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मोदीराज में रामदेव की पतंजलि का विस्तार: घरेलू उत्पादों से लेकर नेपाल तक फैला टीवी चैनलों का जाल!

मनीष दुबे-

योग गुरु बाबा रामदेव भारतीय समाज में योग, आयुर्वेद और स्वस्थ जीवनशैली के प्रचार-प्रसार के लिए जाने जाते हैं, लेकिन पिछले दशक में वे व्यापार जगत के एक बड़े उद्यमी के रूप में भी उभर चुके हैं। उनका नाम विशेष रूप से पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड से जुड़ा है, जो आज भारत के सबसे बड़े घरेलू एफएमसीजी (FMCG) ग्रुप में से एक माना जाता है।

कौन हैं बाबा रामदेव?

बाबा रामदेव का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था और उन्होंने कम उम्र में ही योग तथा आयुर्वेद की शिक्षा ली। योग को जन-जन तक पहुँचाने के बाद उन्होंने पतंजलि आयुर्वेद की स्थापना 2006 में की। यह कंपनी अब आयुर्वेदिक दवाइयाँ, स्वास्थ्य और फूड उत्पाद सहित कई क्षेत्रों में कारोबार करती है।

पतंजलि का व्यापारिक विस्तार

पतंजलि ने अपने उत्पादों को जल्द ही भारत के कोने-कोने तक पहुँचा दिया और आज यह कंपनी छोटे स्थानीय दुग्ध, तेल, दंतमंजन, सौंदर्य तथा स्वास्थ्य उत्पादों में भी व्यापक पैठ बना चुकी है। कंपनी के उत्पादों ने HUL, Dabur और Nestlé जैसे बड़े बहुराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धियों से बाजार हिस्सेदारी छीनने का दावा भी किया है।

ये हैं उसकी कुछ मुख्य व्यावसायिक इकाइयाँ और उत्पाद:

  • पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड – आयुर्वेदिक दवाइयाँ और हेल्थ केयर उत्पाद
  • पतंजलि फूड्स – खाद्य तेल, घी, बिस्कुट और अन्य फूड प्रोडक्ट्स
  • पतंजलि वेलनेस सेंटर्स – वेलनेस और आयुर्वेदिक उपचार केंद्र सार्वजनिक और निजी उपक्रम

आगामी IPO के तहत पतंजलि मेडिसिन, पतंजलि वेलनेस और पतंजलि लाइफस्टाइल जैसी कंपनियाँ भी बाजार में प्रवेश कर सकती हैं।

पतंजलि ने कई वित्तीय वर्षों में हजारों करोड़ रुपये की आय और मुनाफ़ा दर्ज किया है। उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी की आमदनी लगभग 9,335 करोड़ रुपये थी और मुनाफ़ा भी पिछले साल की तुलना में कई गुना बढ़ा।

कितने धंधे और कहाँ-कहाँ फैल चुके हैं?

पतंजलि का कारोबार सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है। इसके उत्पाद मध्य पूर्व, रूस और अन्य वैश्विक बाज़ारों में भी पहुँच रहे हैं और कंपनी आयुर्वेद को अंतरराष्ट्रीय तौर पर लोकप्रिय बनाने के प्रयास में जुटी है। 2025 में पतंजलि ने रूस के साथ एक व्यापारिक और अनुसंधान समझौता भी किया।

मोदी सरकार आने के बाद लाभ या बढ़त

आधे दशक में जब नरेंद्र मोदी की सरकार केंद्र में आई, तब पतंजलि को विशिष्ट रूप से समर्थन और बढ़ावा मिला—विशेषकर ‘स्वदेशी’ और आयुर्वेद उत्पादों के प्रचार-प्रसार के परिप्रेक्ष्य में। माना जाता है कि सरकार की नीतियों ने पतंजलि जैसे घरेलू ब्रांडों को प्रतिस्पर्धी विदेशी ब्रांडों से मुकाबला करने में सहारा दिया। कई बड़े रूढ़िवादी तथा घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने वाले सरकारी कार्यक्रमों और सार्वजनिक आयोजनों में पतंजलि के उत्पादों को प्राथमिकता से शामिल किया गया।

विवाद और आलोचना

  • पतंजलि और बाबा रामदेव को कई आरोपों और जांचों का सामना भी करना पड़ा है।
  • उच्च न्यायालय ने पतंजलि को 50 लाख रुपये का जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया था।
  • कंपनी के उत्पादों के विज्ञापनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापन मामले में नोटिस जारी किया है।
  • 2026 में NDPS एक्ट के तहत एक उत्पाद को लेकर अदालत ने रामदेव सहित अन्य लोगों को समन जारी किया।

