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सुख-दुख

पायनियर हिंदी के पूर्व संपादक प्रदीप तिवारी जी नहीं रहे!

मेरे लिए यह दुखद क्षण है… पायनियर (हिंदी) के पूर्व संपादक प्रदीप तिवारी हमारे बीच नहीं रहे। कुछ देर पहले उनका स्वर्गवास हो गया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति और परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दे।
कुछ साल पहले प्रदीप जी कोरोना की चपेट में आ गए थे, जिससे फेफड़े की गम्भीर बीमारी से ग्रस्त थे। प्रदीप जी अमर उजाला के हमारे पूर्व साथी रहे और दैनिक हिंदुस्तान में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके थे।
विनम्र श्रद्धांजलि. -शेषमणि शुक्ला


विनोद पाठक-

पिछले दिनों प्रदीप तिवारी भाई साहब से फोन पर लंबी बात हुई थी। थोड़ा निराश थे। वो 2021 में कोविड से पीड़ित होने के बाद फेफड़ों के रोग से ग्रसित हो गए थे। कुछ समय वर्क फ्रॉम होम चला, पर फिर नौकरी चली गई। 24 घंटे ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे जीवन हो गया था।

आज उनके निधन का दुःख समाचार मिला। प्रदीप भाई साहब से मेरा परिचय 1999 में अमर उजाला, मेरठ में हुआ था। वो उप संपादक होते थे और मैं ट्रेनी। मृदुभाषी, विनम्र, हंसमुख और हमेशा मदद करने वाले। मैंने अमर उजाला छोड़ा और प्रदीप भाईसाहब भी हिंदुस्तान, दिल्ली चल आए, पर संपर्क बना रहा।

कुछ साल पहले वो पॉयनियर हिंदी में आ गए थे। आईटीओ दिल्ली के ऑफिस में एक-दो बार मैं उनसे मिला भी। इतने सालों में प्रदीप भाई साहब में कोई परिवर्तन नहीं आया था। पहले जैसे ही हंसमुख थे। दिसंबर 2025 में उन्होंने मदद के लिए सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम पत्र लिखा था। प्रदीप भाई साहब ने बताया था कि उनका दवाइयों का मासिक खर्च 40 हजार रुपए है और सोर्स ऑफ इनकम नहीं है।

प्रदीप भाई साहब न केवल एक ईमानदार पत्रकार थे, बल्कि हर दिल अजीज भी थे। उनकी कमी हमेशा खलेगी… ईश्वर प्रदीप भाईसाहब जैसी पवित्र आत्मा को शांति प्रदान करें और अपने श्रीचरणों में स्थान दें… ओम् शांति।

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