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पंजाब केसरी समूह ने भगवंत सरकार के खिलाफ राज्यपाल को लिखा पत्र!

जालंधर/चंडीगढ़। देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह पंजाब केसरी ग्रुप ने पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों पर लक्षित कार्रवाई और मीडिया को डराने-धमकाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में पंजाब केसरी समूह की ओर से पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को एक विस्तृत पत्र भेजा गया है।

पत्र में कहा गया है कि हाल के दिनों में पंजाब सरकार के अलग-अलग विभागों द्वारा पंजाब केसरी समूह और उससे जुड़े प्रतिष्ठानों के खिलाफ लगातार छापेमारी और दमनात्मक कार्रवाइयां की गईं, जिससे यह आशंका गहराई है कि सरकार का उद्देश्य मीडिया को दबाव में लेना और डराना है।

छापे, नोटिस और बिजली कनेक्शन काटने का आरोप
पंजाब केसरी समूह के अनुसार 11 से 15 जनवरी 2026 के बीच जालंधर, लुधियाना और बठिंडा में समूह से जुड़े होटलों और प्रिंटिंग प्रेसों पर एफएसएसएआई, जीएसटी, एक्साइज, फैक्ट्री विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा छापे मारे गए। जालंधर स्थित होटल का बिजली कनेक्शन काटे जाने और लाइसेंस रद्द करने के नोटिस जारी करने का भी उल्लेख पत्र में किया गया है।

समूह का कहना है कि इन कार्रवाइयों के चलते 15 जनवरी 2026 को जालंधर, लुधियाना और बठिंडा के प्रिंटिंग प्रेसों का संचालन प्रभावित होने या पूरी तरह ठप होने की स्थिति बन गई। पत्र में यह भी कहा गया है कि प्रेस परिसरों के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई, जिससे भय का माहौल पैदा हुआ।

विज्ञापन रोकने का भी आरोप
पत्र में दावा किया गया है कि 31 अक्टूबर 2025 को सत्तारूढ़ दल के एक नेता से जुड़ी खबर प्रकाशित होने के बाद 2 नवंबर 2025 से पंजाब सरकार ने पंजाब केसरी समूह को दिए जाने वाले सरकारी विज्ञापन पूरी तरह रोक दिए। इसे मीडिया पर आर्थिक दबाव डालने की कोशिश बताया गया है।

स्वतंत्र पत्रकारिता का हवाला
पंजाब केसरी समूह ने अपने पत्र में संस्थापक स्वर्गीय लाला जगत नारायण और समूह के बलिदानों का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजाब में आतंकवाद के दौर में भी अखबार ने निर्भीक पत्रकारिता की और कई कर्मचारियों ने अपनी जान गंवाई। समूह ने दोहराया कि वह किसी भी दबाव या प्रभाव में आए बिना स्वतंत्र पत्रकारिता जारी रखेगा।

लोकतंत्र पर खतरे की चेतावनी
पत्र में राज्यपाल से आग्रह किया गया है कि वे इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें। समूह का कहना है कि प्रेस की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में चुनाव नजदीक हैं।

पंजाब केसरी समूह ने उम्मीद जताई है कि राज्यपाल मीडिया को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे और इस कथित ‘टार्गेटेड विच-हंट’ की निष्पक्ष जांच कराएंगे।

पत्र देखें…


कुछ प्रतिक्रियाएं…

रानू मिश्रा-

जब उस दौर में नहीं झुके जब सरकारों ने सभी प्रयास कर लिए पंजाब केसरी पर ताला लगाने के Arvind Kejriwal Bhagwant Mann जी रेड करवा कर सच को नहीं दबा पाओगे, पंजाब केसरी रक्त से सींचा गया वो मीडिया समूह है जिसने कभी कोई समझौता नहीं किया. सच लिखते आए हैं डंके की चोट पर लिखते रहेंगे।


अकु श्रीवास्तव-

पंजाब केसरी समूह पर फिर से सत्ता का हमला… जिनको इतिहास का नहीं पता है, उनको बता दिया जाए कि पंजाब केसरी समूह पर जब-जब हमला किया गया या उसे दबाव में लाने की कोशिश की गई, उसका पतन निश्चित हुआ, चाहे वह आपातकाल रहा हो या फिर ज्ञानी जैल सिंह की हेकड़ी। सबको मुंह की खानी पड़ी है। आतंकवाद के दौर में तो इस समूह ने जो कुर्बानी दी, वह आज तक दुनिया के किसी अखबारी समूह से ना हो सकी।

अब एक बार फिर पंजाब केसरी को रोकने की कोशिश पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार और उसके गुरगों, जिसमें उनके आका भी शामिल हैं, ने करनी चाही है। उसने एक सामान्य सी खबर को मुद्दा बनाते हुए सरकारी विज्ञापन तो रोके ही, साथ ही इस संस्थान और संस्थान से जुड़े अन्य समूह पर विभिन्न विभागों के छापे की कार्रवाई कर अपना मुंह काला किया है। तय है इसमें दिल्ली से हारे हुए और पंजाब में लाज बचाने की कोशिश करने वाले कुछ छुट भैये नेता भी हैं।

अब देखना यह है कि प्रदर्शन कर और दूसरे का किया हुआ अपने नाम करने वाले ऐसे चीकट नेता कब दुम दबा के पंजाब से भागते हैं। शायद यह पंजाबियत को नहीं जानते। पंजाबी जानते हैं-

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है जोर कितना बाजु ए कातिल में है।

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