हरियाणा की ग्रामीण महिलाओं के मुद्दे ‘पारो वॉयस’ यूट्यूब चैनल लगातार उठा रहा है, वो भी बगैर किसी बड़े चेहरे और नाम के. इस प्लेटफॉर्म पर जैसा रिपोर्टर है, वैसे ही उनके गेस्ट हैं — आम घरेलू महिलाएं, जिन्हें सुनने से पुरुष लगातार इंकार करते रहे हैं.
एक खास बात यह है कि ‘पारो वॉयस’ उन महिलाओं के मुद्दों और जिंदगी की दुश्वारियों पर भी बात करता है, जिन्हें वहां की स्थानीय महिलाओं से अलग समझा जाता है और जिन्हें सामान्य नागरिक अधिकारों से भी वंचित कर दिया गया है.
ऐसी ही महिलाओं की उम्मीद का नाम है — “पारो वॉयस”. ये वही महिलाएं हैं, जो हरियाणा में दूसरे राज्यों से शादी करके लाई गई हैं, लेकिन उनके साथ घर में हरियाणा की बहू की तरह अपनापन का व्यवहार नहीं किया जाता. इन सभी महिलाओं की समस्याओं और आपबीती को बताने का मंच है ‘पारो वॉयस’.
इस चैनल की रिपोर्टर अंजुम बानो खुद झारखंड से शादी करके हरियाणा आई हैं. यहां आने के बाद उन्हें न सिर्फ सामाजिक भेदभाव झेलना पड़ा, बल्कि आसपास के लोगों के ताने भी सुनने पड़े — “अरे ये तो मोलकी है, बिहारी है, पारो है” जैसे अपमानजनक संबोधनों का सामना करना पड़ा. लेकिन अंजुम ने इसे चुपचाप स्वीकार करना ठीक नहीं समझा. उन्होंने अपनी जैसी महिलाओं की आवाज़ उठाने के लिए ही ‘पारो वॉयस’ नाम से यह यूट्यूब चैनल शुरू किया.
जब अंजुम बानो से पूछा गया कि ‘पारो वॉयस’ क्यों..? इससे आप जैसी महिलाओं को क्या हासिल हो रहा है?
तो वह कहती हैं —”हम बगैर किसी उम्मीद के काम करते हैं. दूर-दराज से शादी करके हरियाणा लाई गई महिलाओं को जो कुछ झेलना पड़ता है, उसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते. मैं सोशल मीडिया की ताकत को थोड़ा-बहुत समझती थी. जब मैं अपनी जैसी महिलाओं के बारे में जानने, उनके दुख-सुख सुनने के लिए तमाम प्लेटफॉर्म्स पर सर्च करने लगी, तो कहीं भी हमारी बात सुनने या ढंग से अपनी तकलीफें बताने की कोई जगह नहीं मिली. तभी मैंने ठान लिया कि मुझे अपनी जैसी बहनों के लिए कुछ करना है. काफी सोच-विचार के बाद ही ‘पारो वॉयस’ का आइडिया आया.
लोग मुझे पारो कहते हैं, तो हां, मैं हूं पारो — क्योंकि मैंने तमाम मुश्किलों को पार करके ही इस प्लेटफॉर्म पर जगह बनाई है, आज ‘पारो वॉयस’ की रिपोर्टर हूं. शुरुआत में बहुत दिक्कतें आईं. मैं हाईस्कूल पास भी नहीं हूं. मुझे नहीं पता था कि चैनल कैसे बनेगा, और अपने घरेलू कामकाज से वक्त निकालकर यह सब कैसे कर पाऊंगी. लेकिन मेरे पास एक जुनून था — अपनी जैसी बहनों की आवाज़ लोगों तक पहुंचाने का. हमें भी कहना है — हम भी हैं! हमारे सुख-दुख भी सुने जाएं. धीरे-धीरे रास्ता बनता गया. कुछ लोगों ने सहयोग किया और फिर ‘पारो वॉयस’ का माइक लेकर मैं चल पड़ी.”
शुरुआत में सबसे बड़ी मुश्किल थी — घर की दहलीज पार करके फील्ड में जाकर लोगों से बात करना और स्टोरी के लिए काम करना. घरवाले मुश्किल से इसके लिए तैयार हुए. फील्ड में ये महिलाएं सामान्य बातचीत में तो अपनी तकलीफें बताते हुए रो पड़ती थीं, लेकिन वही बातें माइक पर कैमरे के सामने कहने से हिचकती थीं. धीरे-धीरे, कई-कई दिन उनसे बात करने के बाद वे अपनी बात कहने के लिए तैयार हुईं.
‘पारो वॉयस’ से अपनी तकलीफें बयां करने पर इन महिलाओं को किसी तरह का सीधा लाभ भले न दिखे, लेकिन आप एक बार मेरी उन बहनों से मिलिए, जिन्होंने मेरे माइक पर अपनी कहानियां साझा की हैं, अपने मुद्दे उठाए हैं. हम बहनों के लिए अपनी बात कह देना ही इस समाज में कितनी बड़ी बात है, यह आप तभी समझेंगे जब उनसे मिलकर बात करेंगे.”
हरियाणा के यमुनानगर में ‘पारो वॉयस’ की कुछ गेस्ट्स से मिलने पर यह साफ हो जाता है कि वाकई में ‘पारो वॉयस’ अपनी टैगलाइन “अनसुनी आवाज़ों की दुनिया” पर खरा उतर रहा है. इन महिलाओं को आपने-हमने शायद ही कभी सुना होगा. आज के समृद्ध समाज और घरों में कैद इन महिलाओं की कहानियां आपके होश उड़ाने के लिए काफी हैं.
चैनल के लिंक पर जरूर जाएं —
https://www.youtube.com/@PAROVOICEin
‘पारो वॉयस’ और इसकी रिपोर्टर अंजुम बानो सिर्फ हरियाणा ही नहीं, बल्कि देशभर में महिलाओं के प्रति सकारात्मक बदलाव की अलख जगा रही हैं.



