
विजय सिंह ठकुराय-
कुछ समाचार आपको देना चाहूंगा। अहमदाबाद विमान दुर्घटना की जो प्राथमिक रिपोर्ट 12 जुलाई की देर रात सामने आई थी, उसमें यह इंगित किया गया था कि एक पायलट ने दूसरे से पूछा – स्विच तुमने बंद किया? उत्तर मिला – नहीं। ये किस पायलट ने किससे कहा। पूरी ट्रांसक्रिप्ट क्या थी, इस पर जांच कमेटी ने कोई डिटेल नहीं दी।
रिपोर्ट आधी रात चुपके से जारी की गई, रिपोर्ट पर किसी के हस्ताक्षर नहीं। पायलट असोसिएशन ने साफ आरोप लगाया कि हमारे पायलट को फंसाया जा रहा है। हमें भी जांच में शामिल करों, नहीं तो हम कोर्ट जाएंगे। सरकार इस मुद्दे पर मूक-वधिर है।
गौरतलब है कि जो जानकारी सरकार ने जनता से साझा नहीं की, वो कल अमेरिका के अखबार “वाल स्ट्रीट जर्नल” में विस्तार से छपी है। बताया गया है कि स्विच बंद करने से संबंधित प्रश्न पूछने वाला पायलट कोई और नहीं बल्कि फर्स्ट ऑफिसर कुंदर था। यानी स्विच जानबूझकर कर बंद करने वाले कोई और नहीं – कैप्टन सुमित सब्बरवाल थे, जिन्हें 30 साल प्लेन उड़ाने का अनुभव है। कैरियर एकदम बेदाग और अपनी निजी जिंदगी में शानदार व्यक्ति थे।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि फर्स्ट ऑफिसर कुंदर घबराए हुए थे, जबकि कथित रूप से फ्यूल बंद करने वाले सुमित सब्बरवाल एकदम शांत – मानों घर से आत्महत्या करने की ठान के निकले हों। यह साफ शब्दों में सुमित जी का चरित्रहनन करते हुए उनपर साजिश करने का आरोप मढ़ने की कोशिश है।
अब पायलट असोसिएशन वाल स्ट्रीट जर्नल पर मुकदमा करने की तैयारी कर रही है। लाल-लाल आंखें खामोश हैं। अमेरिका से इतना पूछने की हिम्मत नहीं कि हमारी गोपनीय डिटेल्स तुम्हे कौन दे रहा है? युद्ध विराम हो अथवा प्लेन जांच – सबकी सूचनाएं अमृतकाल में अमेरिका से ही जारी हो रही हैं, जहां की कंपनी बोइंग है। साफ तौर पर एक अमेरिकन कंपनी के शेयर और बीमा की रकम बचाने के लिये एक भारतीय पायलट की प्रतिष्ठा को रौंदने के षड्यंत्र हो रहे हैं।
खैर, कैप्टन सुमित सब्बरवाल जी। आपको श्रद्धाजंलि। पुनर्जन्म होता हो तो कृपया भारत भूमि पर न दोबारा जन्म न लें। यहां एक कंपनी के शेयर की कीमत इंसान की जान और प्रतिष्ठा से ज्यादा मायने रखती है।

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