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आज के अखबार : विनेश ने कहा, पूरे सिस्टम के खिलाफ लड़ीं; खबर है हार के बाद सपने टूटे, लड़कर हारीं विनेश  

हिंदी समाचार पन्ने का शीर्षक बैनर: 'मोदी ने पूरी शिक्षा व्यवस्था बना दी: राहुल' और नीचे स्लोगन/कैप्शन 'बोलें, दावे 'विश्वगुरु' के, मगर देश में एक परीक्षा नहीं कर सकता'। दाहिने तरफ राहुल गांधी की तस्वीर है।
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नीट पेपर लीक के बाद सीबीएसई की कॉपी चेक करने में गड़बड़ी, ओएसएम सिस्टम, स्कैनिंग के नाम पर मजाक की शिकायतों, सेवा प्रदाता का चुनाव, ठेकेदार के भाजपाई होने की खबरें और उस पर कानफाड़ू सन्नाटे के बीच कल सीयूईटी-यूजी परीक्षा में भी तकनीकी गड़बड़ी हो गई। अक्षम, नालायक और भ्रष्ट सरकार के इन कारनामों के बीच एक देश, एक चुनाव की तैयारी की खबर भी दैनिक भास्कर में लीड है। राहुल गांधी ने कहा मोदी ने पूरी शिक्षा व्यवस्था तबाह कर दी – नहीं छपी है और सोशल मीडिया पर पूरा भाजपाई इको सिस्टम राहुल गांधी को परेशान, बदनाम करने में लगा है। सवालों के जवाब होते तो दे ही देता।

  

संजय कुमार सिंह

एशियाई खेलों के लिए होने वाले ट्रायल में विनेश फोगाट को 50 किलो वर्ग की बजाय 53 किलो वर्ग में खेलने दिया गया पर अखबारों ने नहीं बताया है कि ऐसा कैसे हुआ। अमर उजाला ने लिखा है, लड़कर हारीं विनेश। उपशीर्षक है, विवादों के बीच 53 किलो में मिली एंट्री, सेमीफायनल में मीनाक्षी गोयत से हारकर बाहर हुईं। हंगामे के बाद मिली खेलने की अनुमति के तहत अखबार ने लिखा है, …. महासंघ ने बताया कि वह 50 किलो में खेल सकती हैं। विनेश ने कहा, वह 53 किलो में खेलने जा रही हैं। इसे लेकर हंगामा हुआ, तो महासंघ ने 53 किलो में खेलने की अनुमति दे दी। हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, … वजन लेने के समय जब फोगाट को बताया गया कि उन्हें 50 किलो वर्ग में खेलने की ही अनुमति है तो दिन की शुरुआत नाटकीय रही। विरोध और डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय सिंह के हस्तक्षेप के बाद उन्हें 53 किलो वर्ग के ट्रायल में प्रतिस्पर्धा की इजाजत दी गई। टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा है – विनेश ने बाद में कहा, …. पूरा सिस्टम एक तरफ था और मेरी टीम तथा मैं दूसरी तरफ थे। यह एकतरफा संघर्ष है। मैं पहली बार नहीं हार रही हूं और हम हारकर ही सीखते हैं, लेकिन पूरी व्यवस्था जब आपके खिलाफ हो और आप में संघर्ष का माद्दा हो तो मैं खुद को विजेता के रूप में देखती हूं। दैनिक भास्कर ने लिखा है, “कुश्ती में ड्रामा : विनेश सेमीफाइनल हारीं, फिर फेडरेशन से बोलीं – वापस आउंगी। इसका जिक्र कुछ और अखबारों में कुछ और तरह से है। अखबार में फोटो का कैप्शन है, याद रखना …. मैच हारने के बाद फेडरेशन प्रमुख संजय सिंह को चुनौती देतीं विनेश फोगाट। कल मैंने डब्ल्यूएफआई के पैड पर संजय कुमार सिंह के दस्तखत से जारी पत्र के हवाले से लिख था, “….चूँकि विनेश फोगाट ने एक प्रतिष्ठित खिलाड़ी के तौर पर 2024 के पेरिस ओलंपिक खेलों, किर्गिस्तान में आयोजित ओलंपिक क्वालिफायर और हंगरी में आयोजित चौथे रैंकिंग टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया था और 2024 के ओलंपिक खेलों के बाद से उन्होंने किसी भी अन्य प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया है, इसलिए डब्ल्यूएफआई ने उन्हें 50 किलोग्राम भार वर्ग के चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति प्रदान कर दी है।” 

