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सियासत

चुनावों में ‘प्राइवेट जासूसी’ होने का आरोप लगाकर यूरोप की इस पत्रिका ने गंभीर बहस को जन्म दे दिया है!

शीतल पी सिंह-

चुनाव, जासूसी और “Private Intelligence”: क्या लोकतंत्र के सामने एक नया अदृश्य खतरा खड़ा हो रहा है?

यूरोप के छोटे से देश स्लोवेनिया से आई एक जांच रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक गंभीर बहस को जन्म दे दिया है। वहां की प्रसिद्ध पत्रिका Mladina ने आरोप लगाया है कि इज़राइल की निजी खुफिया कंपनी Black Cube ने चुनाव से पहले स्लोवेनिया के center left नेताओं को निशाना बनाकर एक गुप्त ऑपरेशन चलाया।

रिपोर्ट के अनुसार इस कंपनी के एजेंटों ने खुद को “Stockard Capital” नामक एक काल्पनिक ब्रिटिश निवेश फंड का प्रतिनिधि बताया और कई राजनेताओं को व्यापारिक बैठकों के नाम पर मिलने के लिए राज़ी किया। इन मुलाक़ातों को गुप्त रूप से रिकॉर्ड किया गया। इस ऑपरेशन में पूर्व न्याय मंत्री Dominika Švarc Pipan भी शामिल थीं, जिनसे वियना सहित कई जगहों पर बातचीत की रिकॉर्डिंग की गई।

जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चुनाव से ठीक पहले कुछ संपादित वीडियो इंटरनेट पर गुमनाम तरीके से प्रसारित होने लगे। इसी दौरान कंपनी के प्रतिनिधियों की मुलाकात स्लोवेनिया के दक्षिणपंथी नेता Janez Janša से होने की भी जानकारी सामने आई।

इस पूरे प्रकरण का राजनीतिक संदर्भ इसे और महत्वपूर्ण बना देता है। प्रधानमंत्री Robert Golob की center left सरकार यूरोप में फिलिस्तीन के समर्थन में सबसे स्पष्ट रुख अपनाने वाली सरकारों में रही है। स्लोवेनिया ने 2024 में State of Palestine को मान्यता दी, इज़राइल को हथियारों की आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाया और International Court of Justice में इज़राइल के खिलाफ चल रहे मामले में South Africa का समर्थन करने की घोषणा भी की।

ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या स्लोवेनिया की इस राजनीतिक दिशा को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी।

Black Cube की पृष्ठभूमि भी कम दिलचस्प नहीं है। यह कंपनी इज़राइल की सैन्य खुफिया इकाई Unit 8200 के पूर्व अधिकारियों द्वारा स्थापित की गई थी और अक्सर इसे “private Mossad” जैसा नेटवर्क कहा जाता है। 2017 में यह कंपनी तब सुर्खियों में आई थी जब खुलासा हुआ कि इसने हॉलीवुड निर्माता Harvey Weinstein के लिए पत्रकारों और उनके खिलाफ आरोप लगाने वाली महिलाओं की जासूसी की थी।

हालांकि यह मामला केवल एक कंपनी या एक देश तक सीमित नहीं है। इतिहास बताता है कि चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप कोई नई बात नहीं है।

1948 में इटली के चुनावों में Central Intelligence Agency (CIA) ने वामपंथी दलों को सत्ता में आने से रोकने के लिए बड़े पैमाने पर गुप्त अभियान चलाया था। 1970 के दशक में चिली में Salvador Allende की सरकार को अस्थिर करने के लिए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुप्त राजनीतिक अभियान चलाए गए।

हाल के वर्षों में 2016 के अमेरिकी चुनावों के दौरान Russia पर डिजिटल माध्यमों से चुनाव को प्रभावित करने के आरोप लगे। इसी तरह अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई देशों में विदेशी सलाहकार कंपनियों और डेटा विश्लेषण फर्मों की भूमिका पर भी सवाल उठते रहे हैं। लेकिन आज एक नया बदलाव दिखाई दे रहा है। पहले चुनावी हस्तक्षेप मुख्यतः देशों की खुफिया एजेंसियों द्वारा किया जाता था। अब वही काम निजी कंपनियाँ करने लगी हैं—ऐसी कंपनियाँ जिनमें पूर्व सैन्य अधिकारी, साइबर विशेषज्ञ और गुप्त ऑपरेशन का अनुभव रखने वाले लोग शामिल होते हैं।

यही वजह है कि स्लोवेनिया का यह मामला केवल एक चुनावी विवाद नहीं है। यह उस नए दौर की झलक भी है जिसमें लोकतंत्र की राजनीति के पीछे “private intelligence industry” एक अदृश्य शक्ति के रूप में उभरती दिखाई दे रही है।

और शायद आने वाले समय में लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौती यही होगी—चुनाव कराना नहीं, बल्कि उन्हें बाहरी और अदृश्य हस्तक्षेप से बचाकर निष्पक्ष बनाए रखना।

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