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पंजाब केसरी पर इंदिरा के बाद भगवंत सरकार ने दूसरी बार आपातकाल लगाया है!

पंडित कृष्ण भानु-

पंजाब केसरी (हिंद समाचार पत्र समूह) पर दूसरी बार ‘आपातकाल’ लग गया है। 1975–76 में इंदिरा गांधी सरकार ने लगाया था और अब भगवंत मान की सरकार ने लगा दिया है। इंदिरा गांधी यानि तत्कालीन केंद्र सरकार ने अखबार समूह की बिजली काट दी थी ताकि पंजाब केसरी (हिंदी), हिन्द समाचार (उर्दू) और जगवाणी (पंजाबी) का प्रकाशन बंद हो जाए। दस दिन प्रिंटिंग प्रेस की बिजली कटी रही। चोपड़ा परिवार ने ट्रैक्टरों की सहायता से मशीनें चलाकर अखबारों को प्रकाशित किया। चोपड़ा परिवार इस कट के विरोध में हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने बिजली बहाल करने का फैसला सुनाया लेकिन सरकार ने तब भी बिजली बहाल नहीं की।

अब पंजाब की भगवंत मान सरकार ने एक छोटी सी बात पर पंजाब केसरी समूह पर “आपातकाल” लगा दिया। लेकिन यह अघोषित आपातकाल है। भाजपा नेताओं के हवाले से पंजाब केसरी, हिंद समाचार और जगवाणी में केजरीवाल के बारे में एक प्रेस नोट/बयान छप गया। छपा कि पंजाब सरकार ने केजरीवाल को चंडीगढ़ में एक सरकारी मकान अलॉट किया है…वग़ैरा वग़ैरा। मालूम नहीं कि इस खबर से मान नाराज हुए या केजरीवाल लेकिन अखबार समूह के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाइयों का सिलसिला शुरू हो गया।

सूचना के अनुसार सरकार ने पत्र समूह के विज्ञापन बंद कर दिए। इससे मन नहीं भरा तो पत्र समूह के खिलाफ राज्य सरकार की एजेंसियों ने कई जगहों पर छापेमारी की, जिनमें बठिंडा स्थित प्रिंटिंग प्रेस, जालंधर स्थित सूरानुसी प्रिंटिंग प्रेस, लुधियाना और जालंधर स्थित प्रिंटिंग प्रेस और जालंधर स्थित पार्क प्लाजा होटल शामिल हैं। इन सभी जगहों पर पंजाब सरकार की टीमों, एफएसएसएआई, जीएसटी विभाग, आबकारी विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इत्यादि ने व्यापक छापेमारी की। बिजली काट दी, जनरेटरों तक को बंद कर दिया गया। अखबार समूह के संयुक्त प्रबंध निदेशक अविनाश चोपड़ा और अमित चोपड़ा के विरुद्ध एफआइआर दर्ज की गई हैं।

इसे हद से आगे निकल जाना कहते हैं। ट्रंप बात बेबात युद्ध की धमकियां देता रहता है वैसे ही यहां भी राई का पहाड़ बन गया है। अब अखबारें नेताओं के बयान या प्रेस नोट भी न छापें? यह असहिष्णुता की पराकाष्ठा है। मैं चौथे स्तंभ पर हुई इस कार्रवाई की भर्त्सना करता हूं। बताना आवश्यक समझता हूं कि मैंने अपने लंबे पत्रकारीय जीवन में कभी इस समूह के साथ काम नहीं किया है।

बड़ी अखबारों के विरुद्ध सरकारी कार्रवाई का चलन बढ़ गया है। 2021 में केंद्रीय एजेंसियों द्वारा दैनिक भास्कर समूह के कई ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। कहा गया कि समूह ने गत छह वर्षों में 700 करोड़ की आय पर टैक्स को लेकर गड़बड़ी की है। अंग्रेजी के एक बड़े और प्रतिष्ठित अखबार ‘द हिन्दू’ समूह के ठिकानों पर 2020 में आयकर विभाग ने छापेमारी की थी। और भी होंगे जिनका गला घोंटने की कार्रवाई हुई होगी। यह सिलसिला बढ़ता जा रहा है जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समाज के स्वास्थ्य और लोकतंत्र के लिए अति घातक है।

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