योग गुरु स्वामी रामदेव के नेतृत्व वाली पतंजलि समूह सिर्फ आयुर्वेद और एफएमसीजी कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका मीडिया सेक्टर में भी बड़ा विस्तार है। पतंजलि के पास कई आध्यात्मिक और धार्मिक टीवी चैनल हैं, जो मुख्य रूप से आस्था (Aastha) नेटवर्क के अंतर्गत संचालित होते हैं।

आस्था नेटवर्क के तहत चैनल

पतंजलि से जुड़े आस्था नेटवर्क में देश के अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों के लिए आध्यात्मिक चैनल शुरू किए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • आस्था तमिल
  • आस्था कन्नड़
  • आस्था तेलुगु

इन क्षेत्रीय चैनलों को वर्ष 2018 में केंद्र में भाजपा सरकार के दौरान, तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर के कार्यकाल में मंजूरी मिली थी। इन चैनलों का उद्देश्य दक्षिण भारत समेत अन्य क्षेत्रों में वैदिक ज्ञान, योग और आध्यात्मिक विचारधारा का प्रचार-प्रसार करना बताया गया।

वैदिक ब्रॉडकास्टिंग कंपनी

ये सभी चैनल बाबा रामदेव की वैदिक ब्रॉडकास्टिंग कंपनी के अंतर्गत आते हैं। इसके अलावा समूह के पास पहले से मौजूद आस्था टीवी और आस्था भजन जैसे चैनल भी हैं, जो धार्मिक प्रवचन, योग और भक्ति आधारित कार्यक्रम प्रसारित करते हैं।

हालांकि, समय-समय पर चैनलों की संख्या, नाम और संचालन की स्थिति में बदलाव होता रहा है, इसलिए सटीक संख्या को लेकर आधिकारिक अपडेट बदलते रहते हैं।

नेपाल में भी टीवी चैनल लॉन्च

पतंजलि का मीडिया विस्तार भारत तक सीमित नहीं रहा। 19 नवंबर 2021 को समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से आई एक रिपोर्ट के अनुसार, बाबा रामदेव नेपाल में भी टीवी चैनल लॉन्च करने की तैयारी में जुटे थे।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 नवंबर 2021 को रामदेव नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंचे थे, जहां उन्होंने पतंजलि आयुर्वेद समूह के दो टेलीविजन चैनलों की लॉन्च तैयारियों का निरीक्षण किया। इस दौरे में उनके साथ उनके करीबी सहयोगी और पतंजलि के प्रमुख आचार्य बालकृष्ण भी मौजूद थे।

नेपाल पतंजलि योगपीठ के अधिकारियों के अनुसार,

  • आस्था नेपाल टीवी
  • पतंजलि नेपाल टीवी

इन दोनों चैनलों को लॉन्च किए जाने की योजना थी। कार्यक्रम में नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के शामिल होने की भी संभावना जताई गई थी। इस दौरे के दौरान बाबा रामदेव ने नेपाल में—

  • पतंजलि सेवा सदन (कर्मचारियों के आवास)
  • स्वदेशी समृद्धि कार्ड

जैसी योजनाओं के उद्घाटन की तैयारियों का भी निरीक्षण किया। इसके अलावा वे पश्चिमी नेपाल के स्यांगजा जिले में पतंजलि समूह की एक अन्य विकास परियोजना का जायजा लेने भी गए थे।

इतना ही नहीं 24 मई 2018 की एक रिपोर्ट बताती है कि-

योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा प्रवर्तित और संचालित वैदिक ब्रॉडकास्टिंग (Vedic Broadcasting) ने सात नए क्षेत्रीय आध्यात्मिक टीवी चैनलों के लॉन्च की घोषणा की थी। इन चैनलों के जरिए अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों में योग, वैदिक ज्ञान और आध्यात्मिक विचारधारा को प्रसारित किया जाएगा।

घोषणा के अनुसार, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ भाषी दर्शकों को लक्षित तीन चैनल अगले एक महीने के भीतर लॉन्च किए जाएंगे। वहीं, शेष चार चैनल—ओड़िया, असमिया, मलयालम और बांग्ला भाषी दर्शकों के लिए—इसके बाद चरणबद्ध तरीके से शुरू किए जाएंगे।

वैदिक ब्रॉडकास्टिंग का दावा है कि इन चैनलों के माध्यम से दक्षिण और पूर्वी भारत समेत देश के विभिन्न हिस्सों में वैदिक संस्कृति, योग और अध्यात्म को स्थानीय भाषाओं में व्यापक स्तर पर पहुंचाया जाएगा।


यह सवाल कि मोदी सरकार के दौर में अडानी के बाद सबसे ज़्यादा फायदा क्या बाबा रामदेव को हुआ, आज के मीडिया और राजनीतिक विमर्श में बार-बार उठता रहा है। इसका कोई सीधा सरकारी या न्यायिक प्रमाण नहीं है कि यह बात औपचारिक रूप से सत्य घोषित की जा सके, लेकिन तथ्यों और घटनाक्रमों को क्रम से देखा जाए तो यह धारणा यूँ ही नहीं बनी है।

