डॉ अजोय कुमार-
सरकारी कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया उर्फ़ SAIL कंपनी में 400 करोड़ का घोटाला हुआ है जिसके बारे में मीडिया भी बोलने से डर रही है। इस पूरे प्रकरण को उजागर करने वाले अधिकारी राजीव भाटिया को सेल ने पहले निलंबित किया फिर उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया गया।
SAIL ने 100 से ज्यादा ऐसी कंपनियों को सस्ते दाम पर 11,00,000 से ज्यादा मीट्रिक टन स्टील बेचा, जो किसी भी निर्माण कार्य में शामिल नहीं थीं, लेकिन निर्माण कार्य के नाम पर SAIL से मिलने वाली छूट को ले रही थीं।
ये कंपनियां (उनमें से एक VIPPL था) सेल से कम दाम में खरीदे गए स्टील को महंगे दर पर अन्य कंपनियों को बेच रही थीं।
इस अनियमितता से सेल को 400 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ। VIPPL और सेल के करार की असली वजह थी APCO का प्रमाण-पत्र।
APCO ने 15 जनवरी 2020 से 12 अक्टूबर 2023 के बीच 30 करोड़ रुपये के BJP चुनावी बॉन्ड खरीदे थे। भले ही SAIL को नुकसान हुआ लेकिन बीजेपी के दोस्तों को फायदा हुआ।
जिस कंपनी ने बीजेपी को चंदा दिया, उसी को धंधा मिला। साफ है ‘चंदा दो, धंधा लो’
Steel Authority of India Limited में करोड़ों का घोटाला हुआ है। यह भारत की नवरत्न कंपनी है। SAIL का नियम है कि- इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए वह सस्ते में स्टील देती है।
एक मध्य वर्ग के परिवार के सदस्य राजीव भाटिया SAIL में GM बने, ताकि वह देश की सेवा कर सकें। उन्होंने देखा कि SAIL को कई कंपनियां चूना लगा रही हैं। SAIL ने सस्ते दाम में 11 लाख टन स्टील 100 कंपनियों को बेच दिया।
ये 100 कंपनी उस स्टील को खरीद कर बेच देती है। एक उदाहरण देखिए –
- ‘वेंकटेश इन्फ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक कंपनी है, जो 1 अक्टूबर 2020 को बनाई जाती है।
- यही कंपनी 12 अक्टूबर 2020 को डेढ़ लाख टन के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट साइन करती है।
- सिर्फ 10 दिन पहले बनी कंपनी को 750 करोड़ रुपए का ठेका दे दिया जाता है।
- इस कंपनी की पैरवी एक दूसरी कंपनी करती है, जो सितंबर में ही SAIL को एक चिट्ठी भेज देती है कि हमने वेंकटेश इन्फ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के साथ बहुत काम किया है।
यह मोदी जी का ‘अमृत काल’ है।



