शताब्दी और राजधानी का किराया पिछली सरकार के मुकाबले ड्योढ़ा हुआ, सुविधाएं निल, नाश्ते-भोजन की क्वालिटी जस की तस

आज रिजर्वेशन कराया। यकीनन रेलवे कर्मचारियों का मिजाज सुधरा है पर रेलवे का मिजाज बिगड़ा है। शताब्दी व राजधानी का किराया डॉक्टर मनमोहन सिंह के जमाने से करीब-करीब ड्योढ़ा हो गया है। और सुविधाएं निल। नाश्ते व भोजन की क्वालिटी जस की तस है। वही पुराने दो पीस ब्राउन ब्रेड के और उतने ही बासी कटलेट नाश्ते में। मैले कप में घटिया-सी चाय और पनियल सूप।

डिनर में जो दाल मिलती है उसकी गुणवत्ता पर संदेह है कि वह पीली दाल के नाम पर खेसारी है या तूअर (अरहर)। रोटी या पराठा बस दो पीस और कंकडय़ुक्त भात जिसे रेलवे की मैन्यू में पुलाव लिखा होता है। जो पनीर की सब्जी मिलती है वह खटाती है यानी पनीर सड़ा है। दही कभी मिलता है तो कभी नहीं। चिकेन का स्वाद मुझे नहीं पता आप लोग बताइएगा। लेकिन इतना पता है कि शताब्दी, राजधानी और दूरंतो में सेवाएं बदतर हुई हैं।

मैं जब रेलवे की सलाहकार समिति में था तब सुधार के लिए लिखापढ़ी की थी और सेवाएं सुधरी थीं लेकिन फिर वही ढाक के तीन पात। चाहे सदानंद गौड़ा आएं या सुरेश प्रभु जब तक रेलवे बोर्ड का राज चलेगा मंत्री की कोई सुनेगा तक नहीं। अब छोटे कर्मचारी भले सुधर जाएं पर हाथी तो बोर्ड में बैठता है।

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल के फेसबुक वॉल से.



भड़ास का ऐसे करें भला- Donate

भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *