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पंजाब केसरी समूह के प्रिंटिंग प्रेस और होटलों पर छापा, भगवंत सरकार पर आरोप!

जालंधर/बठिंडा। पंजाब में एक बार फिर मीडिया की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पंजाब केसरी समूह ने आरोप लगाया है कि भगवंत मान सरकार द्वारा योजनाबद्ध तरीके से उसके संस्थानों को निशाना बनाया जा रहा है और स्वतंत्र पत्रकारिता की आवाज दबाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

समूह के अनुसार, बीते कुछ दिनों से पंजाब केसरी से जुड़ी प्रिंटिंग प्रेसों और अन्य संस्थानों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में बठिंडा स्थित प्रिंटिंग प्रेस पर छापा मारा गया, जहां पुलिस ने कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लिया और कथित रूप से मारपीट भी की। घायल कर्मचारियों को सिविल अस्पताल बठिंडा में भर्ती कराया गया है।

वहीं जालंधर के सूरानुसी स्थित प्रिंटिंग प्रेस में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी पुलिस बल के साथ पहुंचे और बिना किसी पूर्व सूचना के जबरन परिसर में घुस गए। आरोप है कि अधिकारियों ने पुलिस के सहयोग से गेट का ताला तोड़ा, कर्मचारियों के साथ मारपीट की, जबरन सैंपल लिए और एक व्यक्ति को हिरासत में ले लिया। कर्मचारियों का कहना है कि अधिकारियों ने यह कहते हुए कार्रवाई की कि उन्हें “ऊपर से आदेश” मिले हैं।

चोपड़ा परिवार के खिलाफ की गई कार्रवाइयों का विवरण

हाल के दिनों में पंजाब केसरी समूह के प्रमोटर चोपड़ा परिवार से जुड़े संस्थानों पर लगातार विभागीय कार्रवाइयाँ की गई हैं।

10 जनवरी 2026 को जालंधर स्थित पार्क प्लाजा होटल, जो चोपड़ा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित है, वहां एफएसएसएआई की टीम ने छापा मारा। इसके बाद 12 जनवरी 2026 को उसी होटल पर जीएसटी विभाग और आबकारी विभाग द्वारा अलग-अलग रेड की गई।

इसी दिन लुधियाना के फोकल पॉइंट क्षेत्र में स्थित जगत विजे प्रिंटर्स पर फैक्ट्री विभाग के उप-निदेशक और लेबर विभाग के सहायक श्रम आयुक्त ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। 12 जनवरी को ही जालंधर सिविल लाइंस स्थित पंजाब केसरी प्रिंटिंग प्रेस पर भी इन्हीं विभागों द्वारा संयुक्त रेड डाली गई।

13 जनवरी 2026 को जालंधर स्थित चोपड़ा होटल पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने छापा मारा। उसी दिन जालंधर ज़ोन के कलेक्टर-कम-आबकारी विभाग ने होटल का लाइसेंस रद्द करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसके बाद 14 जनवरी 2026 को लाइसेंस निरस्त कर दिया गया।

14 जनवरी को जालंधर स्थित होटल की बिजली आपूर्ति काट दी गई, जबकि 15 जनवरी 2026 को होटल का जनरेटर सील कर बिजली व्यवस्था पूरी तरह बंद कर दी गई। इसी दिन लुधियाना, बठिंडा और जालंधर की प्रिंटिंग प्रेसों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा छापेमारी और कार्रवाई की गई।

इन लगातार कार्रवाइयों के चलते 15 जनवरी 2026 से जालंधर, लुधियाना और बठिंडा की कई प्रिंटिंग प्रेसों का कामकाज प्रभावित होने या पूरी तरह ठप होने की आशंका जताई जा रही है। हालात को देखते हुए सूरानुसी (जालंधर), फोकल पॉइंट (लुधियाना) और आईजीसी बठिंडा स्थित प्रेस परिसरों के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।

स्वतंत्र पत्रकारिता का संकल्प दोहराया

पत्र में स्वर्गीय लाला जगत नारायण द्वारा 1949 में स्थापित हिंद समाचार और 1965 में शुरू हुए पंजाब केसरी के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि आतंकवाद के दौर में भी समूह ने निर्भीक पत्रकारिता की और इसके 60 से अधिक कर्मचारी, एजेंट, हॉकर और पत्रकारों ने अपने प्राण गंवाए। इसके बावजूद अखबार ने कभी दबाव के आगे घुटने नहीं टेके और आगे भी स्वतंत्र रिपोर्टिंग जारी रखेगा।

विपक्ष का तीखा हमला

पंजाब सरकार की इस कार्रवाई पर कांग्रेस, अकाली दल, भाजपा समेत तमाम विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष ने इसे पंजाब में “अनौपचारिक इमरजेंसी” करार दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, कांग्रेस नेताओं अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और प्रताप सिंह बाजवा सहित कई नेताओं ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया। भाजपा नेताओं ने घोषणा की है कि वे इस मुद्दे को लेकर राज्यपाल से मुलाकात करेंगे।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी पंजाब सरकार की कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि मीडिया को डराना लोकतंत्र को कमजोर करने के बराबर है। दिल्ली और पंजाब भाजपा के नेताओं ने इसे तानाशाही मानसिकता का परिचायक बताया।

विपक्षी दलों का कहना है कि मीडिया ही लोकतंत्र की असली आवाज है और उस पर इस तरह का दबाव अस्वीकार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसे कदम नहीं रुके तो इसका लोकतांत्रिक तरीके से कड़ा विरोध किया जाएगा।

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