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सियासत

परमाणु युद्ध अंतिम विकल्प है!

विश्व दीपक-

अमरीका ने मुदरो को बंधक बनाकर वेनेजुएला को कम रूस और चीन को ज्यादा एक्सपोज किया है. अमरीकी दादागीरी ने उस सोच की कमजोरी को जाहिर कर दिया जो रूस,चीन के भरोसे बहुध्रुवीयता की बात करती है.

रूस और चीन दावा कुछ भी करें लेकिन उनके अंदर न वो क्षमता है, न तकनीक कि वो अमरीकी वर्चस्ववाद को निर्णायक चुनौती दे सकें. हमास-इजराइल युद्ध के बाद वेनेजुएला पर अमरीकी हमला और ताईवान को हथियार बेचना इस बात का सबूत है.

परमाणु युद्ध अंतिम विकल्प है. इसलिए उसकी बात नहीं कर रहा.

वेनेजुएला का पूरा डिफेंस सिस्टम चीन का था लेकिन 150 अमरीकी विमानों को चीन द्वारा निर्मित डिफेंस सिस्टम पकड़ नहीं सका.

अमरीकी हेलीकॉप्टर मुदरो के घर की छत पर मंडराता रहा लेकिन चीनी राडार ऐक्टिव ही नहीं हुआ. डिफेंस मिसाइल सिस्टम सोया रहा या अमरीका ने उसे निष्क्रिय कर दिया.

हालांकि चीनी सिस्टम पुराना था लेकिन कहीं तो कोई अलार्म बजना चाहिए था. चीनी डिफेंस सिस्टम का यही हाल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी हुआ था.

भव्य ड्रोन शो आयोजित करना और रोबोट का मास प्रोडक्शन करना अलग बात है, वास्तविक अर्थों में अमरीकी सम्राज्यवाद को चुनौती देने की काबिलयत होना अलग बात.

गौर कीजिए : मात्र 30 मिनट में अमरीका का पूरा ऑपरेशन समाप्त हो गया. अमरीकी सेना मुदरो को उनके घर से युद्ध अपराधी की तरह घसीटकर ले गई. न रूस कुछ कर सका न ही चीन. हद तो यह है कि चीन का प्रतिनिधिमंडल भी काराकस में ही था.

बाद में रूस और चीन ने जैसे प्रतिक्रियाएं दी उससे जाहिर होता है कि उन्हें अमरीका कार्रवाई की भनक तक नहीं थी.

अमरीकी साम्राज्यवाद का नष्ट होना बहुत ज़रूरी है लेकिन उसके उपागम क्या होंगे दुनिया को इस पर नये सिरे से विचार करना होगा. केवल रूस और चीन कारगर साबित नहीं हो रहे, न होंगे.

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