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गुजरात

बोईंग कंपनी को बचा लिया गया, फ्यूल इंजन बंद होने के लिए पायलट पर फोड़ा ठीकरा!

बड़ा सवाल- बोईंग को बचा कौन रहा है?

हृदयेश जोशी-

बीबीसी की ये रिपोर्ट हेडलाइन में किस आधार पर कह रही है कि प्लेन में कोई गड़बड़ी नहीं थी? बुलेटिन की शुरुआत में एंकर भी अधूरी बात बताती है और कहती है एक पायलट दूसरे से पूछता है कि तुमने इंजन क्यों बन्द कर दिया। वह यह नहीं बताती कि दूसरे पायलट ने जवाब में कहा कि मैंने बन्द नहीं किया।

यह बात इस वीडियो में बाद में रिपोर्टर कहती है लेकिन वह भी प्लेन में गड़बड़ी की बात नहीं करती। जबकि बीबीसी के ही ग्लोबल न्यूज़ पॉडकास्ट में दोनों पायलटों की पूरी बात बताई गई। इस वीडियो में एंकर की कमेंट्री और हेडलाइन में यह बेईमानी क्यों है?


अमित चतुर्वेदी-

एयर इंडिया के विमान हादसे की जांच रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट ने बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि विमान को बनाने वाली कंपनी बोईंग के विमान में किसी तरह की खामी या शिकायत नहीं पाई गई। जांच में कहा गया है कि विमान के फ्यूल स्विच ऑफ किए गए थे। उस विमान में दो पायलट्स थे एक पायलट विमान उड़ाने का 30 वर्षों का अनुभव रखते थे और दूसरे पायलट के पास 10 वर्षों का अनुभव था। लेकिन जाँच में पाया गया कि पायलट ने फ्यूल स्विच ऑफ कर दिया होगा।

ये ड्रीमलाइनर के कॉकपिट का वीडियो है वो भी प्लेन को स्टार्ट किए जाने के समय का। इसमें जो लेफ्ट साइड में बैठे पायलट हैं वो अपने राइट हैंड से जिन दो बटन्स या स्विच को ऑन कर रहे हैं वही एयरोप्लेन का फ्यूल स्विच है। जैसा कि देखा जा सकता है ये फ्यूल स्विच गलती से या बस ऐसे ही हाथ लगने से ऑफ नहीं जो सकते, उन्हें प्रयास पूर्वक चलाना पड़ता है, और वो इलेक्ट्रिक स्विचेस की तरह एकदम आसानी से चालू या बंद नहीं होते, उनमें प्रेशर देना पड़ता है।

लेकिन एक बोईंग जैसी कंपनी पर दोष मढ़ना आसान काम नहीं था, आसान कम था उन दो पायलट्स पर दोष मढ़ना जो अपनी सफ़ाई देने के लिए अब दुनिया में भी नहीं हैं, उन्होंने या उनमें से किसी एक ने चुपके से फ्यूल स्विच ऑफ कर दिया और बाजू में बैठे दूसरे पायलट को पता भी नहीं चला..बढ़िया है।


विजय सिंह ठकुराय-

एक पायलट ने दूसरे से कहा – तुमने फ्यूल स्विच बंद क्यों कर दिए?

दूसरे पायलट ने कहा – मैंने तो ऐसा नहीं किया।

गौरतलब है कि फ्यूल स्विच को पकड़ कर, एक गियर की तरह ऊपर उठाना पड़ता है, फिर एक नैरो-पैसेज के थ्रू स्विच को मूव कराना होता है। ये कोई टच स्क्रीन पर दिख रहा कोई बटन नहीं है, जो गलती से दब जाएगा – पूरी एक प्रोसेस है।

एक पायलट, जो तीस साल से प्लेन उड़ा रहा है, 15 हजार घण्टे प्लेन उड़ाने का अनुभव रखता है। दूसरा पायलट, जो दस साल का अनुभव रखता है, 3 हजार घण्टे कॉकपिट में बिता चुका है। दोनों की पर्सनल लाइफ और प्रोफेशनल कैरियर बेदाग हैं।

इनमें से किसी एक ने “गलती से” या “जानबूझकर” फ्यूल स्विच बंद कर दिए, वो एक नहीं, दो-दो स्विच, महज एक सेकंड के अंतर से, ऊपर बताई गई प्रक्रिया को फॉलो करते हुए – संभव है?

बाकी पिछले कुछ सालों से एयरक्राफ्ट सेफ्टी में अपनी साख निरंतर गवां रही बोइंग की कोई गलती नहीं है। बोइंग के अक्सर दुर्घटनाग्रस्त होते विमानों में कोई मेकेनिकल फेलियर नहीं पाया जा सका है। सॉफ्टवेयर ग्लिच तो असंभव है। इंजन निर्माता कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक को क्लीन चिट मिल गयी है। न कोई पक्षी सामने आया। न मौसम की कोई गलती है।

गलती उन अनुभवी-दक्ष पायलटों की माननी है, जो दशकों से प्लेन उड़ाने का अनुभव रखने के बावजूद अपनी और 270 लोगों की जान ले लेने के लिए एक नहीं, बल्कि दो-दो स्विच जानबूझकर बंद कर देते हैं, फिर आपस में झूठ बोलते हैं, और रात ढाई बजे चुपके से जारी की गई रिपोर्ट पर सफाई देने के लिए इस दुनिया में भी नहीं हैं।

जल्द ही दोनों में से किसी पायलट के चरित्रहनन अथवा उनके संभावित आतंकी कनेक्शन की पोस्टें सोशल मीडिया पर घूमने लगे, तो मुझे बिल्कुल आश्चर्य नहीं होगा।

मेरा मानना है कि फ्यूल स्विच ही ऑफ हुए हैं। विमान की क्लिपिंग देख कर भी ऐसा ही प्रतीत होता है। पर दोनों स्विच एक साथ बंद हो जाएं? कोई पायलट ऐसा क्यों करेगा भाई? साफ तौर पर यह कोई मेकेनिकल अथवा सॉफ्टवेयर glitch प्रतीत होता है, जिससे दोनों स्विच एक साथ अपने आप शटडाउन हुए हैं। जब तक दोनों पायलट ने इसे नोटिस कर के रिबूट किया, तब तक देर हो चुकी थी और रिबूटिंग के दौरान ही प्लेन गिर गया। यही glitch अगर तब हुआ होता, जब प्लेन ठीक ठाक ऊंचाई पर होता तो दुर्घटना नहीं होती।

बहरहाल, गलती पायलट की ही है। बोइंग की तरफ से कोई गड़बड़ हो ही नहीं सकती।

कुछ मित्रों ने विनय झा की पोस्टें चेप कर के मुझसे पूछना शुरू कर दिया है कि क्या मैं विनय झा की फ्यूल स्विच थ्योरी को स्वीकार कर लिया है?

विनय झा की थ्योरी यह थी कि दोनों फ्यूल पाइप ग्राउंड स्टाफ ने बंद कर दिये और पाइप मे मौजूद अवशेषी तेल से प्लेन हवा में उड़ गया और जब तक पायलट ने नोटिस किया कि गड़बड़ है, तब तक क्रैश हो गया। इस तरह विनय झा ने हादसे में तुर्की, पाकिस्तान, चीन और आतंकी कनेक्शन ढूंढा था।

मैंने विनय झा का खंडन इस बात पर किया था कि पाइप में मौजूद तेल से प्लेन नहीं उड़ सकता। उस ज्योतिषी के 14 को ये भी नहीं पता कि प्लेन में इंजन ऑन-ऑफ और फ्यूल ऑफ-ऑन एक ही बटन होते हैं, अलग नहीं। मतलब फ्यूल ऑफ है तो इंजन स्टार्ट ही नहीं होता। उसने तो हवाई जहाज को स्कूटर समझ रखा था कि थोड़ा झुका कर स्टार्ट हो जाएगा।

मैंने सिर्फ ग्राउंड स्टाफ कनेक्शन और प्लेन के इस तरह उड़ पाने का खंडन किया था। और किसी चीज का नहीं।

अब सामने यह आ रहा है कि प्लेन की यात्रा शुरू होने के 25 सेकंड बाद दोनों स्विच अपने आप शटडाउन हुए। ऐसा कोई पायलट कर दे, हो ही नहीं सकता। बस मैं इस घटना को बोइंग की तकनीकी खामी से जोड़ कर देख रहा हूँ और विनय झा2 जी अपनी आदत अनुसार फिर से इसमें तुर्की की साजिश और चीन की हैकिंग घुसेड़ रहे हैं। इतना ही फर्क है। धन्यवाद।

मुझे लगता है कि इस तकनीकी खामी का कारण बोइंग की तरफ से है। पायलट की गलती मैं नहीं मानता। एक आचार्य विनय झा2 का कैम्प है, जो इस तकनीकी खामी का कारण बोइंग में नहीं बल्कि चीन-पाकिस्तान-तुर्की में ढूंढ रहा है, ताकि सरकार और कॉर्पोरेट पर कोई सवाल न उठे। बोइंग पर कोई जांच न हो, जबकि बीते सालों में न जाने कितने कांड इनके सामने आ चुके हैं और आपराधिक लापरवाही के मुकदमे चल रहे हैं। हार्डवेयर सॉफ्टवेयर में गड़बड़ के इतने मामले आ चुके हैं। लेकिन इस मामले में या तो पकिस्तान दोषी है अथवा पायलट। बोइंग की कोई गलती हो ही नहीं सकती।

अच्छा हुआ पायलट में कोई मुसलमान न था, नहीं तो विनय झा ने अब तक कपड़े फाड़ कर नाचना शुरू कर दिया होता।

एकदम सत्य किस्सा सुना रहा हूँ। कोई शक हो, तो जैसे चाहें, जांच कर लें। तो हुआ यूं कि एयरबस को टक्कर देने के लिए 2011 में बोइंग ने एक किफायती इंजन बनाने की योजना बनाई। अगले 4-5 साल में योजना परवान चढ़ी और पुराने बोइंग-737 विमानों में नया इंजन लगा कर उसे 737-मैक्स के नाम से लांच कर दिया गया।
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अब एविएशन में हर छोटे फैक्टर से बड़ा बदलाव आता है। जब एक भारी-भरकम नया इंजन पुराने विमान में लगाओगे तो विमान का बैलेंस तो बिगड़ेगा ही। शुरुआती परीक्षणों में पाया गया कि उड़ान के दौरान विमान अनियंत्रित हो जाता है और विमान की नाक (नोज) ऊपर की ओर उठने लगती है।
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अब नए सिरे से विमान बनाने में तो खर्चा लगता, इसलिए बोइंग ने “MCAS” नाम का एक सॉफ्टवेयर बना कर फ्लाइट कंट्रोल में इंस्टाल कर दिया। इस सॉफ्टवेयर का काम विमान की नोज को नीचे धकेलना होता था। कायदे से ऐसे सिस्टम में प्लेन की नोज को ट्रैक करने के लिए दो सेंसर होने चाहिएं, ताकि एक फेल हो जाये तो दूसरा काम करता रहे। पर बोइंग ने बजट कटौती के चक्कर में सिर्फ एक ही सेंसर इस्तेमाल करने को मंजूरी दी।
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गौरतलब है कि जिन 737-मैक्स विमानों में ये सॉफ्टवेयर अपलोड किया गया, वे सब 90 के दशक में निर्मित हुए विमान थे। अब उन विमानों का कंप्यूटर सिस्टम बदलना, फिर पायलट को नए सिस्टम की ट्रेनिंग दिलवाना – अपने-आप में खर्चीला काम था। तो बोइंग वालों ने इस सॉफ्टवेयर वाली पूरी बात अपने ग्राहकों, मतलब विभिन्न देशों की एयरलाइन्स और उनके पायलट से साझा ही नहीं की और ऐसे ही प्लेन उड़वाते रहे।
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अब 2015 में बना सॉफ्टवेयर 1990 के कंप्यूटर पर चलाओगे, तो कभी न कभी तो ग्लिच होगा ही। और ग्लिच हो जाये तो पायलट क्या करेगा, जब उसे पता ही नहीं, कभी बताया ही नहीं गया कि दिक्कत हो कहाँ से रही है। तो हुआ यूं कि ये MCAS सॉफ्टवेयर को जितना विमान की नोज को नीचे धकेलना था, उससे तीन गुना धकेलना लगा। बोइंग की इस गंभीर लापरवाही के कारण दो विमान दुर्घटनाएं हुईं – 2018 में लायन एयर और 2019 में इथोपियन एयरलाइन्स – कुल 346 जिंदगियां मुनाफेवाद की भेंट चढ़ गईं। बोइंग को इस आपराधिक खुलासे के बाद सेटलमेंट और हर्जाने में ढाई अरब डॉलर खर्चने पड़े।
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सोच कर देखिए, जिस कंपनी का इतनी गंभीर आपराधिक लापरवाही का खुल्लमखुल्ला ट्रैक रिकॉर्ड है और न जाने कितने मुकदमे चले हों। जिस कंपनी पर मुनाफे के लिए गुणवत्ता से समझौते का आरोप लगाने वाले उसके पूर्व कर्मचारी अपने घरों में संदिग्ध अवस्था में मृत पाए जा रहे हों। जिस कंपनी के बनाये स्टारलाइनर में खराबी के कारण सुनीता विलियम्स साल भर स्पेस में फंसी रही हों। जिस कंपनी के विमानों में तकनीकी गड़बड़ियों के सैकड़ों मामले पब्लिक डोमेन में हों – 32 मामले तो सिर्फ एयरइंडिया के साथ। जिसके विमानों के कभी इमरजेंसी डोर उखड़ जाते हों तो कभी फ्यूल लीक हो जाता हो।
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जो कंपनी पुराने विमानों की हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर झाड़-पोंछ कर, रंगरोगन कर के, नया माल बता कर बेच देने के लिए कुख्यात हो, उस कंपनी का भारत में एक प्लेन हादसा होता है। बताया जाता है कि क्रमशः तीस साल और दस साल का अनुभव रखने वाले दो पायलटों में से एक ने दोनों इंजन एक साथ गलती से अथवा जानबूझकर बंद कर दिए, महज एक सेकंड के अंदर। एक पायलट गैर-हिन्दू (ईसाई) भी बताया जा रहा है। तुर्की-पाक-चीन तक की बदमाशी खोजी जा रही है। बोइंग और इंजन निर्माता कंपनी को प्रीलिमिनरी रिपोर्ट में ही पाक-साफ बता दिये।
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मजाक ही करना था तो मैं क्या कहता हूँ कि थोड़ा और मेहनत करो।
क्या मालूम, शायद प्लेन हादसे में नेहरू जी का ही कऊनो मिश्टेक निकल जाए।
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