रेल मंत्रालय पत्रकारों को दिव्यांग समझती है!

रेल मंत्रालय पत्रकारों को दिव्यांग समझती है। अगर आप irctc.com से online ticket बुक कराएँगे तो press concession के लिए आपको कोई option नहीं मिलेगा। वेबसाईट ने प्रेस को दिव्यांग की श्रेणी में डाल रखा है। Share on:कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

संवाददाताओं के अधिकांश सवालों का संतोषप्रद जवाब नहीं दे पाए रेलमंत्री

नई दिल्ली। ट्रेन 8 से लेकर 16 घंटे लेट चल रही है। इस भीषण गर्मी में अधिकांश रेलवे स्टेशनों पर पीने का पानी नहीं है। पानी की मशीन का ढांचा खड़ा तो है पर सूखा। एक्सलेटर लगे तो हैं पर खराब पड़े हैं। लिफ्ट का इस्तेमाल डर से यात्री करते नहीं क्योंकि पता नहीं वह …

मोदीजी एंड टीम टाइम से रेल न चला सकी, देश क्या चला लेंगे!

Yashwant Singh : सिर्फ भारतीय रेल ही मोदीजी एन्ड टीम की कार्यकुशलता बताने / दिखाने के लिए काफी है। जिन्हें टाइम से रेल चलवा पाना नहीं आया, राम जानें वो देश क्या चला पा रहे होंगे। Share on:कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

अतिरिक्त उपाय नहीं किए तो रेल टिकट कन्फर्म होने की कोई गारंटी नहीं

भारतीय रेल, औकात नापने का ऐसा पैमाना है जिससे हर किसी का कभी न कभी वास्ता पड़ता है। राजा हो रंक शायद ही कोई बचा हो। कुछ दिन पहले एक दिलचस्प सर्वे पढ़ा था। सर्वेकर्ता एजेन्सी ने रिश्वत देने के मामले में राजनेताओं व ब्यूरोक्रेटस से राय ली थी कि क्या आपको कभी रिश्वत देने …

रेल में हवाई यात्रा के सुख बनाम भारतीय रेल

कल 08792 निजामुद्दीन-दुर्ग एसी सुपरफास्ट स्पेशल से वास्ता पड़ा। निजामुद्दीन से चलने का ट्रेन का निश्चित समय सवेरे 830 बजे है सुबह सात बजे नेशनल ट्रेन एनक्वायरी सिस्टम पर चेक किया तो पता चला ट्रेन राइट टाइम जाएगी। यहीं से चलती है इसलिए कोई बड़ी बात नहीं थी। स्टेशन पहुंचा तो बताया गया प्लैटफॉर्म नंबर चार से जाएगी। प्लैटफॉर्म पर पहुंच गया तो घोषणा हुई (संयोग से सुनाई पड़ गया वरना देश भर में कई स्टैशनों के कई प्लैटफॉर्म पर घोषणा सुनाई नहीं पड़ती है और हम कुछ कर नहीं सकते) कि ट्रेन एक घंटे लेट है। परेशान होने के सिवा कुछ कर नहीं सकता था।

भागवत साहब, “भारतीय रेलवे” को “हिंदू रेलवे” घोषित कर दें….

Sumant Bhattacharya :  मैं भारतीय रेल के बहाने श्रीयुत मोहन भागवत साहब के नाम खुला पत्र लिखना चाहता हूं। आदरणीय भागवत जी से मेरी अपील है कि वो भारतीय रेलवे को हिंदू घोषित करें। क्यों..? क्यों की इस पीड़ा का लेखाजोखा आपके सामने है। रेलमंत्री सुरेश प्रभु के साथ बातचीत के लिए दिल्ली के ताज पैलेस में ज़ी टीवी ने एक कार्यक्रम रखा था। ज़ी के एडिटर सुधीर चौधरी ने सुरेश प्रभु के आगमन के पहले कहा, “आज इस कार्यक्रम में भारत (मेरी नजर में दिल्ली भी नहीं) के श्रेष्ठ दिमाग मौजूद हैं, और मुझे उम्मीद है कि जब रेल मंत्री यहां से जाएंगे तो उनके सामने एक अलग ही “ब्लू प्रिंट” होगा।“ सुधीर के ये शब्द मेरे मन में काफी उम्मीद जगा गए। बहरहाल, भारतीय ट्रेन की तरह रेल मंत्री भी लेट हुए।

जब रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा को प्रधानमंत्री मोदी ने ‘कड़वी दवा’ पिला दी!

खर्चे कम करने के लिए नसीहत देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक जब रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा द्वारा फिजूलखर्ची किए जाने का मामला पहुंचा तो उन्होंने मनोज सिन्हा को ‘कड़वी दवा’ पिलाने में देर नहीं की. कहा जा रहा है कि इस दवा के पीने के बाद मनोज सिन्हा आगे से आइंदा ऐसी हरकत नहीं करेंगे. पूरा मामला क्या है, इसके बारे में विस्तार से आउटलुक हिंदी मैग्जीन में खबर का प्रकाशन किया गया है. वहीं की खबर की कटिंग करके यहां प्रकाशित किया जा रहा है… पढ़ें….

शताब्दी और राजधानी का किराया पिछली सरकार के मुकाबले ड्योढ़ा हुआ, सुविधाएं निल, नाश्ते-भोजन की क्वालिटी जस की तस

आज रिजर्वेशन कराया। यकीनन रेलवे कर्मचारियों का मिजाज सुधरा है पर रेलवे का मिजाज बिगड़ा है। शताब्दी व राजधानी का किराया डॉक्टर मनमोहन सिंह के जमाने से करीब-करीब ड्योढ़ा हो गया है। और सुविधाएं निल। नाश्ते व भोजन की क्वालिटी जस की तस है। वही पुराने दो पीस ब्राउन ब्रेड के और उतने ही बासी कटलेट नाश्ते में। मैले कप में घटिया-सी चाय और पनियल सूप।

देखिए, रेलवे के इन सरकारी गुंडों को, बिना पैसे लिए यात्रा न करने देंगे, एक यात्री ने कर लिया स्टिंग (वीडियो)

Shovan Mitra : Dear friends last Saturday I have a very horrible experience while travelling by Darjeeling Mail on 28th September, 2014 .I had been to Kolkata to attend the last rite of my fr’nds mother’s. On my way back to NJP on 28th September.I had a Tatakl waiting ticket which was not confirmed and due to heavy Puja rush there was absolutely no place to sneak into general compartment too. Without having any option left with me at the last moment, I have to enter the coaches marked for the disabled persons as the same was totally empty.