्याज दरों पर कर्ज देने के मामले मे पीआईएल दायर की थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सत्यप्रकाष शर्मा एवं दलपतसिंह राठौड़ ने पैरवी की।

अधिवक्ता सत्यप्रकाश शर्मा ने बताया कि क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटियों द्वारा उंची ब्याज दरों का लालच देकर आम ग्राहकों से जमाएं प्राप्त की जाती थी। ऐसी कईं सोसायटियां बाद मे रफू हो गई और लोगों के करोड़ों डूब गये। मारवाड़ सहित पूरे राजस्थान मे सैकड़ों की संख्या मे ऐसी क्रेडिट कोऔपरटिव सोसायटियां खोल दी गई हैं। याचिका के मुताबिक सहकारी अधिनियम एवं नाबार्ड के तहत पंजीकृत इन सोसायटियों के पास अपने ही सीमित सदस्यों से जमाएं प्राप्त कर उनके आर्थिक स्वावलंबन के काम करने का अधिकार होता हैं। जबकि ये सहकारिता कानून की आड़ मे सरेआम बैंकिंग व्यवसाय कर रहे हैं।

इन सोसायटियों द्वारा अखबारों, इलेक्ट्रोनिक मीडिया एवं होर्डिंग्स लगा कर जमाओं के आॅफर आमजन को दिये जा रहे हैं। जबकि बैंकिंग कारोबार के लिए रिजर्व बैंक से लाइसेन्स लेना अनिवार्य होता हैं। सोसायटियों मे जमाकर्ताओं के निवेष रूपयों की कोई सिक्युरिटी रिजर्व बैंक मे नही रहती। याचिका मे ऐसी कईं सोसायटियों का उल्लेख किया गया था जो जमाएं लेकर बंद कर दी गई और संचालक फरार हो गये।

याचिका मे संजीवन क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटी, नवजीवन क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटी एवं सांईकृपा क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटी, मारवाड़ क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटी को भी पक्षकार बनाया गया था। हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार, राज्य सरकार एवं रिजर्व बैंक आॅफ इण्डिया को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

बुधवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सत्यप्रकाश शर्मा एवं दलपतसिंह राठौड़ ने दलील दी कि इस तरह की सोसायटियों द्वारा उंची ब्याज दरों पर कमजोर वर्गों के लोगों को कर्ज दिया जाता है तथा उनसे ही जमाएं प्राप्त की जाती हैं। आॅफर के दौरान पहुंचने वाले इन लोगों को बैकडोर से सदस्य बना लिया जाता है जबकि सहकारी कानून में ऐसे सदस्य बनाये जाने का कोई प्रावधान नही है।

दुर्ग सिंह राजपुरोहित की रिपोर्ट.

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