जलाई गईं हिन्दुस्तान अखबार की प्रतियां, पत्रकार पर दर्ज हुआ मुकदमा

बदायूं। यूपी के जिला बदायूं से खबर है कि यहां पर हिदुस्तान के एक तहसील के पत्रकार और उसके बेटे पर मुकदमा दर्ज हो गया है।

पत्रकार की गिरफ्तारी की मांग को लेकर वकीलों ने कई अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे। आरोपी पत्रकार की गिरफ्तारी न होने पर अखबार की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया।

वकीलों का आरोप है कि आरोपी पत्रकार की पुलिस से साठगांठ है तथा ब्यूरोचीफ को भी यह काफी सुविधाएं उपलब्ध कराता है जिस कारण ब्यूरोचीफ भी किसी की नहीं सुन रहे।

दैनिक जागरण और अमर उजाला ने एफआईआर की खबर छापी वहीं हिन्दुस्तान के ब्यूरो चीफ खबर को दबा गए और नामजद रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी किसी का नाम नहीं दिया।

बताया तो यहां तक जा रहा है कि अपने पत्रकार को बचाने और मुकदमा खत्म कराने के लिए अब ब्यूरो चीफ भी आगे आ गए हैं।

आरोप है कि बदायूं जिले में हिंदुस्तान अखबार के एजेंट सचिन जौहरी ने अपने साथियों के साथ मिलकर 29 जुलाई को सुबह अधिवक्ता प्राण के साथ मारपीट व लूटपाट की थी। इस मामले में 2 घंटे तक धरना प्रदर्शन हुआ। बिसौली कोतवाली के घेराव के बाद हिंदुस्तान के एजेंट सचिन जौहरी व उनके अन्य साथियों के खिलाफ पुलिस ने एफ आई आर दर्ज की। लेकिन अभी तक इनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। इसकी वजह से आक्रोशित अधिवक्ताओं ने हिंदुस्तान अखबार की प्रतियां जलाकर विरोध जताया।

अधिवक्ताओं की मांग है कि एजेंट सचिन जोहरी को हिंदुस्तान अखबार से बर्खास्त किया जाए। अधिवक्ताओं का कहना है कि सचिन जौहरी हिंदुस्तान अखबार का एजेंट है लेकिन बिसौली कस्बे में वह पत्रकार बनकर अधिकारी कर्मचारी और स्थानीय लोगों पर रौब जमाता है। इसके रौब के चलते बिसौली कोतवाली पुलिस सचिन जौहरी पर कोई कार्यवाही नहीं कर रही है।

सचिन चौधरी के पूरे कारनामे की शिकायत बदायूं ब्यूरो शैलेश शुक्ला से की गई लेकिन शैलेंद्र शुक्ला ने ना ही अपने अखबार में खबर प्रकाशित की और ना ही संबंधित एजेंट पर कोई कार्यवाही की। अधिवक्ताओं का यह भी कहना है कि हिंदुस्तान अखबार का एजेंट सचिन का पहले भी कई लोगों से विवाद हो चुका है लेकिन वह अधिकारियों से पत्रकार बनकर अपनी सांठगांठ कर लेता है जिसकी वजह से वे बच जाता है।

इस पूरे मामले की खबर अमर उजाला अखबार ने प्रमुखता से प्रकाशित की और उन्होंने नाम भी छापे। दैनिक जागरण अखबार ने भी अधिवक्ताओं की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। लेकिन हिंदुस्तान अखबार ने अपने एजेंट के चक्कर में अधिवक्ताओं की खबर सिंगल कॉलम छापी जिसमें किसी भी आरोपी का नाम भी नहीं है।

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