2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद योग गुरु स्वामी रामदेव और उनकी कंपनी पतंजलि आयुर्वेद का कारोबार जिस रफ्तार से फैला, वह भारतीय कॉरपोरेट इतिहास में असाधारण माना जाता है। कुछ ही वर्षों में पतंजलि एक साधारण आयुर्वेदिक ब्रांड से निकलकर FMCG, दवाइयों, खाद्य उत्पादों, वस्त्र, शिक्षा, रिसर्च, मीडिया और ब्रॉडकास्टिंग तक फैल गया। यह विस्तार ऐसे समय में हुआ जब सरकार की नीतियां ‘स्वदेशी’, ‘आयुष’ और ‘योग’ को राष्ट्रीय पहचान दिलाने पर केंद्रित थीं।

मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में ही योग को अंतरराष्ट्रीय मंच मिला और 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया। इसके साथ ही आयुष मंत्रालय को केंद्र सरकार में विशेष महत्व मिला। रामदेव, जो वर्षों से योग और आयुर्वेद का चेहरा रहे हैं, इस सरकारी एजेंडे के सबसे प्रभावी प्रतिनिधि बनकर उभरे। कई मौकों पर वह सरकार के कार्यक्रमों, मंचों और अभियानों से जुड़े दिखाई दिए, जिससे यह धारणा मजबूत हुई कि सत्ता और पतंजलि के बीच वैचारिक और नीतिगत सामंजस्य है।

कोविड काल के दौरान पतंजलि की दवाओं और उत्पादों को लेकर हुए दावे, विवाद और न्यायालयों की टिप्पणियों के बावजूद कंपनी के कारोबार पर कोई निर्णायक सरकारी रोक नहीं लगी। आलोचकों का कहना है कि जिन मामलों में अन्य कंपनियों पर सख्त कार्रवाई होती, वहां पतंजलि को अपेक्षाकृत नरमी मिली। इसी दौर में पतंजलि ने मीडिया सेक्टर में भी तेज़ी से कदम बढ़ाए—आस्था नेटवर्क, वैदिक ब्रॉडकास्टिंग और क्षेत्रीय आध्यात्मिक चैनलों की शुरुआत हुई, जिनके लिए लाइसेंस और मंज़ूरियाँ भी मिलीं।

यही कारण है कि जब मोदी सरकार के दौर में कॉरपोरेट लाभार्थियों की बात होती है, तो अडानी समूह के साथ-साथ रामदेव का नाम भी लिया जाता है। फर्क सिर्फ इतना है कि अडानी का विस्तार इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और एयरपोर्ट जैसे क्षेत्रों में रहा, जबकि रामदेव का साम्राज्य आयुर्वेद, FMCG, मीडिया और अध्यात्म के सहारे खड़ा हुआ।

निष्कर्षतः यह कहना तथ्यात्मक रूप से साबित नहीं किया जा सकता कि अडानी के बाद सबसे ज़्यादा फायदा केवल रामदेव को ही हुआ, लेकिन यह कहना भी गलत नहीं होगा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में स्वामी रामदेव और पतंजलि समूह सबसे अधिक लाभान्वित प्रभावशाली चेहरों में शामिल रहे हैं। सरकारी नीतियों, वैचारिक सामंजस्य और कारोबारी विस्तार के मेल ने रामदेव को उस स्थान पर पहुंचाया, जहां उन्हें सत्ता के दौर का बड़ा लाभार्थी मानकर देखा जाने लगा।


स्वामी रामदेव से जुड़ी इकाइयों द्वारा अधिग्रहण:
आस्था टीवी का संचालन बाद में Vedic Broadcasting Ltd. के तहत आने लगा। इस कंपनी का नियंत्रण आचार्य बालकृष्ण (जो बाबा रामदेव के बेहद निकट सहयोगी हैं) के हाथों में आ गया। बालकृष्ण के पास कंपनी के लगभग 99.9% हिस्सेदारी है, जिससे आस्था चैनल पर रामदेव-समर्थित समूह का प्रभाव स्थापित हुआ।

कब हुआ यह बदलाव?
भले ही बाबा रामदेव का नाम सीधे शेयरहोल्डर के रूप में न दिखता हो, आस्था चैनल को Vedic Broadcasting के अधीन early 2006 के आसपास खरीद लिया गया माना जाता है, जब चैनल के नियंत्रण और मालिकाना हक़ में यह बदलाव आया।

यानी यह कहा जा सकता है कि आस्था चैनल लगभग 2006 के आसपास रामदेव-समर्थित समूह के नियंत्रण में आ गया, जिसके बाद यह रामदेव के मीडिया नेटवर्क का अहम हिस्सा बन गया।

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