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हर फ़ोन में होगा देसी पेगासस!

मोबाइल फोन में सरकार द्वारा संचार साथी एप (देशी पेगासस) इंस्टाल कराने संबंधी आदेश को लेकर सोशल मीडिया में भूचाल मच गया है। लोग जमकर इसकी खिलाफत कर रहे हैं और अपनी निजता पर सरकारी हमला करार दे रहे हैं। क्या है पूरा मसला और कौन क्या लिख रहा है…? नीचे पढ़ें


तानाशाह तो हमेशा ही जनता के ऊपर निगाह रखना चाहते थे। गेस्टापो हो जर्मनी की या सोवियत संघ की चेका, बनी ही इसलिए थी। लेकिन लोकतंत्र में जनता के मोबाइलों के ऐसे घुसने की क्या ज़रूरत है सरकार को? इस ख़बर का तो यही मतलब है कि अब हर फ़ोन में देशी पेगासस होगा।

-अशोक कुमार पांडेय


सौमित्र राय-

एक मोबाइल ही तो अपना था। लगता है अब वह भी एक अंजान जासूस संचार साथी का हो जाएगा। अगले 90 दिन में मोदी सत्ता सिर्फ नए फोन ही नहीं, बल्कि पुराने फोन में भी जासूस बिठा देने वाली है। तमाम मैसेजेस, सोशल मीडिया पोस्ट और यहां तक कि फोटू और UPI ट्रांजैक्शंस पर भी सत्ता की नज़र रहेगी। ये आपकी प्राइवेसी का SIR है।


Even pegasus seems more benign than this- government wants to install an app in all mobile phones to monitor your activity, locations, conversations and transactions.- सुहासिनी हैदर


मनीष दुबे-

दुनिया में सिर्फ दो देश… रूस और उत्तर कोरिया – जहाँ सरकार के मोबाइल ऐप नागरिकों के फ़ोन से हटाए नहीं जा सकते।

अब मोदी सरकार ने स्मार्टफोन निर्माताओं से कहा है कि भारत में बनने वाले सभी नए उपकरणों में सरकारी ऐप ‘संचार साथी’ को प्री-लोड किया जाए और उसे डिलीट न किया जा सके।

यानी वोट देकर सरकार बनाने वाली जनता 24×7 सरकार की निगरानी में रहेगी।


अरविंद गुनासेखर-

एक और विवादित कदम—केंद्र सरकार ने मोबाइल निर्माताओं को निर्देश दिया है कि वे सभी नए मोबाइल फोनों में ‘संचार साथी मोबाइल एप्लिकेशन’ अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करें। इस ऐप की फंक्शनैलिटीज़ को न तो डिसेबल किया जा सकेगा और न ही सीमित किया जा सकेगा।

क्या इसका मतलब है कि सरकार को हमारे फोन तक अनियंत्रित पहुँच मिल जाएगी? यही सवाल अब देशभर में उठने लगा है।

https://twitter.com/daarubaazmehta/status/1995540341316092373?s=48

तहसीन पूनावाला-

ये तो हद है! जागो भारत! सरकार का Sanchar Saathi ऐप अनिवार्य बनाना हमारी निजता और स्वतंत्रता पर सीधा हमला है! हर नए फ़ोन में इसे जबरन प्री-इंस्टॉल करना, और उसे अनइंस्टॉल तक न करने देना—और वो भी ‘सुरक्षा’ के नाम पर—सरकार को यह संभावित शक्ति देता है कि वह हमारी कॉल, मैसेज और लोकेशन पर नज़र रख सके।

यह सबसे ख़तरनाक स्तर की निगरानी है—हमें अपराधियों की तरह ट्रैक करने की खुली छूट!

हमें इसका विरोध करना होगा। ये वो परमिशन हैं जो Sanchar Saathi ऐप मांग सकता है!


मनोज अरोड़ा-

सरकारी जासूसी का अगला स्तर तय… टेलीकॉम मंत्रालय ने स्मार्टफ़ोन कंपनियों को “चुपचाप” निर्देश दिया है कि वे हर नए फ़ोन में एक सरकार-स्वामित्व वाले साइबर सुरक्षा ऐप को प्री-लोड करें—और ध्यान रहे, यह ऐप डिलीट भी नहीं किया जा सकेगा। मज़े कीजिए!!!


राजू पारुलेकर-

हमारी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए चार्टर:

एक बार संचार सारथि ऐप हमारे फ़ोन में आ गया, तो कोई भी देशभक्त, देश-प्रेमी नागरिक, स्वतंत्रता-प्रेमी व्यक्ति या तार्किक सोच रखने वाला इंसान ईमानदारी से स्मार्टफ़ोन का उपयोग जारी नहीं रख पाएगा। ऐसा करना मतलब अपनी गोपनीयता को फासीवाद की वेदी पर बलि चढ़ाना होगा।

मैं मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल छोड़ दूँगा, सोशल मीडिया छोड़ दूँगा—अपनी स्वतंत्रता और निजता के अधिकार की रक्षा करने के लिए मैं जो भी करना पड़ेगा, करूँगा; वह अधिकार जिसके लिए हमारे पूर्वजों ने बहादुरी से लड़ाई लड़ी थी। यदि आपको लगता है कि आप सुरक्षित हैं क्योंकि आपके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो आप गलत हैं।

इस देश में जिनके पास कुछ छिपाने को है, वही सबसे सुरक्षित हैं।


राजेश साहू-

अब हर नए स्मार्टफोन में साइबर सिक्योरिटी एप ‘संचार साथी’ प्री-इंस्टॉल (पहले से डाउनलोड) मिलेगा। केंद्र सरकार ने स्मार्टफोन कंपनियों को आदेश दिया कि वे स्मार्टफोन में सरकारी साइबर सेफ्टी एप को पहले से इंस्टॉल करके बेचें।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ये आदेश आज सामने आया है। इसमें एपल, सैमसंग, वीवो, ओप्पो और शाओमी जैसी मोबाइल कंपनियों को 90 दिन का समय दिया गया है। इस एप को यूजर्स डिलीट या डिसेबल नहीं कर सकेंगे। पुराने फोन पर सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए यह एप इंस्टॉल किया जाएगा।

हालांकि यह आदेश फिलहाल पब्लिक नहीं किया गया है, बल्कि चुनिंदा कंपनियों को निजी तौर पर भेजा गया है। इसका मकसद साइबर फ्रॉड, फर्जी IMEI नंबर और फोन की चोरी को रोकना है।

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