लुधियाना। आम आदमी पार्टी (AAP) की पंजाब सरकार पर स्वतंत्र मीडिया की आवाज दबाने का आरोप लगा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी निर्देशों के तहत ‘पंजाब केसरी’ के लुधियाना स्थित प्रिंटिंग प्रेस को बंद करने का फरमान जारी किया गया है। आदेश में कहा गया है कि प्रिंटिंग प्रेस गैर-प्रदूषणकारी उद्योग की श्रेणी में नहीं आता।
इस कार्रवाई को लेकर मीडिया जगत और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इसे ‘पंजाब केसरी’ पर हमला नहीं बल्कि लोकतंत्र पर हमला बताया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह कदम सरकार की आलोचनात्मक आवाजों को दबाने की कोशिश का हिस्सा है।
बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में ‘पंजाब केसरी’ में प्रकाशित खबरों को लेकर आम आदमी पार्टी और सरकार असहज रही है। आरोप है कि पहले सरकारी विज्ञापन रोके गए, फिर अखबार समूह से जुड़े अन्य संस्थानों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई और अब प्रिंटिंग प्रेस को ही बंद करने का आदेश दे दिया गया।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के बाद बिजली कनेक्शन काटने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जिससे अखबार का प्रकाशन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, सवाल यह भी उठ रहे हैं कि देश के अन्य राज्यों में इसी तरह के प्रिंटिंग प्रेस पर ऐसी सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
इस पूरे मामले पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार हमेशा स्वतंत्र प्रेस के साथ मजबूती से खड़ी रही है और मीडिया की आवाज दबाने वालों के खिलाफ संघर्ष में वे अकेले नहीं हैं।
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और दबाव के जरिए किसी भी मीडिया संस्थान को चुप नहीं कराया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि सच की आवाज को कभी दबाया नहीं जा सकता।
वहीं, ‘पंजाब केसरी’ समूह की ओर से कहा गया है कि संस्थान सत्य, निष्पक्षता और नैतिक पत्रकारिता के मूल्यों के साथ खड़ा है और किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। समूह ने साफ किया कि वह सच की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करता रहेगा।
मीडिया संगठनों और पत्रकार संगठनों ने भी इस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है और इसे स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए खतरनाक संकेत बताया है।
सुधीर राघव-
अन्ना आंदोलन से निकली पार्टी अब सीधे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ माने जाने वाले मीडिया पर हमला कर रही है। वह भी इसलिए क्योंकि अखबार ने पंजाब की जनता के पैसे का दुरुपयोग कर शीशमहल -2 बनाए जाने की सच्चाई खबर के रूप में छाप दी थी।
अन्ना आंदोलन कहने को तो भ्रष्टाचार के खिलाफ हुआ था, जनलोकपाल को ज्यादा शक्तियां देने की बात थी। मगर जब इस आंदोलन ने सत्ता बदली और इससे निकले तत्व जब सत्ता में आए तो उन्होंने भ्रष्टाचार को तो और बढ़ावा दिया, लोकपाल को पूरी तरह हाशिए पर धकेल दिया और हर कदम लोकतंत्र को कमजोर करने और तानाशाही की दिशा में उठाया गया। ऐसे में वह पूरा आंदोलन ही सवालों के घेरे में आ जाता है।
पंजाब सरकार के आरोप इसलिए भी निराधार लगते हैं, क्योंकि प्रिंटिंग प्रेस तो वहां बरसों से है। अगर नियमों का उल्लंघन होता तो सरकार पहले ही कार्रवाई कर चुकी होती, पोल खोलने वाली खबरें छपने के बाद सरकार की इस तरह की कार्रवाई तो महज प्रेस की आजादी के दमन की तानाशाह नीति नजर आती है।
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