नई दिल्ली | प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सहारा समूह के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के लोनावला स्थित 1,460 करोड़ रुपये मूल्य की एंबी वैली सिटी संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय की कोलकाता शाखा ने मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) के तहत की है।
707 एकड़ में फैली यह हाई-प्रोफाइल प्रॉपर्टी सहारा ग्रुप द्वारा विकसित की गई थी, जिसे “भारत का पहला योजनाबद्ध हिल सिटी” बताया गया था। इसमें भव्य गोल्फ कोर्स, झीलें, विला, शैले और कॉटेज शामिल हैं, जो एक शानदार जीवनशैली का वादा करते थे। यह प्रोजेक्ट मुंबई से लगभग 110 किलोमीटर और पुणे से करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
ईडी की जांच के अनुसार, एंबी वैली सिटी की जमीन “बेनामी” नामों पर खरीदी गई थी और इसमें उपयोग किए गए फंड सहारा समूह की विभिन्न इकाइयों से “गैरकानूनी रूप से डायवर्ट” किए गए थे।
सहारा ग्रुप पर मनी लॉन्ड्रिंग और पोंजी स्कीम का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक, सहारा ग्रुप की कई सहायक कंपनियों ने एक पोंजी स्कीम के जरिए निवेशकों से पैसा जुटाया। रिपोर्ट के अनुसार, निवेशकों को धोखा दिया गया, उनकी सहमति के बिना राशि दोबारा निवेश करवाई गई और परिपक्वता पर भुगतान देने से इनकार किया गया।
एजेंसी ने बताया कि सहारा ग्रुप ने निवेशकों और एजेंटों को ऊंचे रिटर्न और कमीशन का झांसा देकर धन जुटाया और इन फंड्स का प्रयोग बिना किसी नियंत्रण के निजी खर्चों और भव्य जीवनशैली पर किया गया।
इस मामले में देश के विभिन्न राज्यों की पुलिस द्वारा 500 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें से तीन एफआईआर ओडिशा, बिहार और राजस्थान की पुलिस ने हुमारा इंडिया क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (HICCSL) के खिलाफ दर्ज की हैं।
जांच के दायरे में आई अन्य संस्थाओं में सहारा क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (SCCSL), सहारायण यूनिवर्सल मल्टीपर्पस को-ऑपरेटिव सोसाइटी (SUMCS), स्टार्स मल्टीपर्पस को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (SMCSL), सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SICCL), सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SIRECL), और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SHICL) जैसी कंपनियां भी शामिल हैं।
ईडी के अनुसार, ग्रुप ने बहीखातों में हेरफेर करके निवेश की राशि वापस किए जाने का दिखावा किया, जबकि वास्तव में न तो पुरानी रकम लौटाई गई और न ही योजनाओं पर नियंत्रण रखा गया। इसके बावजूद, नई जमाओं को स्वीकार किया जाता रहा।
इससे पहले की गई छापेमारी में एजेंसी को 2.09 करोड़ रुपये की “बेनामी” नकदी भी बरामद हुई थी।



