नवभारत अखबार को पीएफ के 20 लाख रुपये 15 दिन में जमा करने के निर्देश

मुम्बई से खबर आरही है कि यहां इंपलाई प्रोविडेंट फंड मामले में दैनिक नवभारत अखबार के मुंबई संस्करण के कर्मचारियों की पहली जीत हुई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के नई मुंबई स्थित वाशी कार्यालय के असिस्टेंट पीएफ कमिश्नर ने आदेश जारी कर नवभारत प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर अप्रैल 2017 से जून 2017 …

नवभारत अखबार में पीएफ अधिकारियों का छापा, पकड़ी बड़ी गड़बड़ी

मुम्बई से एक बड़ी खबर आरही है। यहां मुम्बई के चर्चित हिंदी दैनिक नवभारत के नई मुम्बई में सानपाड़ा स्थित कार्यालय में निर्भीक कर्मचारी और मजीठिया क्रांतिकारी अरुण कुमार गुप्ता की शिकायत पर भविष्य निधि (पीएफ़) डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने छापा मारा है। अरुण गुप्ता ने इस खबर की पुष्टि करते हुए फेसबुक वॉल पर ये लिखा है…

‘नवभारत’ के 805 लाख के लोन घोटाले में 7 मुलजिमों पर इल्जाम तय

इंदौर। बैंक ऑफ महाराष्ट्र को लोन के बहाने 805 लाख की चपत लगाने के मामले में ‘नवभारत’ समाचार पत्र के कर्ताधर्ताओं सहित 7 मुलजिमों के खिलाफ इंदौर की सीबीआई की विशेष अदालत में इल्जाम तय हो गए हैं। इस बीच  बैंक ने अर्जी देकर लोन संबंधी असली दस्तावेज दिलाने के लिए अदालत में गुहार लगाई है। मामले में अब नए साल में सुनवाई होगी।

नवभारत छत्तीसगढ़ कर रहा अपने कर्मचारियों के साथ छलावा

भले ही नवभारत छत्तीसगढ़ नियमित कर्मचारियों को मजीठिया वेतनमान देने का दावा करता हो लेकिन यह आधी सच्चाई है। दरअसल कर्मचारियों के साथ मजीठिया वेतनमान के नाम पर धोखाधड़ी की जा रही है। नवभारत छत्तीसगढ़ को नवभारत रायपुर प्रेस व रामगोपाल इन्वेस्टमेन्टर्स प्रा. लि. नामक कंपनी संचालित करती है जिसके मालिक समीर माहेश्वरी हैं। हालांकि कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने और उनका हर संभव सहयोग में नवभारत अव्वल नंबर का समाचार पत्र संस्थान है, अन्य समाचार पत्र संस्थानों को इससे सीख लेनी चाहिए। इसी कारण इसे लोग सरकारी प्रेस कहते हैं। लेकिन बनियावाद की दौड़ में अब नवभारत भी शामिल हो गया है और कर्मचारियों का हर संभव शोषण कर रहा है।