साकेत गोखले-
नई दिल्ली – वर्ल्ड बैंक ने हाल ही में ‘अत्यंत गरीबी’ की नई परिभाषा तय की है और इसके आधार पर भारत में गरीबी को लेकर जो आँकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं।
- सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में भारत में 34.2 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे थे। यह देश की कुल आबादी का 24% है।
- लेकिन अगर हम स्वतंत्र संस्था CMIE (Centre for Monitoring Indian Economy) के ताज़ा आंकड़ों पर नज़र डालें तो वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 62.1 करोड़ हो गई है, यानी भारत की लगभग 44% आबादी गरीबी रेखा के नीचे जी रही है।
यह सवाल उठाता है कि आखिर यह कैसा “विकास” है, जहां देश की लगभग आधी आबादी अब भी दो वक्त की रोटी के लिए जूझ रही है?
झूठे प्रचार पर करोड़ों खर्च, लेकिन सच्चाई राशन कार्ड बताता है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार ने अपने प्रचार अभियान पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं ताकि लोगों को यह भरोसा दिलाया जा सके कि देश में ‘विकास’ हो रहा है। लेकिन सरकार स्वयं 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दे रही है — यह इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि इन लोगों की आय इतनी कम है कि वे खुद अपना भोजन तक नहीं जुटा सकते।
बेरोजगारी और महंगाई की दोहरी मार
देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, कीमतें आसमान छू रही हैं, और इन दोनों कारकों ने मिलकर लाखों नए लोगों को गरीबी की दलदल में धकेल दिया है।
मगर सरकार प्रचार, फोटोशूट और पीआर इवेंट्स में व्यस्त है। गरीबी को स्वीकार करने की ईमानदारी न तो प्रधानमंत्री मोदी में है, न ही भाजपा में।
‘विकास’ की जगह ‘विवाद’ का एजेंडा
जब अर्थव्यवस्था की सच्चाई से ध्यान भटकाना हो, तो भाजपा का पुराना फार्मूला चलता है — हिंदू-मुसलमान, जाति-धर्म, मंदिर-मस्जिद। देश को वास्तविक मुद्दों से दूर रखने के लिए सांप्रदायिक एजेंडे पर लोगों को उलझाया जाता है।
जबकि सच्चाई यह है कि गरीबी धर्म देखकर नहीं आती — वह हर धर्म, जाति और वर्ग के लोगों को प्रभावित करती है।
भाजपा को हटाना होगा, ताकि बहस असली मुद्दों पर हो
भारत में गरीबी तब तक दूर नहीं होगी जब तक राजनीति का केंद्र हिंदू-मुसलमान बना रहेगा। अगर हम चाहते हैं कि देश में विकास की असली चर्चा हो — रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, और गरीबी उन्मूलन जैसे मुद्दों पर — तो जरूरी है कि भाजपा को सत्ता से बाहर किया जाए।
क्योंकि जब तक भाजपा सत्ता में है, तब तक “विकास” सिर्फ पोस्टर और इवेंट्स में दिखेगा — जमीनी सच्चाई में नहीं।


लेखक राज्यसभा सदस्य हैं।



सत्यपाल वर्मा
June 9, 2025 at 7:32 pm
उपरोक्त कथन बिल्कुल सही है देश में चंद लोग ही हैंडल हर रहे है गरीब और ज्यादा गरीब होता जा रहा है और अमीर ओर ज्यादा अमीर होता जा रहा है ओर इसके साथ भारत में नीचे से लेकर ऊपर तक भ्रष्टाचार और उनको सपोर्ट देने में हिंदुस्तान के सफेद पोश नेता गण।
जब तक इन नेताओं को फ्री ने मिलने वाली सुविधा बंद नहीं होती ऐसा ही होता रहेगा
Hemaram Ola
June 9, 2025 at 9:11 pm
जो विकास पिछले ६५ सालों में नहीं हुआ उससे ज्यादा ११ वर्षो में हुआ, लेकिन निजी स्वार्थ में डुबें लोगों को इस विकास से क्या लेना-देना है क्योंकि वो सब लोग तो बेरोजगार हो गए हैं।
मुश्कानंद
June 10, 2025 at 6:08 am
बेसिरपैर की बकवास, न जाने कहाँ से आंकड़े उइड करके वह भी विदेशी संस्था के,जब देश की सरकार सभी को मुफ्त राशन और मुफ्त इलाज दे रही हो तो इस तरह की बेबुनियाद बात बकवास ही कही जाएगी। आज कल कुकुरमुत्ता पत्तलकार ऐसी छुद्र बातों से खुद को खबरों में लाने की असफल कोशिश करते है।
संजीव कुमार चौधरी
June 10, 2025 at 8:24 am
आपको विकास दिखाई नहीं देगा, भाजपा विरोध का लेंस जो आपने अपनी आंखों में चिपका रखा है। कभी गांव की भी सैर करें, बंद कमरे में बैठ प्रवचन देने से भारत की जनता पर कोई खास प्रभाव पड़ने वाला नहीं है। जहां तक अस्सी करोड़ लोगों को राशन देने की बात की है ना, गांव भ्रमण के दौरान सारी जानकारी मिल जाएगी। बानगी के तौर पर मैं अपने गांव की बात करूं तो चार-पांच परिवार को छोड़ सभी मुफ्त का राशन उठाते हैं। राशन लेने वालों में नौकरी पेशा वाले, पेंशनधारियों से लेकर वैसे लोग भी शामिल हैं जो साल में तीन लाख से लेकर दस लाख रुपए तक का अपने खेत उत्पादित अनाज बेचते हैं।
Pranoa kumar Sharma
June 10, 2025 at 11:11 am
Bhadas desk jaisa handle esa article hi likh sakta h. Tumhari bhadas bilkul spasht roop se parilakshit ho rahi hai.
Gazab research karte ho bhai tum, do alag alag samay ke do alag alag sources ke data ki ek ek line utha li or pura article chap diya conclusion me. Wah ye kritya to puruskar yogya h.
P
June 10, 2025 at 11:31 am
Ye popat apni rajnitik rotu senk rha hai taki apne aakao ko khush krke dobara rajyasabha ka ticket pa sake….propeganda faila rha hai
अवनीश त्यागी
June 15, 2025 at 5:25 pm
कहां है बेरोजगारी, कहां भुखमरी ?
जिस 80 करोड़ राशनकार्ड की आप बात कर रहे हैं। उनमें से अधिकांश राशनकार्ड धारक वह जो सरकार से मुफ्त में लेते हैं, और पैसों में बेच देते हैं। तब इन 80 करोड़ राशनकार्ड धारकों के बारे आप क्या कहेंगे? हां एक बात जो नई है जिसे शायद आप देख नहीं पा रहे हैं। वो है। मध्यवर्गीय परिवार जरूर गरीबी के दल दल में फंसते जा रहे हैं। बाकी जिन गरीबों के गरीब के लिए आपने लिखा कि और गरीब और गरीब होते जा रहे हैं। तथ्यों से परे की बात जान पड़ रही है। हां अमीर जरूर और अमीर होने की बात कहीं तक जरूर सत्य है।