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एचटी और नईदुनिया जैसे बड़े अखबार भोपाल की प्राइम लोकेशन पर बंगला कबाड़े हुए हैं!

मध्यप्रदेश की साहसिक महिला राजपत्रित अधिकारी ने बरसों धीरज रखने के बाद अपने दाम्पत्य जीवन के कृष्ण पक्ष को सकुचाते हुए सार्वजनिक किया है. इससे संबंधित पोस्ट में जहाँ साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े पति के भटकने का सच है वहीं अनजाने ही पत्रकार कोटे के सरकारी मकानों का काला सच एक बार फिर सामने आ गया है. मैं इस काले सच को हाईकोर्ट में जनहित याचिका के मार्फ़त उजागर कर चुका हूं.

मध्यप्रदेश की साहसिक महिला राजपत्रित अधिकारी ने बरसों धीरज रखने के बाद अपने दाम्पत्य जीवन के कृष्ण पक्ष को सकुचाते हुए सार्वजनिक किया है. इससे संबंधित पोस्ट में जहाँ साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े पति के भटकने का सच है वहीं अनजाने ही पत्रकार कोटे के सरकारी मकानों का काला सच एक बार फिर सामने आ गया है. मैं इस काले सच को हाईकोर्ट में जनहित याचिका के मार्फ़त उजागर कर चुका हूं.

धन्ना सेठ बिड़ला का अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स और यूपी के मीडिया मुग़ल जागरण ग्रुप का अख़बार नईदुनिया ऑफिस के नाम पर भोपाल की प्राइम लोकेशन पर बंगला कबाड़े हुए हैं. जागरण ग्रुप ने यह अख़बार अभय छजलानी से खरीदा है तो मान लीजिए की सरकारी बँगला भी इस सौदे का हिस्सा रहा होगा. इस मामले में बेशर्मी की सारी हदें राष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी यूएनआई ने पार की हैं. इसका ऑफिस पचास सालों से सरकारी बंगले में लग रहा है. एजेंसी ने खुद के ऑफिस के लिए सरकार से प्रेस काम्प्लेक्स में कौड़ियों के भाव जमीन कबाड़ी और कई मंजिल बिल्डिंग भी तान दी. फिर एजेंसी ने यह बिल्डिंग बेच खाई और ऑफिस शान के साथ सरकारी बंगले में लग रहा है. वैसे प्रेस कोटे के मकानों का ऑफिस के लिए आवंटन समझ से परे है.

अब सरकारों से उम्मीद मत करिएगा की वह इस गोरखधंधे का खात्मा करेगी. इसके उलट वे तो प्रेस पूल की आड़ लेकर पार्टी की संस्थाओं और अपने कृपापात्र नेताओं को बंगले एलाट करती रही हैं और रहेंगी. कांग्रेस के दिग्गज नेता स्वर्गीय ललित श्रीवास्तव,महेंद्रसिंह चौहान,किशन पंत और भाजपा के कद्दावर नेता कैलाश सारंग को बाहैसियत पत्रकार सरकारी बंगले मिलते रहे हैं.तीन साल पहले मेरी याचिका पर दी गई जानकारी के मुताबिक ललित श्रीवास्तव के नाम तब भी बँगला एलाट था जबकि उनका निधन सात आठ बरस पहले हो चुका है..? सब दूर आनंद ही आनंद है.

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एक पत्रकार महोदय को सरकारी आवास आवंटित है जो अन्यत्र रहते हैं और सरकारी आवास को इन्होंने एक महिला को किराये पर दे रखा है. यह महिला इस एफ टाइप के बड़े आवास में मजे से अकेले रहती है और शासकीय कार्यालयों में सामान सप्लाई का बिजनेस करती है. इसके पहले ये एक साहित्यिक संस्थान को आवंटित आवास में निवास करती थी. फिर इन्होने संस्थान के निदेशक के सहयोग से अपना बिजनेस शुरू किया. इस संस्थान के निदेशक ने इस महिला के चक्कर में पड़कर न केवल संस्थान की प्रगति और विकास पर ध्यान देना बंद कर दिया बल्कि अपने परिवार, पत्नी और बच्चों को अपमानित, प्रताड़ित करना आरंभ कर दिया पत्नी और परिवार के सभी सदस्यों के समझाने पर इन्होंने अपने परिवार से संबंध खत्म कर लिये जबकि इस महिला से संबंध यथावत हैं.

भोपाल के पत्रकार श्रीप्रकाश दीक्षित की रिपोर्ट.

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