नवभारत अखबार को पीएफ के 20 लाख रुपये 15 दिन में जमा करने के निर्देश

मुम्बई से खबर आरही है कि यहां इंपलाई प्रोविडेंट फंड मामले में दैनिक नवभारत अखबार के मुंबई संस्करण के कर्मचारियों की पहली जीत हुई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के नई मुंबई स्थित वाशी कार्यालय के असिस्टेंट पीएफ कमिश्नर ने आदेश जारी कर नवभारत प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर अप्रैल 2017 से जून 2017 तक 3 माह का 20 लाख 1373 रुपए कर्मचारियों का पीएफ रकम जमा करने का आदेश जारी किया है। इस आदेश से नवभारत अखबार प्रबंधन में हड़कंप का माहौल है।

बता दें कि महाराष्ट्र मीडिया इंप्लाइज यूनियन ने जून 2017 में शिकायत दर्ज कराई थी कि नवभारत प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों का सिर्फ बेसिक पर पीएफ की कटौती की जाती है, वह भी रुपये 15000 की सीलिंग लगाकर। इस 14 माह के दौरान 11 बार सुनवाई की डेट पड़ी जिसके बाद असिस्टेंट पीएफ कमिश्नर ने शिकायत को सही पाया और प्रबंधन द्वारा मुहैया कराए गए डॉक्यूमेंट के आधार पर यह आदेश जारी किया।

आदेश के साथ असिस्टेंट पीएफ कमिश्नर ने एक्सप्रेस पब्लिकेशन मदुराई वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य के सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का हवाला दिया है, जो 2004 का है। इसके आधार पर असिस्टेंट पीएफ कमिश्नर ने कहा है कि नवभारत प्रबंधन को एचआरए और ओवरटाइम छोड़कर बाकी का जो ग्रास होता है उसके आधार पर 12% की दर से पीएफ की रकम डिडक्ट करना होगा। असिस्टेंट पीएफ कमिश्नर ने अपने आदेश में मद्रास हाईकोर्ट, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ग्वालियर बेंच, गुजरात हाईकोर्ट के अलावा कई अन्य अदालतों के फैसलों का उल्लेख किया है।

उन्होंने एंप्लोई प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविजन एक्ट 1952 का हवाला देते हुए अपने आदेश में कहा है कि मीडिया कर्मियों के लिए ईपीएफ स्कीम 1952 के पैरा 80 धारा 2 के तहत प्रावधान है कि मीडिया कर्मियों का डिडक्शन विदाउट सीलिंग किया जाए। हालांकि इंफोर्समेंट ऑफिसर की जांच पड़ताल में नवभारत प्रबंधन ने पूरे कागजात देने में देर लगाई जिससे फैसले में देरी हुई।

शिकायत के 14 माह बाद आदेश जारी हुआ लेकिन देर आए दुरुस्त आए। आगे की एरियर्स की गणना, 2006 से 2018 तक की, जारी है। संभवत कुछ समय बाद उस पर भी फैसला आएगा कि नवभारत प्रबंधन को 2006 से लेकर अब तक ब्याज सहित पीएफ का कितना एरियर भुगतान करना होगा। बताते हैं कि इस ऑर्डर के जारी होने के बाद नवभारत के मालिकों और प्रबंधन में हड़कंप मच गया है। इस बारे में ये भी खबर है कि कंपनी प्रबंधन की तरफ से पुनर्विचार का आवेदन लगाया जा सकता है।

शशिकान्त सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट
9322411335

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