इससे पहले का तथ्य है कि भारतीय कुश्ती फेडरेशन ने पूरा मामला सार्वजनिक होने और सरकारी खर्च पर मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले जाकर भी हार जाने के बावजूद विनेश फोगाट को 2026 के एशियन गेम्स में भाग नहीं लेने देने का इंतजाम कर दिया है। इसके बावजूद विनेश को खेलने दिया गया, वह फिर आउंगी कहकर अपनी चुनौती पर अड़ी हुई है लेकिन आज के कई खबरों से ऐसा नहीं लगता है। उदाहरण के लिए, दि एशियन एज ने एक फोटो का शीर्षक लगाया है, हार के बाद विनेश का एशियाई खेलों का सपना टूटा। इंडियन एक्सप्रेस ने विनेश की फोटो के साथ चार कॉलम की खबर छापी है। शीर्षक है, वापसी का अंत निराशाजनक रहा, विनेश ने अपना इरादा पक्का किया: ‘मैं वापस आऊँगी, मेरा लक्ष्य ओलंपिक्स है।’ विरोधियों और विद्वेषी डब्ल्यूएफआई के विरोध से जूझते हुए, एशियाई खेलों के ट्रायल्स का सेमीफ़ाइनल हारीं। अखबार ने आगे लिखा है, “आज यह सिस्टम मेरे ख़िलाफ़ है, कल भी मेरे ख़िलाफ़ रहेगा, लेकिन अगर मैं खुद पर विश्वास बनाए रखती हूँ, तो मैं इस सिस्टम को हरा सकती हूँ। लॉस एंजिल्स ओलंपिक्स (2028) ही मेरा लक्ष्य है।” कहने की जरूरत नहीं है कि खबर सिर्फ हारना नहीं है और जो है उसे कुछेक अखबारों ने कम महत्व दिया है।

इसके अलावा आज जो प्रमुख खबर हैं उनमें तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी पर बंगाल में हमला बड़ी खबर है। द टेलीग्राफ ने इसे लीड बनाया है और शीर्षक है, गुस्सा बिखर गया। अखबार ने लिखा है कि अभिषेक के साथ मारपीट सुरक्षा (व्यवस्था) पर सवाल है। नवोदय टाइम्स में यह खबर चार कॉलम में है। शीर्षक है, अभिषेक बनर्जी पर फेंके जूते-अंडे, फाड़े कपड़े। अमर उजाला में भी यह खबर फोटो के साथ चार कॉलम में है। इंडियन एक्सप्रेस में यह दो कॉलम में है। इसका शीर्षक है, अभिषेक को सीआईडी का समन मिला, कुछ घंटों बाद भीड़ ने हमला कर दिया। हिन्दुस्तान टाइम्स में दो कॉलम में है। शीर्षक है, अभिषेक के साथ मारपीट, पत्थर मारे गए, अंडे फेंके गए; विपक्ष ने भाजपा पर हमला किया। द हिन्दू में दो कॉलम की खबर है। इसका शीर्षक है, बंगाल में अभिषेक बनर्जी पर भीड़ का हमला। दैनिक भास्कर में मार-पीट की दो फोटो के साथ तीन कॉलम की खबर है। मुख्य शीर्षक है, हिंसा पीड़ितों से मिलने गए अभिषेक बनर्जी को भीड़ ने घेरा, मारपीट की। टाइम्स ऑफ इंडिया ने सीयूईटी-यूजी टेस्ट में गड़बड़ी और परीक्षा देर से शुरू होने की खबर को लीड बनाया है। देरी के कारण 3700 परीक्षार्थी परीक्षा दिए बगैर चले गए। खबर है कि इनके लिए फिर से परीक्षा होगी। तकनीकी गड़बड़ी ठीक कर दिए जाने की खबर है। नवोदय टाइम्स की लीड भी यही खबर है। शीर्षक है, अब सीयूईटी में छात्र परेशान। उपशीर्षक है, तकनीकी गड़बड़ी के चलते परीक्षा में हुई देरी। द हिन्दू में यह सेकेंड लीड है। आज इस खबर से जुड़ी एक और खबर है, राहुल गांधी ने कहा (नरेन्द्र) मोदी भारत की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर रहे हैं। यह खबर देशबंधु में भी है लेकिन परीक्षा में देरी की खबर के साथ राहुल गांधी का यह आरोप कई अखबारों में नहीं है। देशबन्धु में रीटेस्ट की खबर लीड है और सीबीएसई के पुनर्मूल्यांकन से संबंधित गड़बड़ियों के लिए अफसरों ने साइबर हमले को दोषी ठहराया है। देशबन्धु, हिन्दुस्तान टाइम्स, द हिन्दू, दि एशियन एज में डीके शिवकुमार को विधायक दल का नेता चुने जाने और मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने की तारीख खबर है। दैनिक भास्कर की लीड इन सभी अखबारों और खबरों से अलग है। इसके अनुसार एक देश एक चुनाव का पहला चरण 2029 से शुरू होगा।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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