Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

टीवी

न्यूज चैनलों को समोसा जलेबी का टारगेट, अजीत अंजुम ने पत्रकारिता की तो FIR!

मनीष दुबे-

टीवी न्यूज़ चैनलों पर इन दिनों ‘स्वास्थ्य’ के नाम पर समोसा-जलेबी की बहस चल रही है। हैरानी की बात यह है कि जिन मंचों पर देसी व्यंजनों को स्वास्थ्य के दुश्मन के तौर पर पेश किया जा रहा है, वहां विदेशी पिज्ज़ा और बर्गर पर चुप्पी साध ली गई है। एक फोटो में टीवी एंकर सुधीर चौधरी समोसा, कचौड़ी, जलेबी, दही बड़े और दाल के पकोड़ों के साथ नजर आ रहे हैं। ये तस्वीर बहस से ज़्यादा उस एंगल को उजागर करती है जहां बहस के नाम पर जनता को असल मुद्दों से भटकाया जा रहा है।

यह तस्वीर पोस्ट करने से पहले सुधीर चौधरी ने दूरदर्शन के अपने कार्यक्रम डिकोड में समोसा जलेबी पर एक शो बनाकर पेश किया। हालांकि, समोसा जलेबी को लेकर जो भी खबरे टीवी चैनलों पर बनाई चलाई जा रही हैं उसे पीआईबी ने फौरन भ्रामक भी बता दिया है।

इस बहस ने नया मोड़ तब लिया जब वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम ने बिहार चुनाव में कथित वोटों की हेराफेरी को लेकर चुनाव आयोग पर बड़ा खुलासा किया। उन्होंने यह मामला सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों से उठाया, जिसके बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई। सवाल यह उठता है कि लोकतंत्र में सवाल उठाने वालों को दबाने की कोशिश क्यों हो रही है?

बल्कि इस कार्रवाई से यह संदेश गया कि जो भी लोकतंत्र की प्रक्रियाओं पर उंगली उठाएगा, उसे सजा दी जाएगी।

स्वास्थ्य की बहस या वर्गभेदी सोच?
पोषण विशेषज्ञ मानते हैं कि कोई भी चीज़ — चाहे समोसा हो या बर्गर — यदि नियमित रूप से और अधिक मात्रा में खाई जाए, तो वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। लेकिन सवाल उठता है कि बहस केवल समोसा-जलेबी पर क्यों? क्या क्योंकि ये गरीबों और मध्यम वर्ग की थाली में होते हैं, जबकि पिज्ज़ा-बर्गर अमीरों की पसंद हैं और बड़े ब्रांड्स से जुड़े हैं?

क्या बहसें असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का ज़रिया बन गई हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीवी डिबेट्स अब सूचना नहीं, बल्कि भ्रम फैलाने का माध्यम बन गई हैं। जैसे ही कोई गंभीर सवाल उठता है — जैसे चुनावी पारदर्शिता, वैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही — बहस को समोसा-जलेबी के स्वाद में डुबो दिया जाता है।

ये भी पढ़ें….

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन